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पश्चिम बंगाल में फिर से होंगे चुनाव? चुनाव आयोग ने मिली 77 शिकायतों के बाद उठाया ये कदम

प्रकाशित: 30-04-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
पश्चिम बंगाल में फिर से होंगे चुनाव? चुनाव आयोग ने मिली 77 शिकायतों के बाद उठाया ये कदम
पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण के मतदान के दौरान ईवीएम की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है. इन आरोपों के बीच भारत निर्वाचन आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है. आयोग का स्पष्ट कहना है कि चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
डायमंड हार्बर बना जांच का केंद्र
इस पूरे मामले में डायमंड हार्बर सबसे ज्यादा चर्चा में है. यहां की स्थिति को देखते हुए विशेष रोल ऑब्जर्वर सुब्रत गुप्ता को मौके पर भेजा गया है. उन्होंने स्ट्रांग रूम का दौरा कर वहां रखी ईवीएम मशीनों की सुरक्षा व्यवस्था का गहन निरीक्षण किया.
डायमंड हार्बर विमेंस कॉलेज में बनाए गए स्ट्रांग रूम में मशीनों की सीलिंग, सुरक्षा प्रोटोकॉल और निगरानी व्यवस्था की बारीकी से जांच की जा रही है. इस निरीक्षण ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है.
77 शिकायतों से बढ़ी सख्ती
सिर्फ एक क्षेत्र ही नहीं, बल्कि राज्य के कई हिस्सों से कुल 77 शिकायतें दर्ज की गई हैं, जिनमें ईवीएम से छेड़छाड़ और तकनीकी गड़बड़ी के आरोप शामिल हैं. इन शिकायतों के बाद चुनाव आयोग ने वेबकास्ट फुटेज, बूथ अधिकारियों की रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है. यह कदम आयोग की सख्त नीति को दर्शाता है, जिसमें हर शिकायत को गंभीरता से लिया जा रहा है.
‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर आयोग
राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल ने साफ कर दिया है कि आयोग 'जीरो टॉलरेंस' की नीति के तहत काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्थान पर ईवीएम से छेड़छाड़ या गड़बड़ी की पुष्टि होती है, तो वहां तुरंत पुनर्मतदान कराया जाएगा. इस बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि आयोग किसी भी तरह की अनियमितता को नजरअंदाज नहीं करेगा.
राजनीतिक आरोपों से बढ़ी हलचल
मतदान के बाद भारतीय जनता पार्टी ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनमें ईवीएम के बटन पर टेप लगाने और मतदान प्रक्रिया में हस्तक्षेप की बातें शामिल हैं. विपक्ष का दावा है कि दक्षिण 24 परगना जिले के कुछ बूथों पर पारदर्शिता प्रभावित हुई है. इन आरोपों के बीच चुनाव आयोग द्वारा विशेष पर्यवेक्षक की नियुक्ति को निष्पक्ष जांच की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.
रिपोर्ट पर टिकी नजरें
अब सभी की निगाहें सुब्रत गुप्ता की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो आगे की कार्रवाई तय करेगी. जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक आयोग किसी अंतिम निर्णय पर नहीं पहुंचेगा. पश्चिम बंगाल में ईवीएम विवाद ने चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं, लेकिन चुनाव आयोग की सक्रियता यह संकेत देती है कि निष्पक्षता बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठाया जा रहा है. आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट इस पूरे मामले की दिशा और चुनावी परिणामों पर असर तय करेगी.