वर्षों से राष्ट्र की सेवा में समर्पित Virarjun अर्जुनस्य प्रतिज्ञे द्वे, न दैन्यं, न पलायनम् ।

सियासी घुसपैठियों से बचें

प्रकाशित: 24-07-2026 | लेखक: सदानंद पांडे
सियासी घुसपैठियों से बचें
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा यानि नीट प्रश्न पत्र लीक मामले में जवाबदेही तय करने और शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जून से ही जंतर-मंतर पर धरना दे रहे काकरोच जनता पाटी के आंदोलनकारियों ने जिन लोगों की मदद से इस आंदोलन को आगे बढ़ाने की रणनीति बनाई हुई है, वे वही लोग हैं जिन्होंने कभी जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में वामपंथी और इस्लामिस्ट ग्रुप के साथ मिलकर केन्द्र सरकार को निशाना बनाया था। इन विघटनकारी प्रवृत्ति के आंदोलनकारियों ने छात्र आंदोलन का घिनौना स्वरूप पेश किया और खुद ही विलुप्त हो गए। उसके बाद नागरिकता कानून पारित होते ही शाहीन बाग में जितने भी केन्द्र सरकार यानि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विरोधी ताकतें थीं सभी एकत्र हो गईं। जो नारे शाहीन बाग में लगते थे वही नारे जंतर-मंतर पर लगने शुरू हो गए। आंदोलनकारी काकरोचों को इतना तो समझना पड़ेगा कि इस देश में विघटनकारी सोच से ज्यादा राष्ट्रवादी सोच के युवक हैं। राष्ट्र, सनातन और हिन्दुत्व विरोधी नारा लगाने वालों का तो एजेण्डा ही अलग है। वे तो इसी नारे के साथ कहीं भी एकत्र हो जाते हैं और कुछ दिनों के लिए माहौल भयावह बना देते हैं किन्तु सवाल यह है कि ऐसे पेशेवर आंदोलनकारियों को काकरोच जनता पाटी ने अपने मंच पर स्थान दिया क्यों? इन वामपंथी विघटनकारियों का तो कोई भी आंदोलन सफल होता ही नहीं। कारण कि इनकी दिशाहीन रणनीति ही इनकी असफलता का मुख्य कारण है।
काकरोच जनता पाटी के लोगों की केन्द्र सरकार के मंत्री जेपी नड्डा से भी बातचीत हुई थी और बृहस्पतिवार को जब फिर उन्हें वार्ता का निमंत्रण भेजा गया तो उन्होंने यह कहते हुए मना कर दिया कि बातचीत का स्थान न तो मंत्री का कार्यालय होगा और न ही उनका निवास स्थान। काकरोच जनता पाटी का सुझाव भी सही है, किसी ऐसी जगह वार्ता होनी चाहिए जो किसी व्यक्ति या संस्था से जुड़ी न हो किन्तु वार्ता होनी जरूर चाहिए।
कांग्रेस ने तो यह कहा कि जब तक प्रधान का त्याग पत्र नहीं होगा, तब तक वे वार्ता करेंगे ही नहीं। इससे स्पष्ट है कि कांग्रेस इस मुद्दे पर खुलकर राजनीतिक संघर्ष को बढ़ाना चाहती है। काकरोच जनता पाटी इस बात से तो भयभीत हैं कि उनका आंदोलन कोई पाटी विशेष न छीन ले किन्तु जितने भी कुख्यात वामपंथी आंदोलनकारी हैं, उनसे अपना मंच साझा करके काकरोच जनता पाटी ने अपने आंदोलन की सही दिशा एवं स्पष्ट नीति से समझौता जरूर किया है।
बहरहाल आंदोलनकारी काकरोचों को एक बात बड़ी स्पष्टता से समझनी होगी कि वह अपने लक्ष्य से ज्यों ही भटपेंगे, सरकार उनके आंदोलन को बदनाम करके छिन्न-भिन्न कर देगी। इसलिए दूसरों के बहकावे में आकर अपने आंदोलन स्थल पर अनावश्यक नारेबाजी न करने दें। इसके अलावा सरकार से वार्ता का कोई अवसर न छोड़ें। साथ ही काकरोच जनता पाटी को यह भी समझना होगा कि उनके आंदोलन से आम जनता को परेशानी न हो। सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाकर सरकार और काकरोच जनता पाटी बातचीत करे लेकिन इसके पहले वह भी अपनी सकारात्मकता का परिचय दें, अन्यथा इस तरह के आंदोलन समय बीतने के साथ ही अप्रासंगिक हो जाते हैं और फिर आंदोलनकारियों का नाम भी लोग भूल जाते हैं। लब्बोलुआब यह है कि आंदोलन करने वाले संगठन को इस बात की जिम्मेदारी लेनी ही पड़ेगी कि उनके आंदोलन स्थल पर पेशेवर अपराधी, राजनैतिक घुसपैठिए न घुस पाएं और उनकी धारणा युवाओं के हितों पर ही केंद्रित हो।