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आपातकाल में जेल गए 115 लोकतंत्र सेनानियों का दिल्ली बीजेपी ने अभिनंदन किया

प्रकाशित: 27-06-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
वीर अर्जुन संवाददाता
नई दिल्ली। दिल्ली भाजपा ने आज प्रदेश अध्यक्ष श्री हर्ष मल्होत्रा की अध्यक्षता में एन.डी.एम.सी. कन्वेंशन सेंटर में तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा 1975 में आपातकाल लगा कर देश में लोकतंत्र की कि गई हत्या को लेकर एक सेमिनार का आयोजन किया और 115 लोकतंत्र सेनानियों का अभिनंदन किया गया।
सेमिनार को दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता के साथ ही मुख्य वक्ता पूर्व केन्द्राrय मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी, लोकतंत्र सेनानी एवं भाजपा संसदीय दल के सदस्य श्री सत्यनारायण जटिया ने प्रदेश अध्यक्ष श्री हर्ष मल्होत्रा की अध्यक्षता में सम्बोधित किया।
इस मौके पर दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने कहा कि आज का दिन भारतीय इतिहास के महत्वपूर्ण दिनों में से एक हैं। हर साल जब हम रावण दहन करते हैं तो असत्य पर सत्य की और पाप पर पुण्य की जीत होती है और यह 25 जून का संविधान हत्या दिवस भी इसलिए याद किया जाता है कि आने वाली पीढ़ियों को इस बात का एहसास हो कि फिर इतिहास में अगर देश के किसी नेता ने ऐसा करने की कोशिश की तो देश के 140 करोड़ लोग ऐसा होने नहीं देंगे। श्रीमती रेखा गुप्ता ने कहा कि आज जो लोग जेब में संविधान लिए घूमते हैं और कहते हैं कि लोकतंत्र की हत्या हो रही है, ऐसे वाक्य कहने वाले लोग ये समझते हैं कि लोकतंत्र उनका दास है तो वह भारत के एक-एक लोकतंत्र सेनानी जो आपातकाल के दौरान जेल मे रहे का अपमान करते हैं। कांग्रेस सरकार ने श्री जय प्रकाश नारायण को लोहे की जंजीरों में जकड़ा लेकिन उनके साहस को नहीं जकड़ पाए। उन्होंने कहा कि श्रद्धेय अटल विहारी बाजपेयी जी जेल में बंद होने के बावजूद उनकी लेखनी काम करती रही और लाखों लोकतंत्र सेनानियों की आवाज बने। वर्षों तक अपने परिवार से दूर रहने वाले लोकतंत्र सेनानियों ने यातनाएं सही, लेकिन देश प्रेम नहीं छोड़ी। श्रीमती रेखा गुप्ता ने अंत में कहा कि आज देश का सच्चा सपूत जो देश के प्रधानमंत्री के रुप में प्रधानसेवक बनकर हम सब की सेवा कर रहे हैं, वह लोकतंत्र सेनानियों की कुर्बानी को याद रखते हैं और देश में फिर कभी वैसी स्थिति ना बने, देश में लोकतंत्र का सम्मान हो, मीडियो को स्वतंत्रता मिले और हर एक नागरिक को अधिकार मिले, इस बात के लिए वह निरंरत प्रयासरत है। आज देश को वह नेता मिला है जो देश सेवा के लिए निरंतर काम कर रहा है वैसा नेता अब देश को नहीं चाहिए जो अपनी कुर्सी बचाने के लिए देश में आपातकाल घोषित कर दें।
इस मौके पर पूर्व केन्द्राrय मंत्री श्रीमती स्मृति ईरानी ने कहा कि इतिहास की ]िफतरत है वह दोहराता है और आपातकाल का इतिहास ना दोहराया जाए इसलिए आज प्रदेश अध्यक्ष जी के सानिध्य में यह कार्यक्रम आयोजित हो रहा है और इसमें खासकर युवाओं को बुलाया गया है ताकि वह हकीकत से परिचित हो और उन सेनानियों से मिले जिन्होंने आपातकाल की यातनाएं सही और उसके खिलाफ आवाज उठाई।
