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समूचे संसार को निगलता अहंकार का दावानल

प्रकाशित: 08-06-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
डा. रवीन्द्र अरजरिया
समूचे संसार को निगलता अहंकार का दावानल देश - दुनिया के सामने अस्थिरता का परिदृश्य नित नये रंग दिखा रहा है। ईरान जैसे छोटे से देश के सामने अमेरिका जैसी महाशक्ति का घुटने टेकने की स्थिति का निर्मित होना, पाकिस्तान द्वारा परमाणु हथियारों की धमकी देना, डीप स्टेट के षडयंत्र से अनेक देशों में सत्ता परिवर्तन होना, बढती आबादी के मध्य आर्थिक मंदी का दौर लाना, पर्यावरण की कीमत पर भौतिक सुविधायें जुटाना, निजी स्वार्थों के लिए राष्ट्रहितों को तिलांजलि देना, नियम-कानून-कायदों पर शक्तिशालियों का पूरी तरह कब्जा होना, आतंक के सहारे साम्राज्य स्थापित करना, मानव पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता का हावी होना, अकर्मण्यता का बोलबाला होना, तुष्टीकरण की तलवार से प्रतिभाओं को मौथला करना जैसे अनेक बिन्दु समूचे संसार में दावानल की तरह विकराल होते जा रहे हैं। सत्ता के लालच में हाशिये के बाहर पहुंच चुके आदर्श आज अपनी बेबसी पर जार-जार रो रहे हैं। मृगमारीचिका के पीछे छुपे वर्चस्व वाले अहंकारी लक्ष्य को प्राप्त करने की होड में अब देशों, प्रदेशों, सम्प्रदायों, जातियों, नस्लों, क्षेत्रों आदि के मध्य जंग छिड चुकी है। चारों ओर अस्थिरता, असुरक्षा और अशान्ति का वातावरण निर्मित हो चुका है। इस दौर को लेकर भविष्यवक्तओं ने बहुत पहले ही सचेत कर दिया था। उन्नीसवीं सदी में ही अखिल विश्व गायत्री परिवार के संस्थापक पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य ने इक्कीसवीं सदी को उज्जवल भविष्य के रूप में रेखांकित करते हुए आने वाले झंझावातों की पहले से ही चेतावनी दे दी थी। पराविज्ञान की चरमसीमा पर पहुंच चुके देवऋषियों के अनुसंधानों को जीवन में उतारने की पर बल दिया था। हम बदलेंगे, युग बदलेगा का नारा दिया था। जय गुरुदेव, सतयुग आयेगा का जयघोष करने वाले संत ने भी उपचाररहित बीमारियों के फैलने, अन्न के लिए तरसने, शाकाहार लेने जैसी अनेक घोषणायें की थीं। बीमारियों वाली घोषणा ने कोरोना काल में अपनी उपस्थित दर्ज करवा दी थी। ऐसे ही जनसंख्या के अनियंत्रित विस्तार पर खाद्यान्न की किल्लत, मांसाहार के दुष्प्रभाव आदि को भी समझा जा सकता है। लगभग छ सौ वर्ष पूर्व हमारे ही देश के उड़ीसा राज्य के महान संत स्वामी अच्युतानन्द दास ने भविष्य मालिका नामक ग्रन्थ में देश के वर्तमान हालातों को पूर्व में ही लिख दिया था। उड़िया भाषा में लिखे गये शब्दों की सार्थकता अब शत-प्रतिशत सत्य होती दिख रही है। उन्होंने वैश्विक परिस्थितियों से लेकर भारतवर्ष का अपने ही अलग हुए हिस्से के साथ विकराल युद्ध की स्थितियों तक को विवेचित किया है। तेल के खेल और धन के बल जैसी व्याख्यायें भी इसी ग्रन्थ में उल्लेखित है। प्रकृति के विनाशकारी