प्रिक्रिप्शन के बिना अब नहीं बिकेगा कफ सिरप
प्रकाशित: 17-06-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
विशेष प्रतिनिधि
नई दिल्ली। दवा की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने नियमों में संशोधन किया है, जिसके तहत अब कफ सिरप सहित सभी प्रकार के सिरप की डॉक्टर के पर्चे (प्रिक्रिप्शन) के बिना बिक्री पर रोक लगा दी गई है।
अधिकारियों ने बताया कि इस कदम का उद्देश्य कफ सिरप सहित सिरप आधारित दवाओं को कड़े नियामक दायरे में लाना है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि इस संशोधन से पहले, औषधि नियम 1945 की अनुसूची के (शेड्यूल के) की प्रविष्टि संख्या 13 के तहत 1,000 से कम आबादी वाले गांवों में खुदरा बिक्री लाइसेंस के कुछ प्रावधानों का पालन किए बिना भी कफ सिरप बेचने की अनुमति थी। अब उक्त प्रविष्टि से सिरप शब्द को हटा दिया गया है, जिसके बाद कफ सिरप को मिलने वाली यह छूट पूरी तरह समाप्त हो गई है।बयान में कहा गया है, इसके परिणामस्वरूप, अब केवल औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 तथा उसके तहत बनाए गए नियमों के प्रावधानों के अनुसार, छोटे गांवों में भी कफ सिरप की बिक्री और वितरण उचित लाइसेंस प्राप्त दवा दुकानों (फार्मेसी) के माध्यम से ही किया जा सकेगा। इस संबंध में आधिकारिक राजपत्र में औषधि (पांचवां संशोधन) नियम, 2026 के माध्यम से अधिसूचना जारी की गई है। यह संशोधन अपने प्रकाशन की तिथि से ही तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। औषधि नियम, 1945 की अनुसूची के दवाओं के निर्दिष्ट वर्गों के लिए औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 और उसके तहत बनाए गए नियमों के कुछ प्रावधानों से छूट प्रदान करती है। यह उन दवाओं की श्रेणियों को निर्दिष्ट करती है जिन्हें निर्धारित शर्तों के अधीन, औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम और नियमों के तहत निर्माण, बिक्री और वितरण से संबंधित कुछ प्रावधानों से छूट दी गई है। सरकार ने यह कदम पिछले साल दिसंबर में जारी एक मसौदा अधिसूचना के बाद उ"ाया है, जिसके जरिए हितधारकों से आपत्तियां और सुझाव मांगे गए थे।बयान में कहा गया है कि यह संशोधन सिरप आधारित दवाओं के नियामक निरीक्षण को मजबूत करने और छूट के इस ढांचे को समकालीन सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने के लिए किया गया है।स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि इस उपाय से देशभर में नियामक मानकों का बेहतर अनुपालन सुनिश्चित होने के साथ ही कफ सिरप की जिम्मेदारीपूर्ण बिक्री को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। मंत्रालय ने कफ सिरप से जुड़े निर्माताओं, वितरकों और खुदरा विक्रेताओं को औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 तथा औषधि नियम, 1945 के तहत लागू लाइसेंसिंग और नियामक आवश्यकताओं का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने की सलाह दी है।यह निर्णय हाल के वर्षों में कई देशों में कफ सिरप में कथित मिलावट के कारण बच्चों की मौत की खबरों के बाद, लिद्रिड ओरल फॉर्मूलेशन पर बढ़ी नियामक निगरानी की पृष्"भूमि में आया है। सूत्रों के अनुसार, इस नवीनतम संशोधन से सिरप आधारित दवाओं की निगरानी और उनके स्रोत का पता लगाने की व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद है।
इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि निर्माता और विक्रेता दोनों ही लाइसेंसिंग और गुणवत्ता नियंत्रण की सख्त शर्तों का पालन करें।
नई दिल्ली। दवा की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने नियमों में संशोधन किया है, जिसके तहत अब कफ सिरप सहित सभी प्रकार के सिरप की डॉक्टर के पर्चे (प्रिक्रिप्शन) के बिना बिक्री पर रोक लगा दी गई है।
अधिकारियों ने बताया कि इस कदम का उद्देश्य कफ सिरप सहित सिरप आधारित दवाओं को कड़े नियामक दायरे में लाना है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि इस संशोधन से पहले, औषधि नियम 1945 की अनुसूची के (शेड्यूल के) की प्रविष्टि संख्या 13 के तहत 1,000 से कम आबादी वाले गांवों में खुदरा बिक्री लाइसेंस के कुछ प्रावधानों का पालन किए बिना भी कफ सिरप बेचने की अनुमति थी। अब उक्त प्रविष्टि से सिरप शब्द को हटा दिया गया है, जिसके बाद कफ सिरप को मिलने वाली यह छूट पूरी तरह समाप्त हो गई है।बयान में कहा गया है, इसके परिणामस्वरूप, अब केवल औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 तथा उसके तहत बनाए गए नियमों के प्रावधानों के अनुसार, छोटे गांवों में भी कफ सिरप की बिक्री और वितरण उचित लाइसेंस प्राप्त दवा दुकानों (फार्मेसी) के माध्यम से ही किया जा सकेगा। इस संबंध में आधिकारिक राजपत्र में औषधि (पांचवां संशोधन) नियम, 2026 के माध्यम से अधिसूचना जारी की गई है। यह संशोधन अपने प्रकाशन की तिथि से ही तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। औषधि नियम, 1945 की अनुसूची के दवाओं के निर्दिष्ट वर्गों के लिए औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 और उसके तहत बनाए गए नियमों के कुछ प्रावधानों से छूट प्रदान करती है। यह उन दवाओं की श्रेणियों को निर्दिष्ट करती है जिन्हें निर्धारित शर्तों के अधीन, औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम और नियमों के तहत निर्माण, बिक्री और वितरण से संबंधित कुछ प्रावधानों से छूट दी गई है। सरकार ने यह कदम पिछले साल दिसंबर में जारी एक मसौदा अधिसूचना के बाद उ"ाया है, जिसके जरिए हितधारकों से आपत्तियां और सुझाव मांगे गए थे।बयान में कहा गया है कि यह संशोधन सिरप आधारित दवाओं के नियामक निरीक्षण को मजबूत करने और छूट के इस ढांचे को समकालीन सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने के लिए किया गया है।स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि इस उपाय से देशभर में नियामक मानकों का बेहतर अनुपालन सुनिश्चित होने के साथ ही कफ सिरप की जिम्मेदारीपूर्ण बिक्री को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। मंत्रालय ने कफ सिरप से जुड़े निर्माताओं, वितरकों और खुदरा विक्रेताओं को औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 तथा औषधि नियम, 1945 के तहत लागू लाइसेंसिंग और नियामक आवश्यकताओं का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने की सलाह दी है।यह निर्णय हाल के वर्षों में कई देशों में कफ सिरप में कथित मिलावट के कारण बच्चों की मौत की खबरों के बाद, लिद्रिड ओरल फॉर्मूलेशन पर बढ़ी नियामक निगरानी की पृष्"भूमि में आया है। सूत्रों के अनुसार, इस नवीनतम संशोधन से सिरप आधारित दवाओं की निगरानी और उनके स्रोत का पता लगाने की व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद है।
इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि निर्माता और विक्रेता दोनों ही लाइसेंसिंग और गुणवत्ता नियंत्रण की सख्त शर्तों का पालन करें।