मेड इन इंडिया ग्रीन हाइड्रोजन को वैश्विक पहचान के लिए मिलकर काम करें : नाइक
प्रकाशित: 24-07-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
नई दिल्ली,(वीअ)। केंद्रीय विद्युत एवं नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद येसो नाइक ने कहा है कि भारत के पास वैश्विक हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करने की अद्वितीय क्षमता है। उन्होंने उद्योग जगत, सरकार, स्टार्टअप, शिक्षण संस्थानों, वित्तीय संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से मिलकर ‘मेड इन इंडिया ग्रीन हाइड्रोजन' को स्वच्छ ऊर्जा, तकनीकी उत्कृष्टता और सतत औद्योगिक विकास का दुनिया का सबसे भरोसेमंद प्रतीक बनाने का आह्वान किया। नाइक मंगलवार को फिक्की द्वारा आयोजित द्वितीय भारत ग्रीन हाइड्रोजन शिखर सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन नए चरण में प्रवेश कर चुका है और अब यह सवाल नहीं है कि ग्रीन हाइड्रोजन औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन का प्रमुख आधार बनेगा या नहीं, बल्कि यह है कि इस बदलाव का नेतृत्व कौन करेगा। राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत उत्पादन प्रोत्साहन, स्वदेशी इलेक्ट्रोलाइजर निर्माण, रिफाइनरी एवं उर्वरक क्षेत्रों में मांग सृजन, परिवहन, जहाजरानी और इस्पात क्षेत्रों में प्रायोगिक परियोजनाओं तथा अनुकूल नियामकीय व्यवस्था के माध्यम से मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत में ग्रीन हाइड्रोजन अब भविष्य की अवधारणा नहीं, बल्कि तेजी से उभरता आर्थिक अवसर बन चुका है। व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन और देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन संचालित ट्रेन के शुभारंभ जैसी उपलब्धियां भारत की क्षमताओं को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक हाइड्रोजन केंद्र बनने के लिए केवल उत्पादन क्षमता पर्याप्त नहीं होगी। इसके लिए नवाचार, लागत प्रतिस्पर्धा, मजबूत आपूर्ति श्रृंखला, अंतरराष्ट्रीय मानक, कुशल मानव संसाधन और दीर्घकालिक वैश्विक साझेदारियां भी जरूरी हैं। गुजरात सरकार के ऊर्जा एवं पेट्रोकेमिकल्स राज्य मंत्री रुशिकेश गणेशभाई पटेल ने कहा कि गुजरात भारत के ग्रीन हाइड्रोजन विकास का प्रमुख केंद्र बनने के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रचुर नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों, विश्वस्तरीय बंदरगाहों, मजबूत औद्योगिक आधारभूत ढांचे और प्रगतिशील ग्रीन हाइड्रोजन नीति के बल पर राज्य उत्पादन, नवाचार और निर्यात के लिए समग्र पारिस्थितिकी तंत्र उपलब्ध करा रहा है।
उन्होंने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन ऊर्जा परिवर्तन के साथ औद्योगिक परिवर्तन का भी माध्यम है। इससे निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तथा भारत को ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया का वैश्विक केंद्र बनाने में मदद मिलेगी।
भारत में कनाडा के उच्चायोग के वाणिज्यिक मंत्री एड जैगर ने कहा कि भारत का वैश्विक ग्रीन हाइड्रोजन केंद्र बनने का लक्ष्य पूरी तरह विश्वसनीय और हासिल किया जा सकने वाला है। कनाडा अनुसंधान, नवाचार, प्रौद्योगिकी सहयोग, मानकीकरण, प्रमाणन और वित्तपोषण के माध्यम से भारत के साथ साझेदारी के लिए प्रतिबद्ध है। नीति आयोग के ऊर्जा सलाहकार राजनाथ राम ने कहा कि भारत का ग्रीन हाइड्रोजन मिशन ािढयान्वयन के चरण में प्रवेश कर चुका है। अब परियोजनाओं के तेजी से ािढयान्वयन, घरेलू मांग को मजबूत करने, व्यवहार्य खरीद समझौतों और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला के विकास पर ध्यान देना होगा।
फिक्की ग्रीन हाइड्रोजन समिति के अध्यक्ष एवं एलएंडटी एनर्जी ग्रीनटेक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक डेरेक माइकल शाह ने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन इस दशक के सबसे बड़े औद्योगिक अवसरों में से एक है। फिक्की नवीकरणीय ऊर्जा मुख्य कार्यकारी अधिकारी समिति के अध्यक्ष विपुल तुली ने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन भारत के औद्योगिक विकास के अगले चरण को गति देगा और ऊर्जा सुरक्षा तथा डीकार्बोनाइजेशन को मजबूत करेगा। फिक्की की महानिदेशक ज्योति विज ने कहा कि भारत का लक्ष्य वर्ष 2030 तक वैश्विक ग्रीन हाइड्रोजन बाजार में लगभग दस प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करना है। सम्मेलन में फिक्की-ईवाई की ग्रीन हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था पर आधारित रिपोर्ट भी जारी की गई, जिसमें भारत को ग्रीन हाइड्रोजन और उससे जुड़े उत्पादों का वैश्विक प्रतिस्पर्धी निर्यातक बनाने की रणनीति और कार्ययोजना प्रस्तुत की गई।
