सड़कों पर नमाज
प्रकाशित: 08-06-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
भारत लोकतांत्रिक एवं सेक्युलर मुल्क है सभी को धार्मिक आजादी है, परन्तु दूसरों को कष्ट पहुंचाकर कैसी इबादत, पूजा-अर्चना, सड़कों पर नमाज उचित नहीं। कुछ लोग इसको कांवड यात्रा और होली मनाने पर तुलना करते हैं सरकार कड़ी कार्रवाई करती है और पुख्ता इंतजाम कौन कहता है दोषियों पर कार्रवाई न हो। कांवड यात्रा और होली साल में एक बार आती है। मुहर्रम और शब्बे बरात के नाम पर हुड़दंग कौन नहीं जानता। ईद पर कुर्बानी ढंग से हो किसे एतराज हो सकता है। कोई त्यौहार अनुशासित और व्यवस्थित हो महज भाईचारा बढ़ता है।
बीएल सचदेवा
आईएनए मार्किट, नई दिल्ली।
बीएल सचदेवा
आईएनए मार्किट, नई दिल्ली।