प्रेमिका का सिर अपनी गोद में रखकर काटा गला, होटल में रुका था कपल
प्रकाशित: 14-06-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
मध्य प्रदेश के एक प्रेमी जोड़े की प्रेम कहानी का अंत गांधीनगर के नेशनल हाईवे पर स्थित एक होटल के कमरे में होने से हड़कंप मच गया है. आधी रात को पुलिस और परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में प्रेमिका का चाकू से गला काटकर बेरहमी से हत्या करने के बाद, प्रेमी ने खुद उसी चाकू से अपना गला काटकर आत्महत्या की कोशिश की. चिलोडा पुलिस ने इस पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है.
पुलिस की शुरुआती जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि पेशे से बिल्डर प्रेमी संतोष अपनी प्रेमिका रजनी के पिता के नए घर का निर्माण कर रहा था. इस दौरान दोनों के बीच प्यार पनपा और पिछले तीन वर्षों से वे साथ घर बसाने के सपने देख रहे थे. इन सपनों का अंत आखिरकार होटल के एक बंद कमरे में खूनी अंजाम के साथ हुआ.
मध्य प्रदेश के पिपरसमा गांव की रहने वाली 21 वर्षीय रजनी 7 जून को अपने ही गांव के संतोष जाटव नाम के युवक के साथ घर से भाग गई थी. बेटी के लापता होने पर पिता व्रजलाल धाकड़ ने देहात शिवपुरी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद हेड कांस्टेबल दीपचंद ने जांच शुरू की. 10 जून को परिवार को जानकारी मिलने पर रजनी के चचेरे भाई प्रवेंद्र और नीरज अपनी किया कैरेंस कार लेकर हेड कांस्टेबल दीपचंद और कांस्टेबल बदन सिंह के साथ बेटी की तलाश में निकले.
11 जून की दोपहर वे राजकोट के शापर पहुंचे और वहां से रजनी और संतोष को ढूंढ निकाला. रजनी के माता-पिता को मना लेने की बात कहने पर, पुलिस और उसके भाई उसे कार में बिठाकर अपने गांव के लिए निकल पड़े. लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. लंबी यात्रा से थकी हुई इस टीम ने 11 जून की रात करीब साढ़े नौ बजे गांधीनगर हाईवे पर धनप के पास स्थित 'रॉयल फोर्ट होटल' में कमरा नंबर 107 बुक किया.
कैसे दिया वारदात को अंजाम
सबने साथ मिलकर खाना खाया और फिर उसी कमरे में सोने की तैयारी की. एक बिस्तर पर भाई प्रवेन्द्र, नीरज और कॉन्स्टेबल बदनसिंह सो रहे थे, जबकि दूसरे बिस्तर पर हेड कॉन्स्टेबल दीपचंद लेटे हुए थे. रजनी नीचे गद्दे पर सोई थी और संतोष दोनों बिस्तरों के बीच खाली जगह पर लेटा था. कमरे की लाइटें बंद कर दी गईं और थकान के कारण सभी गहरी नींद में सो गए, लेकिन संतोष की आंखों में नींद नहीं थी.
12 जून की आधी रात को 12 से 2:30 बजे के बीच, संतोष ने अपने पास छिपाकर रखे चाकू से नीचे सो रही रजनी का गला काट दिया. प्रेमिका की सांसें थमने के बाद, संतोष ने उसी खून से सने चाकू से अपना गला भी काटने की कोशिश की और आत्महत्या का प्रयास किया. इसी दौरान, रात करीब ढाई बजे अचानक हेड कॉन्स्टेबल दीपचंद की नींद खुली और कमरे का मंजर देखकर उनके होश उड़ गए.
कमरे की लाइट जली तो उड़ गए होश
उन्होंने तुरंत चिल्लाकर सबको जगाया और जैसे ही कमरे की लाइट जली, अंदर का दृश्य देखकर हर कोई कांप उठा. रजनी खून से लथपथ हालत में संतोष की गोद में पड़ी थी और संतोष भी गले से बहते खून के साथ हाथ में चाकू पकड़े बैठा था. होटल के कमरे में हुई इस दहला देने वाली हत्या की घटना के बाद होटल मैनेजर को जानकारी दी गई और तुरंत 108 एम्बुलेंस तथा 112 नंबर पर पुलिस को बुलाया गया.