उन्होंने कहा कि जनता को हमें इस बात के लिए सचेत करना चाहिए कि जिनके हाथों में आपातकाल में सत्ता थी अगर वह दोबारा आए तो वह किस प्रकार से संविधान की हत्या करेंगे।
श्रीमती स्मृति ईरानी ने कहा कि जिन्होंने पीढ़ी दर पीढ़ी संविधान की हत्या करी, आज अगर सत्ता उनके पास चली जाए तो वह क्या हश्र करेंगे, इसका प्रमाण हम पहले देख चुके हैं। वह संसद में सड़क पर भ्रांतियां फैलाते हैं और बताने की कोशिश करते हैं कि वही संविधान के सच्चे संरक्षक है। इसलिए युवाओं को इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि आपातकाल में क्या हश्र किया गया।
पूर्व केन्द्राr मंत्री ने कहा कि देश के संसद में शायद ही पहले ऐसी घटना हुई हैं कि यह व्यक्ति केरल राज्य से हैं और उनका नाम मास्टर सी. सदानंद है और उन्होने कम्युनिस्ट पार्टी को चैलेंज देने की दुस्साह करा। वह कम्युनिस्ट पार्टी जो कभी केन्द्र में रक्षक बनकर खड़ी रहती थी और उसके आवाज को बंद करने के लिए उनके पैरों को काट दिया गया। देश के संसद में ऐसा भयावह चित्र साक्षात प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि ऐसे कई कार्यकर्ताओं और व्यक्तियों से मैं मिली हूं जिनके पैर और एक व्यक्ति के हाथ काट दिए गए। यह कांग्रेस और उनके सहयोगी दलों को वोट देने का नतीजा था जिन्होंने खुद ही बताया था। बंगाल चुनाव के बाद लोगों ने ऐसी कई कहानियां बताई जिसके सुनने के बाद लोगों के रोंगटे खड़े हो गये। यह हाल करती थी कांग्रेस की सहयोगी पार्टियां जिनकी प्रशंसा एक समय कांग्रेस किया करती रही।
श्रीमति ईरानी ने कहा कि आपातकाल के संबंध में जब भी चर्चा होती है तो यह पा जरूर होता है कि एक करोड़ से ज्यादा नसबंदी हुई थी और यह तो सिर्फ वह आंकड़ा है जो लोगों के ध्यान में आया है। एक गांव ने जब इसका विरोध किया तो उस गांव की 26 दिनों तक बिजली काटी गई और एक एक मर्द को पकड़कर नसबंदी कर दी गई। पूरे गांव की नस्लें बर्बाद कर दी गई। 2,20,000 लोगों को जेल में डाला गया। जॉर्ज फर्नांडिस को ढूंढने के लिए उनके भाई की हत्या कर दी गई।
उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान महिलाओं के साथ क्या क्या हुआ इसकी पा तक नहीं है। औरतों के साथ किए गए अत्याचार को तो आपातकाल के इतिहास के पन्नो से ही हटा दिया गया। यह लोग जो आज महिलाओं की राजनीति की बात करते हैं, उन्हें उस वक्त पूछना चाहिए था कि आपातकाल के दौरान आपने औरतों के साथ क्या क्या किया।
औरतों को लेकर आज भी कांग्रेस और सहयोगी पार्टिंयों की मानसिकता सामने आई है जब बात 33ज्ञ् आरक्षण की हुई तो इन्होंने इसका विरोध किया। भाजपा का यही ताकत है कि उसके संघर्षों का हम सम्मान करते हैं और आज एक प्रण लेना होगा कि जो पहले हुआ वह देश में कभी नहीं होगा।
श्रीमती स्मृति ईरानी ने कहा कि गांधी परिवार ने जबरन अनैतिक और अवैध तरीके से चुनाव जीता और जब न्यायपालिका में चुनौती दी गई तो उन्होंने अवहेलना कर दी गई। और साथ ही 25000 अधिकारियों को रिटायर दे दी गई जबरन क्योंकि वह आपातकाल में हिस्सा नहीं बनना चाहते थे। जस्टिस खन्ना का पा जरूरी है जिन्होंने इसके खिलाफ आवाज उठाई और कहा था कि हमें श्रीमती इंदिरा गांधी माफ नहीं करेगी लेकिन मेरी आवाज बुलंद रहेगी।
