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कच्चे तेल से बढ़ा दुनिया में आर्थिक हाहाकार

प्रकाशित: 11-03-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एक दिन में पूरी दुनिया लगभग 16 अरब लीटर गैस या तेल फूंक देती है। इनमें से एक चौथाई यानी करीब 4 अरब लीटर तेल और गैस दुनिया भर के देशों में जिस एक रास्ते से हो पहुंचता है वो यही रास्ता है, द स्ट्रैट ऑफ होर्मुज। वही होर्मुज जिसने इस वक्त पूरी दुनिया में तेल में आग लगा दी है। दुनिया भर के देशों में 25 फीसदी ईंधन सप्लाई करने वाला यह मार्ग है। 28 फरवरी तक कच्चे तेल की कीमत जहां 69.01 डॉलर थी, वहीं 9 मार्च को कच्चे तेल की कीमत 119 .50 डॉलर तक जा पहुंची है जो और ज्यादा बढ़ने की उम्मीद है। भारत सहित सभी देशों ने अपने अपने हिसाब से गैस और तेल की बचत के उपाय शरू कर दिए है ताकि स्थिति और नहीं बिगड़े। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी महायुद्ध अब वैश्विक आर्थिक संकट की ओर बढ़ गया है। ईरान ने आधिकारिक तौर पर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर कर दिया है। इस रस्ते से गुजरने वाले जहाजों पर गोलाबारी की जाने लगी है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर किसी भी जहाज ने इस रास्ते से गुजरने की कोशिश की, तो उसे आग के हवाले कर दिया जाएगा। व्झ्श्दुह के अनुसार आपूर्ति बाधित रहने पर ब्रेंट ाtढड 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। इस मार्ग से गुजरने वाला तेल भारत के कुल आयात का लगभग आधा हिस्सा है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कन माना जाता है। दुनिया के कुल दैनिक तेल उपभोग का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा इसी 33 किलोमीटर चौड़े रास्ते से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, यूएई और कुवैत जैसे देशों का तेल निर्यात इसी रास्ते पर निर्भर है। रिपोर्ट के मुताबिक, एtraग्t द प्दस्ल्z दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक है। इस रास्ते से हर दिन लगभग 2 से 2.1 करोड़ बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद गुजरते हैं जो वैश्विक दैनिक तेल खपत का करीब 20 प्रतिशत और समुद्री तेल व्यापार का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा है। ईरान इजरायल युद्ध ने इस महत्वपूर्ण मार्ग को फिर से खबरों में ला दिया है। ईरान के फैसले से दुनियाभर के देश सकते में है, जिसके फलस्वरूप कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया, जिसका असर हर देश की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ा। हालांकि युद्ध थमने से सभी देशों ने राहत की सांस ली है और इस बात का इंतज़ार हो रहा है की ईरान अपने इस फैसले को वापस ले। यह सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, इराक, ईरान और कतर से आने वाले तेल और गैस के लिए महत्वपूर्ण है। इस जलमार्ग के बंद होने से भारत पर बहुत गंभीर प्रभाव पड़ने की संभावनाएं व्यक्त की जाने लगी। भारत को अपना अधिकतर कच्चा तेल दूसरे देशों से मिलता है, और इसका एक बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व से आता है, जो इस जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है।
-बाल मुकुंद ओझा,
जयपुर, राजस्थान।