परिवर्तन से आने वाली आपदाओं की संख्या में अप्रत्याशित बढ़ोत्तरी होने, कृत्रिम विषाणुओं को हथियार बनाकर शत्रुओं पर प्रहार करने, वैश्विक सिद्धान्तों-आदर्शों-मान्यताओं पर स्वार्थ का कब्जा होने तथा दैत्यों के आतंक से जनमानस के पीड़ित होने जैसी अनेक घटनाओं का उडिया ग्रन्थ में उल्लेख मिलता है। भविष्य मालिका में लिखा है कि भारत से एक आध्यात्मिक शक्ति का उदय होगा जो पूरी दुनिया में शांति स्थापित करेगी। इसी तरह बुल्गारिया देश की निवासिनी बाबा वेंगा की 12 वर्ष में तूफानी चपेट के कारण नेत्रों की रोशनी चली जाने के बाद उन्हें भविष्य देख पाने की रहस्यमयी शक्ति का अचानक अनुभव हुआ था। यद्यपि उन्होंने स्पष्ट भविष्यवाणियां नहीं की थी परन्तु संकेतों में व्यक्त की गई भावी घटनायें अतीत में सत्य प्रमाणित होती चली गईं। वर्तमान स्थितियों को लेकर संघर्षात्मक संकेत, रक्तरंजित क्रान्ति, आतंकी गतिविधियों, वैश्विक मंदी सहित सूक्ष्म के द्वारा विशाल के सामने डटे रहने जैसी व्याख्यायें उनकी रचनाओं में स्पष्ट रूप प्रस्तुत की गई हैं। उन्होंने राजनैतिक अस्थिरता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, शक्तियों के टकराव, दो भागों में विभाजित होती दुनिया में छिडने वाले तीसरे विश्वयुद्ध का भयावह शब्द चित्र खींचा है। एलियंस की ओर संकेत करते हुए अंतरिक्ष से किसी अज्ञात वस्तु या सभ्यता का पृथ्वी के साथ सम्पर्क स्थापित करने की घटना का उल्लेख करने वाली बाबा वेंगा ने सनातनी सूर्य के प्रकाश से आलौकित होती धरा पर प्रेम की वर्षा जैसे वर्णन करके अनेक संभावनायें व्यक्त की हैं। फ्रांस के भविष्यवक्ता नास्त्रsदमस ने अपनी भविष्यवाणियों को अपनी किताब लेस प्रोफेटीज में लघु कविताओं के माध्यम से प्रस्तुत किया है जिसमें सात जहाजों के आसपास युद्ध, एक महान व्यक्ति पर बिजली गिरेगी, अचानक प्राकृतिक आपदाओं आदि का काव्यमय चित्रण किया गया है। जलीय युद्ध, दूरदराज से युद्ध, वर्चस्व का युद्ध, स्वार्थ का युद्ध, लालच का युद्ध, अहंकार का युद्ध, आतंक का युद्ध जैसी स्थितियां ही सात जहाजों की व्याख्या करती दिखतीं हैं। एक महान व्यक्ति पर बिजली गिरेगी की विवेचना को राजनैतिक हत्या, नेतृत्व पर जुल्म, पलायन की मजबूरी, भय का माहौल, सत्ता परिवर्तन, तख्ता पलट आदि के रूप में स्वीकारा जा रहा है। उन्होंने दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन के कारण आ रही प्राकृतिक आपदाओं पर भी लघु कवितायें लिखीं हैं। अनेक ज्योतिषाचार्यों ने भी विश्व कुण्डली की ग्रह दशा के आधार पर विश्वयुद्ध की प्रबल संभावना व्यक्त की हैं। भविष्यवाणियों के सभी कारकों के साथ कदमताल करती वर्तमान स्थितियां भयावह भविष्य का भाष्य कर रहीं हैं जिसके उपचार हेतु युग निर्माण योजना के विचार क्रान्ति अभियान का हम सुधरेंगे, जग सुधरेगा वाला नारा प्रत्येक नागरिक को स्वीकारना पडेगा। तभी स्वयं के परिवर्तन से ही विश्व परिवर्तन की स्थितियां निर्मित हो सकेंगी।