वैश्विक ईंधन कीमतों में वृद्धि के बावजूद दिल्ली सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत दी: आशीष सूद
प्रकाशित: 14-06-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
वीर अर्जुन संवाददाता
नई दिल्ली। दिल्ली के ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि पावर परचेज एडजस्टमेंट कॉस्ट कोई नई व्यवस्था नहीं है। यह बिजली कानूनों के तहत पहले से मौजूद एक प्रावधान है, जिसके माध्यम से बिजली कंपनियां ईंधन और बिजली खरीद की बढ़ी हुई लागत का समायोजन करती हैं।
श्री सूद ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संकट और अन्य अंतरराष्ट्रीय कारणों से ईंधन की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है। इसके कारण पिछले एक महीने में बिजली खरीद की लागत लगभग 31 प्रतिशत बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी वृद्धि के बावजूद दिल्ली सरकार के प्रयासों से उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव बहुत कम रखा गया है। बिजली खरीद की लागत 31 प्रतिशत बढ़ने के बावजूद दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (अण्) ने औसतन केवल 2.4 प्रतिशत झ्झ्Aण् वृद्धि की अनुमति दी है। ऊर्जा मंत्री ने बताया कि पहले झ्झ्Aण् की सीमा 31 मार्च तक 14.5 प्रतिशत थी, जिसे अब बढ़ाकर लगभग 17.5 से 17.9 प्रतिशत किया गया है। इससे स्पष्ट है कि सरकार ने उपभोक्ताओं को बढ़ती वैश्विक ऊर्जा कीमतों के पूरे बोझ से बचाने का प्रयास किया है। श्री सूद ने कहा कि झ्झ्Aण् देशभर में लागू एक सामान्य नियामक व्यवस्था है और बिजली कानूनों के अनुसार इसका पालन किया जाता है। अण् का ताजा आदेश बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति और उपभोक्ताओं के हितों के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि दिल्ली सरकार की बिजली सब्सिडी का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं पर इस बढ़ोतरी का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। ऐसे उपभोक्ताओं के बिजली बिल में कोई अतिरिक्त बोझ नहीं आएगा। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि कुछ लोग इस विषय पर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सरकार उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता के नेतृत्व और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि बढ़ती ऊर्जा लागत का अनुचित बोझ जनता पर न पड़े। उन्होंने बताया कि अण् के आदेश में बिजली वितरण कंपनियों के लिए लागत की वसूली को चरणबद्ध तरीके से करने का प्रावधान भी रखा गया है।
ताकि उपभोक्ताओं पर तत्काल प्रभाव कम से कम पड़े। ऊझ्अथ् के उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव लगभग नगण्य रहेगा, जबकि सभी सब्सिडी प्राप्त उपभोक्ता पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।
श्री सूद ने कहा कि दिल्ली का बिजली क्षेत्र सख्त नियामक निगरानी में काम कर रहा है और सरकार का उद्देश्य सभी नागरिकों को विश्वसनीय, सस्ती और निर्बाध बिजली उपलब्ध कराना है।
नई दिल्ली। दिल्ली के ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि पावर परचेज एडजस्टमेंट कॉस्ट कोई नई व्यवस्था नहीं है। यह बिजली कानूनों के तहत पहले से मौजूद एक प्रावधान है, जिसके माध्यम से बिजली कंपनियां ईंधन और बिजली खरीद की बढ़ी हुई लागत का समायोजन करती हैं।
श्री सूद ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संकट और अन्य अंतरराष्ट्रीय कारणों से ईंधन की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है। इसके कारण पिछले एक महीने में बिजली खरीद की लागत लगभग 31 प्रतिशत बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी वृद्धि के बावजूद दिल्ली सरकार के प्रयासों से उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव बहुत कम रखा गया है। बिजली खरीद की लागत 31 प्रतिशत बढ़ने के बावजूद दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (अण्) ने औसतन केवल 2.4 प्रतिशत झ्झ्Aण् वृद्धि की अनुमति दी है। ऊर्जा मंत्री ने बताया कि पहले झ्झ्Aण् की सीमा 31 मार्च तक 14.5 प्रतिशत थी, जिसे अब बढ़ाकर लगभग 17.5 से 17.9 प्रतिशत किया गया है। इससे स्पष्ट है कि सरकार ने उपभोक्ताओं को बढ़ती वैश्विक ऊर्जा कीमतों के पूरे बोझ से बचाने का प्रयास किया है। श्री सूद ने कहा कि झ्झ्Aण् देशभर में लागू एक सामान्य नियामक व्यवस्था है और बिजली कानूनों के अनुसार इसका पालन किया जाता है। अण् का ताजा आदेश बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति और उपभोक्ताओं के हितों के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि दिल्ली सरकार की बिजली सब्सिडी का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं पर इस बढ़ोतरी का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। ऐसे उपभोक्ताओं के बिजली बिल में कोई अतिरिक्त बोझ नहीं आएगा। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि कुछ लोग इस विषय पर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सरकार उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता के नेतृत्व और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि बढ़ती ऊर्जा लागत का अनुचित बोझ जनता पर न पड़े। उन्होंने बताया कि अण् के आदेश में बिजली वितरण कंपनियों के लिए लागत की वसूली को चरणबद्ध तरीके से करने का प्रावधान भी रखा गया है।
ताकि उपभोक्ताओं पर तत्काल प्रभाव कम से कम पड़े। ऊझ्अथ् के उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव लगभग नगण्य रहेगा, जबकि सभी सब्सिडी प्राप्त उपभोक्ता पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।
श्री सूद ने कहा कि दिल्ली का बिजली क्षेत्र सख्त नियामक निगरानी में काम कर रहा है और सरकार का उद्देश्य सभी नागरिकों को विश्वसनीय, सस्ती और निर्बाध बिजली उपलब्ध कराना है।