ईरान पर जमकर हमले कर रहे इजरायल को अब US ने रोका..., ट्रंप प्रशासन को सताया इस बात का डर
प्रकाशित: 11-03-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
पश्चिम एशिया में जारी भारी बमबारी को लेकर अब यूएस डर गया है. उसे लग रहा है कि अगर ईरान के ऊर्जा स्रोत्र पर अधिक हमले हुए तो बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है. अब तक युद्ध को 11 दिन बीत चुके हैं. ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है कि अमेरिका अब इजरायल से ईरान पर हमलों को कम करने की बात कह रहा है. यह निर्णय खासतौर पर ईरान में बढ़ते प्रदूषण के कारण लिया गया. इससे ईरान की जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. हाल में तेहरान के कुछ इलाकों के वातावरण में काले धुएं की लेयर देखी गई. इसके बाद यहां एसिड रेन का खतरा बढ़ गया. यहां के लोगों से अपील की गई कि वह अपने घर में बंद हो जाए क्योंकि ऐसे वातादरण को जान का खतरा है.
जनता के समर्थन में किया गया हमला
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि निरंतर हमले से ईरानी जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. प्रशासन का मानना है कि यह हमला जनता के समर्थन में किया गया है, न कि बुनियादी सुविधाओं को नुकसान पहुंचाना है. इसके साथ ही ट्रंप प्रशासन ईरान के तेल क्षेत्र के साथ भविष्य में सहयोग की योजना पर काम कर रहा है.
कच्चे तेल की किल्लत पैदा हो सकती है
इस बीच अमेरिका को इस बात डर सता रहा है कि हमलों के जवाब में ईरान खाड़ी देशों के ऊर्जा ठिकानों पर बड़ा हमला न कर दे. इससे वैश्विक तेल बाजार पर बड़ा असर होगा. बाजार में कच्चे तेल की किल्लत पैदा हो सकती है. रिपोर्ट के अनुसार, बीते दिनों इजरायल की ओर से ईरान के एनर्जी सेक्टर को निशाना बनाया गया. इन हमलों में तेहरान में जहरीले काले धुंए की लेयर बन बई. वहीं एसिड रेन (तेजाबी बारिश) की खबरें भी सामने आईं. इससे आम ईरानियों की सेहत पर गंभीर खतरा बना हुआ है. इसे ध्यान में रखते हुए डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने इजरायल से ईरान के तेल भंडारों पर हमले रोकने की सख्त हिदायत दी है.
तेल इकोनॉमी को बचाने की रणनीति
अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि बुनियादी ढांचों पर असर हुआ है. लगातार हो रहे हमलों से ईरानी काफी परेशान हैं. रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने इजरायल को रोकने के लिए तीन मुख्य कारण को गिनाया है. पहला वो ईरान की उस वर्ग को ढाल बनाने की कोशिश में है जो मौजूदा शासन के खिलाफ है. इसके साथ ईरान के तेल क्षेत्र के साथ व्यापारिक सहयोग को बढ़ाना चाहता है. वहीं तीसरा और सबसे अहम कारण है कि ईरान इन हमलों के जवाब में खाड़ी देशों के तेल को ठिकानों पर बड़ा ड्रोन अटैक कर सकता है. इससे तेल के दामों पर असर हो सकता है. तेल की कीमतें अनियंत्रित हो सकती हैं.
पहले भी ट्रंप दे चुके हैं चेतावनी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ईरान के तेल ठिकानों पर हमलों को 'डूम्सडे ऑप्शन' (कयामत का विकल्प) के रूप में मानते हैं. इसे केवल तब उपयोग किया जाना चाहिए, अब ईरान जानबूझकर खाड़ी के तेल ठिकानों पर अटैक कर रहा है. ट्रंप पहले भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट 'ट्रुथ' चेतावनी दे चुके हैं कि अगर ईरान ने वैश्विक तेल आपूर्ति को नुकसान पहुंचा तो उसे 20 गुना अधिक सख्ती से जवाब मिलेगा. उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका इस तरह के लक्ष्यों को टार्गेट करता है तो ईरान के लिए एक राष्ट्र के रूप में दोबारा से खड़ा करना कठिन होगा.
जनता के समर्थन में किया गया हमला
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि निरंतर हमले से ईरानी जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. प्रशासन का मानना है कि यह हमला जनता के समर्थन में किया गया है, न कि बुनियादी सुविधाओं को नुकसान पहुंचाना है. इसके साथ ही ट्रंप प्रशासन ईरान के तेल क्षेत्र के साथ भविष्य में सहयोग की योजना पर काम कर रहा है.
कच्चे तेल की किल्लत पैदा हो सकती है
इस बीच अमेरिका को इस बात डर सता रहा है कि हमलों के जवाब में ईरान खाड़ी देशों के ऊर्जा ठिकानों पर बड़ा हमला न कर दे. इससे वैश्विक तेल बाजार पर बड़ा असर होगा. बाजार में कच्चे तेल की किल्लत पैदा हो सकती है. रिपोर्ट के अनुसार, बीते दिनों इजरायल की ओर से ईरान के एनर्जी सेक्टर को निशाना बनाया गया. इन हमलों में तेहरान में जहरीले काले धुंए की लेयर बन बई. वहीं एसिड रेन (तेजाबी बारिश) की खबरें भी सामने आईं. इससे आम ईरानियों की सेहत पर गंभीर खतरा बना हुआ है. इसे ध्यान में रखते हुए डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने इजरायल से ईरान के तेल भंडारों पर हमले रोकने की सख्त हिदायत दी है.
तेल इकोनॉमी को बचाने की रणनीति
अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि बुनियादी ढांचों पर असर हुआ है. लगातार हो रहे हमलों से ईरानी काफी परेशान हैं. रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने इजरायल को रोकने के लिए तीन मुख्य कारण को गिनाया है. पहला वो ईरान की उस वर्ग को ढाल बनाने की कोशिश में है जो मौजूदा शासन के खिलाफ है. इसके साथ ईरान के तेल क्षेत्र के साथ व्यापारिक सहयोग को बढ़ाना चाहता है. वहीं तीसरा और सबसे अहम कारण है कि ईरान इन हमलों के जवाब में खाड़ी देशों के तेल को ठिकानों पर बड़ा ड्रोन अटैक कर सकता है. इससे तेल के दामों पर असर हो सकता है. तेल की कीमतें अनियंत्रित हो सकती हैं.
पहले भी ट्रंप दे चुके हैं चेतावनी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ईरान के तेल ठिकानों पर हमलों को 'डूम्सडे ऑप्शन' (कयामत का विकल्प) के रूप में मानते हैं. इसे केवल तब उपयोग किया जाना चाहिए, अब ईरान जानबूझकर खाड़ी के तेल ठिकानों पर अटैक कर रहा है. ट्रंप पहले भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट 'ट्रुथ' चेतावनी दे चुके हैं कि अगर ईरान ने वैश्विक तेल आपूर्ति को नुकसान पहुंचा तो उसे 20 गुना अधिक सख्ती से जवाब मिलेगा. उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका इस तरह के लक्ष्यों को टार्गेट करता है तो ईरान के लिए एक राष्ट्र के रूप में दोबारा से खड़ा करना कठिन होगा.