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शब्दहीन भावों से विश्व को जोड़ने वाली शत्ति है नृत्य अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस पर विशेष

प्रकाशित: 29-04-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
शब्दहीन भावों से विश्व को जोड़ने वाली शत्ति है नृत्य अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस पर विशेष
श्वेता गोयल
मानव सयता की सबसे पुरानी अभिव्यत्तियों में से एक है ‘नृत्य’। जब शब्द अस्तित्व में नहीं थे, तब शरीर की गति ही संवाद का माध्यम थी। समय के साथ नृत्य ने भिन्न-भिन्न संस्वृतियों में अनेक रूप धारण किए और आज यह विश्वभर में एक जीवित कला के रूप में स्थापित है। नृत्य अब वैश्विक संदर्भ में केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रहा बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक एकता और सांस्वृतिक वूटनीति का प्रभावी साधन बन चुका है। नवीनतम ‘विश्व नृत्य रिपोर्ट’ के अनुसार, वैश्विक स्तर पर नृत्य उदृाोग का आकार 45 अरब डॉलर से अधिक पहुंच गया है। वर्चुअल नृत्य कार्यंव्रमों में वर्ष 2020 के मुकाबले 2025 तक 60 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुईं है। नृत्य चिकित्सा को अब मानसिक स्वास्थ्य उपचारों में सम्मिलित किया जा रहा है। अनेक देशों में चिकित्सक अवसाद, चिता और सामाजिक अलगाव जैसी समस्याओं के उपचार में नृत्य आधारित विधियों का उपयोग किया जा रहा है। विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं ने भी नृत्य को शिक्षा के एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में स्वीकार किया है, जिससे बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन और सृजनात्मकता का विकास होता है। नृत्य की विविधता, उसकी समावेशिता और उसके सामाजिक महत्व का उत्सव मनाने के लिए प्रत्येक वर्ष 29 अप्रैल को ‘अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस’ मनाया जाता है। यह दिवस नृत्य को एक साझा मानव धरोहर के रूप में प्रस्तुत करता है, जिसमें भौगोलिक सीमाओं, जाति, धर्म, भाषा या राजनीतिक विचारधाराओं की कोईं बाधा नहीं होती। इस अवसर पर करीब 170 देशों में एक साथ नृत्य महोत्सवों, कार्यंशालाओं और सार्वजनिक प्रस्तुतियों का आयोजन किया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस मनाने की शुरुआत एक गैर सरकारी संगठन ‘अंतर्राष्ट्रीय रंगमंच संस्थान’ (आईंटीआईं) की ‘अंतर्राष्ट्रीय नृत्य समिति’ द्वारा 1982 में की गईं थी, जो ‘यूनेस्को’ का हिस्सा है। यह दिवस नृत्य के जादूगर माने जाने वाले जीन जॉज्रेस नोवेरे को सर्मपित है। ‘फादर ऑफ बैले’ के नाम से विख्यात जीन जॉज्रेस नोवेरे एक सुप्रसिद्ध बैले मास्टर थे, जिनका जन्म 29 अप्रैल 1727 को हुआ था। पहली बार 1982 में आईंटीआईं की नृत्य समिति ने उनके जन्मदिन 29 अप्रैल को अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस मनाकर उन्हें श्रद्धांजलि र्अपित की थी, जिसके बाद से यह दिवस हर साल 29 अप्रैल को मनाया जाने लगा। जॉज्रेस नोवेरे ने नृत्य पर ‘लेटर्स ऑन द डांस’ नामक एक पुस्तक भी लिखी थी, जिसमें नृत्य से जुड़ी एक-एक चीज मौजूद हैं। इस पुस्तक के बारे में कहा जाता है कि इसे पढ़कर कोईं भी नृत्य करना सीख सकता है। नृत्य परंपरा की दृष्टि से भारत विश्व के सबसे समृद्ध देशों में से एक है। भारतीय नृत्य हजारों वर्षो से चली आ रही एक जीवंत और विकसित परंपरा है, जिसकी जड़ें वेदों, पुराणों, महाकाव्यों और शास्त्रों में गहराईं से समाहित हैं। भारतीय नृत्य की विशिष्टता उसकी आध्यात्मिक गहराईं, दार्शनिकता और सामाजिक प्रतिबद्धता में निहित है। भारतीय नृत्य केवल सौंदर्यं प्रदर्शन नहीं बल्कि आध्यात्मिक साधना का माध्यम है। नाटाशास्त्र, जो लगभग दो हजार वर्ष पूर्व रचित एक विश्व प्रसिद्ध ग्रंथ है, भारतीय नृत्य की बुनियादी संरचना और सिद्धांतों का आधार है। इस ग्रंथ में नृत्य, नाटा और संगीत के तत्वों का अत्यंत वैज्ञानिक और विशद विवरण दिया गया है।भारत में नृत्य की विविधता उसकी सांस्वृतिक विविधता की तरह अद्भुत है। प्रत्येक क्षेत्र, प्रत्येक राज्य, यहां तक कि कईं गांवों की भी अपनी विशिष्ट नृत्य परंपराएं हैं। भारत के शास्त्रीय नृत्य रूप जैसे भरतनाटाम, कथक, ओडिसी, वुचिपुड़ी, मोहिनीअट्टम, कथकली, मणिपुरी और सत्त्रिया, न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके हैं। (लेखिका शिक्षण क्षेत्र में सव्रिय शिक्षाविद हैं।)