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ईरान युद्ध में जले ट्रंप के हाथ, भंडार से 172 मिलियन बैरल तेल निकालने को मजबूर हुआ अमेरिका

प्रकाशित: 12-03-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
ईरान युद्ध में जले ट्रंप के हाथ, भंडार से 172 मिलियन बैरल तेल निकालने को मजबूर हुआ अमेरिका
ईरान में जंग छेड़कर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शायद उस चिंगारी को भड़का दिया है जो खुद उनके घर को झुलसाने लगी है. मिडिल ईस्ट में जारी जंग ने तेल की कीमतों में ऐसी आग लगाई है कि खुद अमेरिका के लोग परेशान हो गए हैं. ऐसे में अमेरिका के ऊर्जा विभाग ने बुधवार, 11 मार्च को कहा कि वह "अगले सप्ताह से" अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से 172 मिलियन बैरल जारी करेगा. वजह साफ है- मिडिल ईस्ट के युद्ध ने तेल की कीमतों में भूचाल ला दिया है.
अमेरिका के ऊर्जा विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि योजनाबद्ध डिस्चार्ज दरों के आधार पर इस 172 मिलियन बैरल रिलीज को वितरित होने में लगभग 120 दिन लगेंगे. इस पोस्ट में ईरान पर "अमेरिका और उसके सहयोगियों की ऊर्जा सुरक्षा" में हेरफेर करने और धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है.
ट्रंप ने ईरान पर हमलों को तेल की कीमतों में कमी से जोड़ा
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से वैश्विक तेल कीमतों को कम करने में मदद मिलेगी. उन्होंने केंटकी में अपने समर्थकों से कहा कि आपातकालीन कच्चे तेल के भंडार की रिलीज और तेहरान पर लगातार दबाव बनाए रखने से ऊर्जा बाजार स्थिर हो जाएंगे. केंटकी के हेब्रोन में एक कार्यक्रम में बोलते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के खिलाफ जारी अमेरिकी सैन्य अभियान का बचाव किया और कहा कि वॉशिंगटन अपने उद्देश्यों की प्राप्ति तक अभियान जारी रखेगा.
ट्रंप ने कहा कि ईरान की वायुसेना “खत्म हो चुकी है, पूरी तरह खत्म”, और देश के पास अब कोई काम करने वाला रडार या एंटी-एयरक्राफ्ट उपकरण नहीं बचा है. उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान की मिसाइल क्षमता “90 प्रतिशत कम हो गई है” और उसके ड्रोन “85 प्रतिशत तक नष्ट हो चुके हैं.” उन्होंने कहा, “हम उन फैक्ट्रियों को लगातार उड़ा रहे हैं जहां ये बनाए जाते हैं और सच कहूं तो किसी ने भी ऐसा पहले कभी नहीं देखा.” राष्ट्रपति ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ पहले की अमेरिकी कार्रवाइयों का भी जिक्र किया और कहा कि सेना ने “ईरान की परमाणु क्षमता को पूरी तरह नष्ट कर दिया है.” ट्रंप ने तर्क दिया कि भविष्य के खतरों को रोकने के लिए यह अभियान जरूरी है और जोर देकर कहा कि अमेरिका समय से पहले पीछे नहीं हटेगा.