हरित विकास की यात्रा में जैव ऊर्जा महत्वपूर्ण स्तंभ : टीपीसीआई
प्रकाशित: 15-06-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
नई दिल्ली, (भाषा)। भारत की हरित विकास रणनीति में जैव-ऊर्जा एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में उभर रही है और देश के ऊर्जा रूपांतरण में इसकी अहम भूमिका रहने वाली है। भारतीय व्यापार संवर्द्धन परिषद (टीपीसीआई) ने यह बात कही है। टीपीसीआई ने 12 जून को नीति-निर्माताओं, राजनयिकों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, ऊर्जा विशेषज्ञों, नवोन्मेषकों और जैव-ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अन्य हितधारकों को एक मंच पर एकत्र किया। बै"क में भारत के टिकाऊ और ऊर्जा-सुरक्षित विकास की दिशा में बदलाव को तेज करने की रणनीतियों पर चर्चा की गई। परिषद ने बताया कि उसने जैव-ऊर्जा समिति का ग"न किया है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारकों को एक साथ लाना, नीतिगत एवं नियामकीय सुधारों पर संवाद को बढ़ावा देना तथा जैव-ऊर्जा को अपनाने और निवेश आकर्षित करने के लिए आवश्यक ढांचे की सिफारिश करना है। टीपीसीआई के चेयरमैन मोहित सिंगला ने कहा, wहमारा लक्ष्य भारत के जैव-ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना और उद्योग की प्राथमिकताओं को देश की जलवायु प्रतिबद्धताओं, विशेषकर शुद्ध-शून्य उत्सर्जन लक्ष्य के अनुरूप बनाना है।
अब समय आ गया है कि सरकार, उद्योग और शिक्षण संस्थान मिलकर नवोन्मेषण, किफायती समाधान और विस्तार क्षमता सुनिश्चित करें।w उन्होंने कहा कि जैव-ऊर्जा क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। इससे जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम होगी और कचरा प्रबंधन की चुनौतियों का भी समाधान मिलेगा।
अब समय आ गया है कि सरकार, उद्योग और शिक्षण संस्थान मिलकर नवोन्मेषण, किफायती समाधान और विस्तार क्षमता सुनिश्चित करें।w उन्होंने कहा कि जैव-ऊर्जा क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। इससे जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम होगी और कचरा प्रबंधन की चुनौतियों का भी समाधान मिलेगा।