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ईरान से जंग के बीच भारत पर ‘टैरिफ बम’ गिराने की तैयारी में ट्रंप, चीन समेत 16 देशों के खिलाफ शुरू की जांच

प्रकाशित: 12-03-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
ईरान से जंग के बीच भारत पर ‘टैरिफ बम’ गिराने की तैयारी में ट्रंप, चीन समेत 16 देशों के खिलाफ शुरू की जांच
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने 16 प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों की उन व्यापारिक नीतियों और प्रथाओं की नई जांच शुरू की है, जिन्हें अमेरिका ‘अनुचित’ मानता है। इस कदम से भारत सहित कई देशों पर अतिरिक्त टैरिफ या अन्य आर्थिक दंड लगाए जाने की संभावना बढ़ गई है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने पहले लगाए गए कुछ टैरिफ को खारिज कर दिया था, जिसके बाद ट्रंप प्रशासन नए विकल्पों की तलाश कर रहा है।
अत्यधिक औद्योगिक उत्पादन क्षमता को लेकर शुरू की गई इस जांच में भारत के अलावा यूरोपीय संघ, चीन, जापान और कई अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। माना जा रहा है कि इस कदम से अमेरिका और उसके प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ सकता है।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि का सख्त रुख
समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर ने बताया कि ट्रंप प्रशासन दो अलग-अलग जांच शुरू कर रहा है। पहली जांच जरूरत से ज्यादा उत्पादन क्षमता पर केंद्रित है, जबकि दूसरी जांच जबरन मजदूरी से बने सामानों के आयात को लेकर है।
उन्होंने कहा कि इस गर्मियों तक चीन, यूरोपीय संघ, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया और मेक्सिको के खिलाफ नए टैरिफ लगाए जा सकते हैं। इस सूची में ताइवान, वियतनाम, थाईलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, स्विट्जरलैंड और नॉर्वे भी शामिल हैं। हालांकि अमेरिका के दूसरे सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार कनाडा को इस जांच से बाहर रखा गया है।
अमेरिका ऐसा कदम जरूर उठाएगा
ग्रीर ने कहा कि अमेरिका को अपनी नौकरियों की रक्षा करनी है और यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उसके व्यापारिक साझेदारों के साथ व्यापार पूरी तरह निष्पक्ष हो। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर समस्या को हल करने के लिए टैरिफ लगाना जरूरी हुआ तो अमेरिका ऐसा कदम जरूर उठाएगा। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि संभावित टैरिफ अलग-अलग देशों के लिए अलग होंगे या सभी पर समान रूप से लागू होंगे।
चीन की इलेक्ट्रिक वाहन क्षमता पर सवाल
ग्रीर के अनुसार, चीन की इलेक्ट्रिक वाहन उत्पादन क्षमता उसकी घरेलू मांग से कहीं अधिक है। इसके बावजूद चीन की प्रमुख ईवी निर्माता कंपनी बीवाईडी उज्बेकिस्तान, थाईलैंड, ब्राजील, हंगरी और तुर्की में अपने कारखाने स्थापित कर रही है और यूरोप में भी विस्तार की योजना बना रही है।
इसके अलावा जर्मनी और आयरलैंड के बड़े व्यापार अधिशेष को यूरोपीय संघ की अतिरिक्त औद्योगिक क्षमता का उदाहरण बताया गया है। वहीं अमेरिका के साथ व्यापार घाटे के बावजूद सिंगापुर में सेमीकंडक्टर उत्पादन की बड़ी क्षमता और नॉर्वे से ईंधन व समुद्री भोजन के भारी निर्यात को भी उदाहरण के रूप में पेश किया गया है।
जबरन मजदूरी को लेकर भी जांच
दूसरी जांच जबरन मजदूरी से बने सामानों के आयात को लेकर है। ग्रीर के मुताबिक यह जांच करीब 60 व्यापारिक साझेदार देशों को प्रभावित कर सकती है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन पर व्यापक असर पड़ सकता है।
अमेरिका पहले ही पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन द्वारा हस्ताक्षरित उइगर फोर्स्ड लेबर प्रोटेक्शन एक्ट के तहत चीन के शिनजियांग क्षेत्र से आने वाले सोलर पैनल और अन्य सामानों पर कार्रवाई कर चुका है। अमेरिका का आरोप है कि चीन ने उइगर और अन्य मुस्लिम अल्पसंख्यकों के लिए श्रम शिविर बनाए हैं, हालांकि चीन इन आरोपों से इनकार करता है।
ट्रंप प्रशासन का यह कदम रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब अप्रैल में बीजिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक अहम बैठक प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि इस नई जांच का असर दोनों नेताओं की आगामी बातचीत पर भी पड़ सकता है।