वर्षों से राष्ट्र की सेवा में समर्पित Virarjun अर्जुनस्य प्रतिज्ञे द्वे, न दैन्यं, न पलायनम् ।

पागलों की दुनिया : मुझे मरने का डर नहीं

प्रकाशित: 30-04-2026 | लेखक: अनिल नरेंद्र
पागलों की दुनिया : मुझे मरने का डर नहीं
यह कहना था अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर में एक फायरिंग की घटना के बाद। ट्रंप ने घटना के बाद सीबीएस न्यूज को दिए इंटरव्यू में बताया कि जब फायरिंग हुईं तो मैं जमीन पर गिर गया और फस्र्ट लेडी भी। सिक्योरिटी फोसर्ेेस के तुरन्त एक्टिव होने पर ट्रंप ने कहा कि मैं देखना चाहता था कि आखिर हो क्या रहा है? ट्रंप से पूछा गया कि क्या आपको पता है कि आप शूटर के निशाने पर थे? इसके जवाब में उन्होंने कहा- मुझे नहीं पता।
मैंने एक मैनिपेस्टो पढ़ा। वह रेडिकलाइज्ड है। वह एक व्रिश्चियन विश्वासी था और फिर वह एंटी व्रिश्चियन बन गया और उसमें बहुत बदलाव आया। व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर के दौरान हुईं फायरिंग में निशाने पर ट्रंप और उनके अधिकारी ही थे। यह बात एक्टिंग यूएस अटानी जनरल टॉड ब्लैंच ने कही। संदिग्ध की पहचान 31 साल के कोल टॉमस एलन के रूप में की गईं है। उधर गोलीबारी के मामले में गिरफ्तार संदिग्ध कोल एलन ने कथित घोषणा पत्र में कईं गंभीर आरोप लगाए हैं। मीडिया रिपोट्र्स के अनुसार एलन ने घटना से वुछ मिनट पहले अपने परिवार के एक सदस्य को एक कथित घोषणा पत्र भेजा था। जिसमें उसने अपने इरादों और विचारों का जिव्र किया।
इस कथित दस्तावेज में एलन ने दावा किया कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन से जुड़े लोगों को निशाना बनाने की योजना बना रहा था। हालांकि उसने एफबीआईं डायरेक्टर श्री पटेल को छोड़ने की बात भी कही। उसने लिखा कि प्रशासन के अधिकारियों को वह प्राथमिकता के आधार पर तथ्य बनाएगा, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि उसके शब्दों का पूरा अर्थ क्या है? घोषणा पत्र में एलन ने बेहद गंभीर भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा कि वह ऐसे लोगों को स्वीकार नहीं कर सकता जिन्हें वह अपराधी या देशद्रोही मानता है।
रिपोट्र्स के मुताबिक, उसने वुछ ऐसे शब्दों का प्रयोग भी किया जिसमें उसने ट्रंप प्रशासन से जुड़े विवादों और आरोपों का जिव्र किया। उसने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी टिप्पणियां कीं और दावा किया कि आयोजन स्थल पर सुरक्षा का ध्यान मुख्य रूप से प्रदर्शनकारियों और सामान्य आगंतुकों पर था, न कि किसी संभावित खतरे पर। इस हादसे से यह तो साफ हो जाता है कि सिक्योरिटी की कमी थी। किसी हथियारबंद व्यक्ति का राष्ट्रपति के कार्यंव्रम के इतने करीब पहुंचना भी बेहद गंभीर लापरवाही है। वहां ट्रंप ही नहीं, उनके प्रशासन से जुड़े सभी महत्वपूर्ण लोग मौजूद थे जो निशाना बन सकते थे। कथित हमलावर भी कोईं अनपढ़, गंवार, भाड़े का हत्यारा नहीं है वह मैकेनिकल इंजीनियरिंग पढ़ा सम्मानजनक टीचर था। विडम्बना यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति पद जितना ताकतवर माना जाता है उससे जुड़े खतरे उतने ही बड़े हैं। अब्राहम लिंकन से लेकर जॉन एफ. वैनेडी तक अमेरिका के चार राष्ट्रपतियों की हत्या हो चुकी है। ट्रंप पर यह तीसरा असफल हमला है। संयोग या वुछ और? व्हाइट हाउस की स्पोक्समैन लेविट के बयान के बाद से सोशल मीडिया पर नईं बहस छिड़ गईं है। लोग हैरान हैं कि आखिर उन्होंने ऐसे शब्दों का इस्तेमाल क्यों किया जो बाद में हकीकत बन गईं। हालांकि उनके समर्थकों का कहना है कि लेविट का मतलब ट्रंप की तीखी बयानबाजी से था, न कि असली गोलियों से। सोशल मीडिया में वुछ लोग इसे स्टेज्ड ड्रामा भी बता रहे हैं। उनका कहना है कि चारों तरफ से घिरे डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी जनता की सहानुभूति लेने के लिए यह ड्रामा करवाया है।
सम्भव है कि इस घटना के बाद इस बार भी वुछ मोचर्ेे पर चुनौती झेल रहे ट्रंप प्रशासन को थोड़ी राहत मिल जाए। बाकी सत्य कभी निकलेगा या नहीं यह नहीं कहा जा सकता। ऐसी घटनाओं का सत्य शायद ही सामने आता है।
——अनिल नरेन्द्र