उन्होंने कहा कि एक महिला होने के नाते इस दर्द को समझ सकती हूं कि 21 महीनों तक इस बात का अहसास ना होना कि हमारा बेटा जिंदा है या नहीं। इसलिए युवाओं को उस दर्द को भी महसूस करना पड़ेगा और उस काले इतिहास को भी समझना पड़ेगा जब कांग्रेसियों के हाथों में सत्ता आई तो उन्होंने देश के साथ क्या किया।
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष एवं केन्द्राrय राज्य मंत्री श्री हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि आज संविधान हत्या दिवस का 51वां वर्ष है जब देश में लोकतंत्र का गला घोटा गया था और उस वक्त प्रेस की आज़ादी खत्म कर दी गई। व्यक्तियों के जो विशेषाधिकार थे, उसे खत्म कर दिया गया था, जितने भी गैर कांग्रेसी दल थे उनके कार्यकर्ताओं पर, सधारण जनता पर अत्याचार हुए थे। आज इस संविधान हत्या दिवस की प्रासंगिकता सिर्फ यह नहीं कि पूर्व में कांग्रेस ने जो अत्याचार किए उसका वर्णन करना नहीं बल्कि आज की युवा पीढ़ी जिसने उस मंजर को नहीं देखा, वह भी इस बात को समझे कि उस वक्त कांग्रेस की मानसिकता क्या थी और आज जो संविधान की दुहाई देते हैं उन्होंने पूर्व में संविधान का गला कैसे घोंटा था।
श्री हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि सिर्फ आपातकाल नहीं आपातकाल से पहले भी जो देश में चल रहा था उस वक्त भी जो अत्याचार हुए वह भी समझने और पढ़ने की जरूरत युवाओं को है। संविधान के अनुसार भी लोकतंत्र कितना महत्वपूर्ण है इसको इस बात से समझा जा सकता है कि उस वक्त एक ओर कांग्रेस की लोकतांत्रिक विरोधी मानसिकता थी और दूसरी ओर पंचनिष्ठाओं पर आधारित जनसंघ पार्टी जो राष्ट्र प्रथम की मानसिकता के साथ आगे बढ़ रही थी, और आज उसी पंचनिष्ठाओं के आधार पर 22 राज्यों में हमारी सरकार है।
श्री मल्होत्रा ने कहा कि आज यहां वरिष्ठ साथी बैठे हैं जिन्होंने स्वयं उस वक्त की अत्याचार को सहा और यातनाएं झेली। मेरे पिताजी के पीछे भी पुलिस लगी हुई थी। जितने भी युवा बैठे है उन्हें इस बात को समझना चाहिए कि कितने तप और त्याग के बाद आज भाजपा की सरकार बनी। उन्होंने कहा कि आपातकाल हमें यह भी सिखाता है कि भारत का संविधान स्वंतत्र न्यायपालिका, स्वतंत्र प्रेस, सािढय नागरिक समाज और जागरुक जनता यह लोकतत्र के सबसे मजबूत स्तम्भ है। सत्ता कितनी भी शक्तिशाली क्यों ना हो अंत में लोकतंत्र में अंतिम निर्णय जनता का ही होता है।
पूर्व केन्द्राrय मंत्री श्री सत्यनारायण जाटिया ने आपातकाल के दौरान हुए विभत्सना को याद किया और कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का वह काला अध्याय है, जब सत्ता के अहंकार में संविधान की मर्यादाओं को कुचला गया। कांग्रेस सरकार ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए लोकतंत्र की आवाज दबाई, हजारों लोगों को जेलों में डाला और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर पहरा लगा दिया। देश कभी नहीं भूलेगा कि किस प्रकार एक परिवार के राजनीतिक स्वार्थ के लिए पूरे लोकतंत्र को बंधक बनाने का प्रयास किया गया। आज की पीढ़ी को याद रखना चाहिए कि लोकतंत्र की रक्षा केवल संविधान से नहीं, बल्कि सजग नागरिकों और लोकतंत्र के प्रहरी कार्यकर्ताओं के संघर्ष से होती है।