LPG किल्लत से निपटने के लिए भारत का प्लान-B तैयार, अब इन देशों से आ रही LPG की खेप
प्रकाशित: 11-03-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के कारण दुनिया भर में तेल और गैस की किल्लत बढ़ गई है। इसका असर भारत में भी साफ दिखाई दे रहा है और खासतौर पर एलपीजी को लेकर संकट गहराता नजर आ रहा है। हालांकि इन हालातों के बीच सरकार तुरंत एक्शन मोड में आ गई है और कई अहम फैसले लिए गए हैं।
सरकार ने देश में घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का प्लान-बी भी लागू कर दिया गया है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार अल्जीरिया, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अन्य देशों से एलएनजी-एलपीजी की अतिरिक्त खेपें भारत पहुंचने लगी हैं।
संकट के बीच बढ़ाया गया उत्पादन
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है। एलपीजी और तेल की सप्लाई में रुकावट के कारण कई देशों में संकट गहरा गया है। भारत में बढ़ती चिंता के बीच सरकार ने कमर्शियल एलपीजी के इस्तेमाल पर सख्ती दिखाई है और घरेलू गैस की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी भारतीय रिफाइनरियों ने एलपीजी के घरेलू उत्पादन में करीब 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है।
सरकार का प्लान-बी कैसे कर रहा काम?
एलपीजी संकट से निपटने के लिए सरकार ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ दूसरे देशों से अतिरिक्त एलएनजी-एलपीजी मंगाने की रणनीति अपनाई है। एक सरकारी सूत्र के मुताबिक नॉर्वे समेत कई देशों से अतिरिक्त गैस कार्गो भारत आने शुरू हो गए हैं।
पिछले कुछ वर्षों में कई बार अंतरराष्ट्रीय तनाव, जैसे टैरिफ विवाद या खाड़ी क्षेत्र में तनाव, के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने का खतरा बना रहा है। ऐसे जोखिम को देखते हुए सरकार ने पहले ही गैस आयात के स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति अपनाई थी, जो मौजूदा संकट में मददगार साबित हो रही है।
भारत में गैस कहां-कहां से आती है?
भारत में एलएनजी की सबसे बड़ी आपूर्ति कतर से होती है, जिसकी हिस्सेदारी लगभग 42% है। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात, अंगोला और नाइजीरिया जैसे देशों से गैस आती है।एलपीजी आयात के मामले में भी खाड़ी देशों पर निर्भरता अधिक है। इसमें यूएई और कतर मिलकर कुल आयात का लगभग 62% से ज्यादा हिस्सा देते हैं। इनके बाद सऊदी अरब और कुवैत का स्थान आता है। वहीं हाल के वर्षों में अमेरिका भी एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बनकर उभरा है और 2026 में भारत की गैस आपूर्ति में लगभग 10% हिस्सेदारी रखता है।
जमाखोरी रोकने के लिए सख्ती
एलपीजी संकट का असर खासतौर पर रेस्टोरेंट और अन्य गैर-जरूरी व्यवसायों पर पड़ सकता है। हालांकि सरकार ने साफ कर दिया है कि उसकी पहली प्राथमिकता घरेलू उपभोक्ताओं को गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करना है। खबरों के मुताबिक कमर्शियल प्रतिष्ठानों में एलपीजी की उपलब्धता पर नजर रखने के लिए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के तीन कार्यकारी निदेशकों की एक समिति बनाई गई है।
अधिकारियों का कहना है कि संकट के समय गैर-जरूरी व्यवसायों द्वारा गैस की जमाखोरी रोकने के लिए ये सख्त कदम उठाए गए हैं, ताकि आम लोगों को घरेलू एलपीजी की कमी का सामना न करना पड़े।
सरकार ने देश में घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का प्लान-बी भी लागू कर दिया गया है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार अल्जीरिया, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अन्य देशों से एलएनजी-एलपीजी की अतिरिक्त खेपें भारत पहुंचने लगी हैं।
संकट के बीच बढ़ाया गया उत्पादन
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है। एलपीजी और तेल की सप्लाई में रुकावट के कारण कई देशों में संकट गहरा गया है। भारत में बढ़ती चिंता के बीच सरकार ने कमर्शियल एलपीजी के इस्तेमाल पर सख्ती दिखाई है और घरेलू गैस की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी भारतीय रिफाइनरियों ने एलपीजी के घरेलू उत्पादन में करीब 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है।
सरकार का प्लान-बी कैसे कर रहा काम?
एलपीजी संकट से निपटने के लिए सरकार ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ दूसरे देशों से अतिरिक्त एलएनजी-एलपीजी मंगाने की रणनीति अपनाई है। एक सरकारी सूत्र के मुताबिक नॉर्वे समेत कई देशों से अतिरिक्त गैस कार्गो भारत आने शुरू हो गए हैं।
पिछले कुछ वर्षों में कई बार अंतरराष्ट्रीय तनाव, जैसे टैरिफ विवाद या खाड़ी क्षेत्र में तनाव, के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने का खतरा बना रहा है। ऐसे जोखिम को देखते हुए सरकार ने पहले ही गैस आयात के स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति अपनाई थी, जो मौजूदा संकट में मददगार साबित हो रही है।
भारत में गैस कहां-कहां से आती है?
भारत में एलएनजी की सबसे बड़ी आपूर्ति कतर से होती है, जिसकी हिस्सेदारी लगभग 42% है। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात, अंगोला और नाइजीरिया जैसे देशों से गैस आती है।एलपीजी आयात के मामले में भी खाड़ी देशों पर निर्भरता अधिक है। इसमें यूएई और कतर मिलकर कुल आयात का लगभग 62% से ज्यादा हिस्सा देते हैं। इनके बाद सऊदी अरब और कुवैत का स्थान आता है। वहीं हाल के वर्षों में अमेरिका भी एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बनकर उभरा है और 2026 में भारत की गैस आपूर्ति में लगभग 10% हिस्सेदारी रखता है।
जमाखोरी रोकने के लिए सख्ती
एलपीजी संकट का असर खासतौर पर रेस्टोरेंट और अन्य गैर-जरूरी व्यवसायों पर पड़ सकता है। हालांकि सरकार ने साफ कर दिया है कि उसकी पहली प्राथमिकता घरेलू उपभोक्ताओं को गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करना है। खबरों के मुताबिक कमर्शियल प्रतिष्ठानों में एलपीजी की उपलब्धता पर नजर रखने के लिए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के तीन कार्यकारी निदेशकों की एक समिति बनाई गई है।
अधिकारियों का कहना है कि संकट के समय गैर-जरूरी व्यवसायों द्वारा गैस की जमाखोरी रोकने के लिए ये सख्त कदम उठाए गए हैं, ताकि आम लोगों को घरेलू एलपीजी की कमी का सामना न करना पड़े।