उन्होंने कहा कि वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन नए चरण में प्रवेश कर चुका है और अब यह सवाल नहीं है कि ग्रीन हाइड्रोजन औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन का प्रमुख आधार बनेगा या नहीं, बल्कि यह है कि इस बदलाव का नेतृत्व कौन करेगा। राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत उत्पादन प्रोत्साहन, स्वदेशी इलेक्ट्रोलाइजर निर्माण, रिफाइनरी एवं उर्वरक क्षेत्रों में मांग सृजन, परिवहन, जहाजरानी और इस्पात क्षेत्रों में प्रायोगिक परियोजनाओं तथा अनुकूल नियामकीय व्यवस्था के माध्यम से मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत में ग्रीन हाइड्रोजन अब भविष्य की अवधारणा नहीं, बल्कि तेजी से उभरता आर्थिक अवसर बन चुका है। व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन और देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन संचालित ट्रेन के शुभारंभ जैसी उपलब्धियां भारत की क्षमताओं को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक हाइड्रोजन केंद्र बनने के लिए केवल उत्पादन क्षमता पर्याप्त नहीं होगी। इसके लिए नवाचार, लागत प्रतिस्पर्धा, मजबूत आपूर्ति श्रृंखला, अंतरराष्ट्रीय मानक, कुशल मानव संसाधन और दीर्घकालिक वैश्विक साझेदारियां भी जरूरी हैं। गुजरात सरकार के ऊर्जा एवं पेट्रोकेमिकल्स राज्य मंत्री रुशिकेश गणेशभाई पटेल ने कहा कि गुजरात भारत के ग्रीन हाइड्रोजन विकास का प्रमुख केंद्र बनने के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रचुर नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों, विश्वस्तरीय बंदरगाहों, मजबूत औद्योगिक आधारभूत ढांचे और प्रगतिशील ग्रीन हाइड्रोजन नीति के बल पर राज्य उत्पादन, नवाचार और निर्यात के लिए समग्र पारिस्थितिकी तंत्र उपलब्ध करा रहा है।
उन्होंने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन ऊर्जा परिवर्तन के साथ औद्योगिक परिवर्तन का भी माध्यम है। इससे निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तथा भारत को ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया का वैश्विक केंद्र बनाने में मदद मिलेगी।
भारत में कनाडा के उच्चायोग के वाणिज्यिक मंत्री एड जैगर ने कहा कि भारत का वैश्विक ग्रीन हाइड्रोजन केंद्र बनने का लक्ष्य पूरी तरह विश्वसनीय और हासिल किया जा सकने वाला है। कनाडा अनुसंधान, नवाचार, प्रौद्योगिकी सहयोग, मानकीकरण, प्रमाणन और वित्तपोषण के माध्यम से भारत के साथ साझेदारी के लिए प्रतिबद्ध है। नीति आयोग के ऊर्जा सलाहकार राजनाथ राम ने कहा कि भारत का ग्रीन हाइड्रोजन मिशन ािढयान्वयन के चरण में प्रवेश कर चुका है। अब परियोजनाओं के तेजी से ािढयान्वयन, घरेलू मांग को मजबूत करने, व्यवहार्य खरीद समझौतों और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला के विकास पर ध्यान देना होगा।
फिक्की ग्रीन हाइड्रोजन समिति के अध्यक्ष एवं एलएंडटी एनर्जी ग्रीनटेक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक डेरेक माइकल शाह ने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन इस दशक के सबसे बड़े औद्योगिक अवसरों में से एक है। फिक्की नवीकरणीय ऊर्जा मुख्य कार्यकारी अधिकारी समिति के अध्यक्ष विपुल तुली ने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन भारत के औद्योगिक विकास के अगले चरण को गति देगा और ऊर्जा सुरक्षा तथा डीकार्बोनाइजेशन को मजबूत करेगा। फिक्की की महानिदेशक ज्योति विज ने कहा कि भारत का लक्ष्य वर्ष 2030 तक वैश्विक ग्रीन हाइड्रोजन बाजार में लगभग दस प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करना है। सम्मेलन में फिक्की-ईवाई की ग्रीन हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था पर आधारित रिपोर्ट भी जारी की गई, जिसमें भारत को ग्रीन हाइड्रोजन और उससे जुड़े उत्पादों का वैश्विक प्रतिस्पर्धी निर्यातक बनाने की रणनीति और कार्ययोजना प्रस्तुत की गई।