गंभीर हालत में भी संतोष की सांसें चल रही थीं, इसलिए उसे तुरंत इलाज के लिए गांधीनगर सिविल अस्पताल ले जाया गया. वहां उसकी हालत और नाजुक होने के कारण उसे अहमदाबाद सिविल अस्पताल रेफर कर दिया गया. फिलहाल वह वहां पुलिस की कड़ी निगरानी में मौत से जंग लड़ रहा है.
ऐसे हुई प्रेम कहानी की शुरुआत
पुलिस जांच में पता चला है कि रजनी और संतोष एक ही गांव के रहने वाले हैं. संतोष कंस्ट्रक्शन का काम करता है. साढ़े तीन साल पहले रजनी के पिता ने अपना नया घर बनाने का काम संतोष को सौंपा था. इसके बाद संतोष ने अपने कारीगरों के साथ घर बनाने का काम शुरू किया. रजनी का परिवार खेती-बाड़ी से जुड़ा था, इसलिए घर का सारा आर्थिक कामकाज रजनी को सौंपा गया था. इस वजह से जब नए घर के पैसे देने होते थे, तो रजनी ही संतोष को पैसे देती थी. इस तरह दोनों एक-दूसरे के संपर्क में आए और नया घर बनने के दौरान तीन साल में दोनों को एक-दूसरे से गहरा प्यार हो गया.
एक ही गांव का होने के कारण वहां घर बसाने का सपना पूरा नहीं हो सकता था, इसलिए दोनों भागकर राजकोट आ गए. वहां उन्होंने किराए का मकान लिया और जीवन की ज़रूरतों का सामान भी जुटा लिया.
हालांकि, जब दोनों भाइयों और उन दोनों को मध्य प्रदेश ले जाया जा रहा था, तो पुलिस ने संतोष की तलाशी ली, लेकिन महिला पुलिसकर्मी न होने के कारण रजनी से अपना ज़रूरी सामान ले लेने को कहा. इसलिए रजनी ने एक बैग में सामान के साथ सब्ज़ी काटने वाला चाकू भी रख लिया. इस बात से पुलिस और दोनों भाई अनजान थे. गांव लौटने के बाद अपनी प्रेमिका के साथ नया जीवन शुरु न होने पाने के डर से संतोषने यह कदम उठाया होने की प्राथमिक जानकारी सामने आई है. संतोष अभी अस्पताल में मौत से जंग लड रहा है.
पुलिस की शुरुआती जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि पेशे से बिल्डर प्रेमी संतोष अपनी प्रेमिका रजनी के पिता के नए घर का निर्माण कर रहा था. इस दौरान दोनों के बीच प्यार पनपा और पिछले तीन वर्षों से वे साथ घर बसाने के सपने देख रहे थे. इन सपनों का अंत आखिरकार होटल के एक बंद कमरे में खूनी अंजाम के साथ हुआ.
मध्य प्रदेश के पिपरसमा गांव की रहने वाली 21 वर्षीय रजनी 7 जून को अपने ही गांव के संतोष जाटव नाम के युवक के साथ घर से भाग गई थी. बेटी के लापता होने पर पिता व्रजलाल धाकड़ ने देहात शिवपुरी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद हेड कांस्टेबल दीपचंद ने जांच शुरू की. 10 जून को परिवार को जानकारी मिलने पर रजनी के चचेरे भाई प्रवेंद्र और नीरज अपनी किया कैरेंस कार लेकर हेड कांस्टेबल दीपचंद और कांस्टेबल बदन सिंह के साथ बेटी की तलाश में निकले.
11 जून की दोपहर वे राजकोट के शापर पहुंचे और वहां से रजनी और संतोष को ढूंढ निकाला. रजनी के माता-पिता को मना लेने की बात कहने पर, पुलिस और उसके भाई उसे कार में बिठाकर अपने गांव के लिए निकल पड़े. लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. लंबी यात्रा से थकी हुई इस टीम ने 11 जून की रात करीब साढ़े नौ बजे गांधीनगर हाईवे पर धनप के पास स्थित 'रॉयल फोर्ट होटल' में कमरा नंबर 107 बुक किया.
