अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान में नागरिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाना: क्या यह आत्मसमर्पण कराने की रणनीति है?
प्रकाशित: 11-03-2026 | लेखक: आदित्य नरेंद्र
आदित्य नरेन्द्र
ईरान के साथ चल रहे संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। मार्च 2026 में शुरू हुए इस युद्ध में अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के सैन्य ठिकानों, नेतृत्व और बुनियादी ढांचे पर बड़े पैमाने पर हमले किए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से “बिना शर्त आत्मसमर्पण” की मांग की है, जबकि ईरान ने इन हमलों को नागरिकों पर अत्याचार बताते हुए जवाबी कार्रवाई की है। क्या ये हमले वास्तव में नागरिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर ईरान को झुकाने की कोशिश हैं?
संघर्ष की पृष्ठभूमि
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर संयुक्त हवाई हमले शुरू किए, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या हो गई। इस ऑपरेशन को अमेरिका ने ‘एपिक फ्यूरी’ और इज़राइल ने ‘रोअरिंग लायन’ नाम दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, पिछले सप्ताह में ईरान में 3000 से अधिक लक्ष्यों पर हमले किए गए हैं, जिसमें ईरान की नौसेना, वायुसेना, मिसाइल सुविधाएं और परमाणु कार्यक्रम शामिल हैं। ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान की सैन्य क्षमता “लगभग नष्ट” हो चुकी है और उन्होंने ईरान से “क्राई अंकल” (समर्पण) की अपेक्षा जताई है।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने कहा है कि ईरान कभी समर्पण नहीं करेगा और अमेरिकी ठिकानों पर हमलों को बढ़ाएगा। ईरान ने जवाबी हमलों में बहरीन के एक जल शोधन संयंत्र को निशाना बनाया, जिससे नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों की चिंता बढ़ गई है।
नागरिक प्रतिष्ठानों पर हमलों की रिपोर्ट्स
युद्ध में अब तक 1200 से अधिक नागरिकों की मौत हो चुकी है। ईरान के संयुक्त राष्ट्र राजदूत ने आरोप लगाया है कि अमेरिका और इज़राइल जानबूझकर नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहे हैं। उदाहरण के लिए, तेहरान में तेल सुविधाओं पर इज़राइली हमले से बड़े विस्फोट हुए, जो नागरिक क्षेत्रों के निकट थे। इसके अलावा, एक लड़कियों के स्कूल पर हमले की जांच चल रही है, जिसमें 175 छात्र और स्टाफ मारे गए, और प्रारंभिक जांच में अमेरिकी हवाई हमले की संभावना जताई गई है।
अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा है कि अमेरिका कभी नागरिकों को निशाना नहीं बनाता, लेकिन ईरान आबादी वाले क्षेत्रों से हमले कर रहा है, जिससे नागरिकों को खतरा है। अमेरिका ने ईरान के नागरिकों को चेतावनी दी है कि वे घर पर रहें, क्योंकि ईरान सैन्य लॉन्च साइट्स के रूप में आबादी वाले इलाकों का उपयोग कर रहा है।
ईरान ने भी आरोप लगाया है कि अमेरिका और इज़राइल नागरिकों को निशाना बना रहे हैं, जिसमें तेहरान में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) मुख्यालय पर हमला शामिल है। इज़राइल ने तेहरान में भूमिगत बंकरों को निशाना बनाया, जहां परमाणु गतिविधियां स्थानांतरित की गई थीं।
क्या यह आत्मसमर्पण कराने की रणनीति है?
ट्रंप और इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि उनका लक्ष्य ईरान की सैन्य क्षमता को नष्ट करना और शासन परिवर्तन की स्थिति पैदा करना है। ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ कोई समझौता नहीं होगा जब तक “बिना शर्त आत्मसमर्पण” नहीं होता। जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय की प्रोफेसर नार्गेस बाजोगली का मानना है कि अमेरिका और इज़राइल ईरान की ताकत को कम आंक रहे हैं, और ईरान “समर्पण नहीं करेगा” बल्कि लंबे युद्ध के लिए तैयार है। वे चेतावनी देती हैं कि इज़राइल “दाहिया डॉक्ट्रिन” अपनाकर घनी आबादी वाले क्षेत्रों पर कार्पेट बॉम्बिंग कर सकता है, जो नागरिकों को शासन के खिलाफ मोड़ने की रणनीति है।
हालांकि, अमेरिका और इज़राइल आधिकारिक रूप से नागरिक लक्ष्यों से इनकार करते हैं, लेकिन रिपोर्ट्स में नागरिक मौतें और बुनियादी ढांचे पर हमले की घटनाएं दर्ज हैं। एक पीबीएस पोल के अनुसार, अधिकांश अमेरिकी इस सैन्य कार्रवाई का विरोध करते हैं। यह संघर्ष क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है, और नागरिक प्रतिष्ठानों पर हमले आत्मसमर्पण कराने की अप्रत्यक्ष रणनीति हो सकते हैं, लेकिन यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन माना जा सकता है।
निष्कर्ष में, जबकि आधिकारिक लक्ष्य सैन्य हैं, नागरिक प्रभाव से इनकार नहीं किया जा सकता। यह युद्ध ईरान को झुकाने का प्रयास लगता है, लेकिन ईरान की दृढ़ता से लंबा खिंच सकता है। वैश्विक समुदाय को शांति प्रयासों पर ध्यान देना चाहिए।
ईरान के साथ चल रहे संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। मार्च 2026 में शुरू हुए इस युद्ध में अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के सैन्य ठिकानों, नेतृत्व और बुनियादी ढांचे पर बड़े पैमाने पर हमले किए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से “बिना शर्त आत्मसमर्पण” की मांग की है, जबकि ईरान ने इन हमलों को नागरिकों पर अत्याचार बताते हुए जवाबी कार्रवाई की है। क्या ये हमले वास्तव में नागरिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर ईरान को झुकाने की कोशिश हैं?
