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पीएसवाय राष्ट्रीय उत्कृष्टता सम्मान समारोह में मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान

प्रकाशित: 19-07-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
रायपुर, (छत्तीसगढ़ ब्यूरो)। राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि बच्चों के बीच आकर उन्हें अपना बचपन याद आ जाता है। आज जीवनशैली पूरी तरह बदल चुकी है। उन्होंने कहा कि उनके समय में सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई होती थी, तथा मेहनत और लगन ही सपलता का आधार थी। आज इंटरनेट और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के इस युग में सुविधाएं बढ़ी हैं, लेकिन विद्यार्थियों को अपनी मौलिक सोच और अध्ययन की आदत को बनाए रखना चाहिए। राज्यपाल डेका ने आज रायपुर के विमतारा ऑडिटोरियम में पीएसवाय एजुकेशन एवं रिसर्च फेडरेशन द्वारा आयोजित राष्ट्रीय उत्कृष्टता सम्मान समारोह एवं पदक तथा निधि वितरण 2026 के कार्यत्रढम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर प्रदेश के विभिन्न जिलों के मेधावी विद्यार्थियों एवं उत्कृष्ट जिला शिक्षा अधिकारियों को सम्मानित किया गया।इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि छात्र जीवन की मित्रता सबसे निर्मल और अमूल्य होती है, जिसे जीवनभर संजोकर रखना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से किसी भी प्रकार की लत से दूर रहने का आ"ान करते हुए कहा कि डिजिटल एडिक्शन भी अन्य नशों की तरह हानिकारक है। मोबाइल का उपयोग केवल आवश्यक अध्ययन और उपयोगी कार्यों तक सीमित होना चाहिए।उन्होंने कहा कि आज के समय में गूगल और एआई उपयोगी साधन हैं, लेकिन वे मानव बुद्धि का विकल्प नहीं बन सकते। जीवन में गूगल इफेक्ट नहीं होना चाहिए। सोचने, समझने और निर्णय लेने की क्षमता ही मनुष्य की सबसे बड़ी शक्पि है।राज्यपाल ने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों की प्रतिभा और रुचि को पहचानें तथा उसी दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें। उन्होंने कहा कि हर बच्चा आईआईटी या मेडिकल के क्षेत्र में ही जाए, यह आवश्यक नहीं है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में विद्यार्थियों की विविध प्रतिभाओं को विकसित करने के लिए अनेक नए पाठ्यत्रढम और विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं। आज प्रत्येक क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं और नवाचार के लिए पर्याप्त अवसर मौजूद हैं।उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने सपने बड़े रखें। व्यक्पि किस पृष्ठभूमि से आता है, यह महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि उसकी मेहनत, लगन और संकल्प ही उसका भविष्य तय करते हैं। उन्होंने कहा कि केवल सपल व्यक्पि ही खुश हो, यह आवश्यक नहीं है, बल्कि संतुष्ट व्यक्पि ही वास्तविक रूप से प्रसन्न रहता है। परिवार, पड़ोसियों और मित्रों के साथ सौहार्द एवं शांति से जीवन जीना ही सच्ची सपलता है।राज्यपाल ने कहा कि आज यहां सम्मानित होने वाले प्रत्येक विद्यार्थी की उपलब्धि केवल उसकी व्यक्पिगत सपलता नहीं, बल्कि उसके माता-पिता के त्याग और गुरुजनों के मार्गदर्शन का भी परिणाम है।