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आकाश आनंद अग्निपथ पर कब तक?

प्रकाशित: 05-09-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने 3 सितंबर को पार्टी के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद को सभी पदों से मुक्त करने की घोषणा कर राजनीतिक हलकों के साथ-साथ देश के बहुजन की समाज को भी आश्चर्यचकित कर दिया। मायावती ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक आकाश आनंद में राजनीतिक परिपक्वता नहीं आती, तब तक उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। यह निर्णय ऐसे समय में आया है, जब आकाश आनंद लगातार युवाओं के बीच सािढय दिखाई दे रहे थे और अपने भाषणों के माध्यम से बहुजन समाज को सत्ता में भागीदारी के लिए लामबंद करने का प्रयास कर रहे थे। हाल के दिनों में आकाश आनंद ने सादाबाद, जयपुर और जेवर जैसे स्थानों पर अपने भाषणों में जिस आाढामक और आत्मविश्वासपूर्ण शैली का प्रदर्शन किया, उससे उनके समर्थकों में उत्साह दिखाई दिया। उन्होंने युवाओं और बहुजन समाज से सत्ता हासिल करने के लिए संगठित होने तथा अपने राजनीतिक अधिकारों के प्रति जागरूक होने का आह्वान किया। उनके भाषणों में स्पष्ट राजनीतिक संदेश दिखाई देता था कि बहुजन समाज को केवल वोट की राजनीति तक सीमित न रहकर सत्ता की निर्णायक भूमिका में आना होगा। मायावती का यह कहना कि आकाश आनंद को अभी राजनीतिक परिपक्वता की आवश्यकता है, अपने आप में गंभीर राजनीतिक संदेश है। आकाश आनंद अब एक बच्चे या राजनीति के बिल्कुल नए व्यक्ति की उम्र में नहीं हैं। वे स्वयं परिवार की जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं और पिछले कई वर्षों से राष्ट्रीय राजनीति के मंच पर सािढय हैं। ऐसे में स्वाभाविक प्रश्न उठता है कि राजनीतिक परिपक्वता की वह कसौटी क्या है, जिस पर वे अभी तक खरे नहीं उतर पाए हैं? बसपा में मायावती का निर्णय सर्वोपरि रहा है। इसलिए इस निर्णय को केवल व्यक्तिगत मतभेद के रूप में देखना उचित नहीं होगा। सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि आकाश आनंद को आखिर कितने समय तक राजनीतिक अग्निपथ से गुजरना होगा?
-वीरेंद्र कुमार जाटव,
नई दिल्ली।