संघर्ष की पृष्ठभूमि
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर संयुक्त हवाई हमले शुरू किए, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या हो गई। इस ऑपरेशन को अमेरिका ने ‘एपिक फ्यूरी’ और इज़राइल ने ‘रोअरिंग लायन’ नाम दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, पिछले सप्ताह में ईरान में 3000 से अधिक लक्ष्यों पर हमले किए गए हैं, जिसमें ईरान की नौसेना, वायुसेना, मिसाइल सुविधाएं और परमाणु कार्यक्रम शामिल हैं। ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान की सैन्य क्षमता “लगभग नष्ट” हो चुकी है और उन्होंने ईरान से “क्राई अंकल” (समर्पण) की अपेक्षा जताई है।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने कहा है कि ईरान कभी समर्पण नहीं करेगा और अमेरिकी ठिकानों पर हमलों को बढ़ाएगा। ईरान ने जवाबी हमलों में बहरीन के एक जल शोधन संयंत्र को निशाना बनाया, जिससे नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों की चिंता बढ़ गई है।
नागरिक प्रतिष्ठानों पर हमलों की रिपोर्ट्स
युद्ध में अब तक 1200 से अधिक नागरिकों की मौत हो चुकी है। ईरान के संयुक्त राष्ट्र राजदूत ने आरोप लगाया है कि अमेरिका और इज़राइल जानबूझकर नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहे हैं। उदाहरण के लिए, तेहरान में तेल सुविधाओं पर इज़राइली हमले से बड़े विस्फोट हुए, जो नागरिक क्षेत्रों के निकट थे। इसके अलावा, एक लड़कियों के स्कूल पर हमले की जांच चल रही है, जिसमें 175 छात्र और स्टाफ मारे गए, और प्रारंभिक जांच में अमेरिकी हवाई हमले की संभावना जताई गई है।
अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा है कि अमेरिका कभी नागरिकों को निशाना नहीं बनाता, लेकिन ईरान आबादी वाले क्षेत्रों से हमले कर रहा है, जिससे नागरिकों को खतरा है। अमेरिका ने ईरान के नागरिकों को चेतावनी दी है कि वे घर पर रहें, क्योंकि ईरान सैन्य लॉन्च साइट्स के रूप में आबादी वाले इलाकों का उपयोग कर रहा है।
ईरान ने भी आरोप लगाया है कि अमेरिका और इज़राइल नागरिकों को निशाना बना रहे हैं, जिसमें तेहरान में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) मुख्यालय पर हमला शामिल है। इज़राइल ने तेहरान में भूमिगत बंकरों को निशाना बनाया, जहां परमाणु गतिविधियां स्थानांतरित की गई थीं।
क्या यह आत्मसमर्पण कराने की रणनीति है?
ट्रंप और इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि उनका लक्ष्य ईरान की सैन्य क्षमता को नष्ट करना और शासन परिवर्तन की स्थिति पैदा करना है। ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ कोई समझौता नहीं होगा जब तक “बिना शर्त आत्मसमर्पण” नहीं होता। जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय की प्रोफेसर नार्गेस बाजोगली का मानना है कि अमेरिका और इज़राइल ईरान की ताकत को कम आंक रहे हैं, और ईरान “समर्पण नहीं करेगा” बल्कि लंबे युद्ध के लिए तैयार है। वे चेतावनी देती हैं कि इज़राइल “दाहिया डॉक्ट्रिन” अपनाकर घनी आबादी वाले क्षेत्रों पर कार्पेट बॉम्बिंग कर सकता है, जो नागरिकों को शासन के खिलाफ मोड़ने की रणनीति है।
हालांकि, अमेरिका और इज़राइल आधिकारिक रूप से नागरिक लक्ष्यों से इनकार करते हैं, लेकिन रिपोर्ट्स में नागरिक मौतें और बुनियादी ढांचे पर हमले की घटनाएं दर्ज हैं। एक पीबीएस पोल के अनुसार, अधिकांश अमेरिकी इस सैन्य कार्रवाई का विरोध करते हैं। यह संघर्ष क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है, और नागरिक प्रतिष्ठानों पर हमले आत्मसमर्पण कराने की अप्रत्यक्ष रणनीति हो सकते हैं, लेकिन यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन माना जा सकता है।
निष्कर्ष में, जबकि आधिकारिक लक्ष्य सैन्य हैं, नागरिक प्रभाव से इनकार नहीं किया जा सकता। यह युद्ध ईरान को झुकाने का प्रयास लगता है, लेकिन ईरान की दृढ़ता से लंबा खिंच सकता है। वैश्विक समुदाय को शांति प्रयासों पर ध्यान देना चाहिए।