कैसे दिया वारदात को अंजाम
सबने साथ मिलकर खाना खाया और फिर उसी कमरे में सोने की तैयारी की. एक बिस्तर पर भाई प्रवेन्द्र, नीरज और कॉन्स्टेबल बदनसिंह सो रहे थे, जबकि दूसरे बिस्तर पर हेड कॉन्स्टेबल दीपचंद लेटे हुए थे. रजनी नीचे गद्दे पर सोई थी और संतोष दोनों बिस्तरों के बीच खाली जगह पर लेटा था. कमरे की लाइटें बंद कर दी गईं और थकान के कारण सभी गहरी नींद में सो गए, लेकिन संतोष की आंखों में नींद नहीं थी.
12 जून की आधी रात को 12 से 2:30 बजे के बीच, संतोष ने अपने पास छिपाकर रखे चाकू से नीचे सो रही रजनी का गला काट दिया. प्रेमिका की सांसें थमने के बाद, संतोष ने उसी खून से सने चाकू से अपना गला भी काटने की कोशिश की और आत्महत्या का प्रयास किया. इसी दौरान, रात करीब ढाई बजे अचानक हेड कॉन्स्टेबल दीपचंद की नींद खुली और कमरे का मंजर देखकर उनके होश उड़ गए.
कमरे की लाइट जली तो उड़ गए होश
उन्होंने तुरंत चिल्लाकर सबको जगाया और जैसे ही कमरे की लाइट जली, अंदर का दृश्य देखकर हर कोई कांप उठा. रजनी खून से लथपथ हालत में संतोष की गोद में पड़ी थी और संतोष भी गले से बहते खून के साथ हाथ में चाकू पकड़े बैठा था. होटल के कमरे में हुई इस दहला देने वाली हत्या की घटना के बाद होटल मैनेजर को जानकारी दी गई और तुरंत 108 एम्बुलेंस तथा 112 नंबर पर पुलिस को बुलाया गया.
गंभीर हालत में भी संतोष की सांसें चल रही थीं, इसलिए उसे तुरंत इलाज के लिए गांधीनगर सिविल अस्पताल ले जाया गया. वहां उसकी हालत और नाजुक होने के कारण उसे अहमदाबाद सिविल अस्पताल रेफर कर दिया गया. फिलहाल वह वहां पुलिस की कड़ी निगरानी में मौत से जंग लड़ रहा है.
ऐसे हुई प्रेम कहानी की शुरुआत
पुलिस जांच में पता चला है कि रजनी और संतोष एक ही गांव के रहने वाले हैं. संतोष कंस्ट्रक्शन का काम करता है. साढ़े तीन साल पहले रजनी के पिता ने अपना नया घर बनाने का काम संतोष को सौंपा था. इसके बाद संतोष ने अपने कारीगरों के साथ घर बनाने का काम शुरू किया. रजनी का परिवार खेती-बाड़ी से जुड़ा था, इसलिए घर का सारा आर्थिक कामकाज रजनी को सौंपा गया था. इस वजह से जब नए घर के पैसे देने होते थे, तो रजनी ही संतोष को पैसे देती थी. इस तरह दोनों एक-दूसरे के संपर्क में आए और नया घर बनने के दौरान तीन साल में दोनों को एक-दूसरे से गहरा प्यार हो गया.
एक ही गांव का होने के कारण वहां घर बसाने का सपना पूरा नहीं हो सकता था, इसलिए दोनों भागकर राजकोट आ गए. वहां उन्होंने किराए का मकान लिया और जीवन की ज़रूरतों का सामान भी जुटा लिया.
हालांकि, जब दोनों भाइयों और उन दोनों को मध्य प्रदेश ले जाया जा रहा था, तो पुलिस ने संतोष की तलाशी ली, लेकिन महिला पुलिसकर्मी न होने के कारण रजनी से अपना ज़रूरी सामान ले लेने को कहा. इसलिए रजनी ने एक बैग में सामान के साथ सब्ज़ी काटने वाला चाकू भी रख लिया. इस बात से पुलिस और दोनों भाई अनजान थे. गांव लौटने के बाद अपनी प्रेमिका के साथ नया जीवन शुरु न होने पाने के डर से संतोषने यह कदम उठाया होने की प्राथमिक जानकारी सामने आई है. संतोष अभी अस्पताल में मौत से जंग लड रहा है.