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‘गजवा-ए-हिन्द’ के लिए जिन्दगी तबाह करते युवा

प्रकाशित: 25-04-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
‘गजवा-ए-हिन्द’ के लिए जिन्दगी तबाह करते युवा
डॉ. बचन सिंह सिकरवार
हाल में नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय जाँच एजेन्सी (एन.आइ.ए.) की अदालत द्वारा बेंगलुरु की परप्पन्ना अग्रहरा सेण्ट्रल जेल में कट्टरपंथ फैलाने की षड्यंत्र/ साजिश रचने के मामले में मुख्य षड्यंत्रकर्ता और ‘लश्कर-ए-तैयबा’ के आतंकवादी टी.नसीर समेत सात लोगों को सात-सात साल की जो कठोर जेल की सजा सुनायी गई है, उससे स्पष्ट है कि देश के जम्मू-कश्मीर से लेकर केरलम, गुजरात से लेकर असम तक विभिन्न भागों में कुछ मुसलमान मुट्ठी भर इस्लामिक कट्टरपंथी मुल्ला-मौलवियों द्वारा ‘गजवा-ए-हिन्द’ के दिखाये ख्वाब/ भरम/ सनक को पूरा करने को न केवल अपने ही मुल्क को हर तरह से नुकसान पहुँचाने को तत्पर रहते हैं, बल्कि अपनी और परिजनों की जिन्दगियाँ तबाह/ बर्बाद करने पर उतारू रहते हैं। ये सभी देश में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने की मंशा/ इरादे से युवाओं को भर्ती, प्रशिक्षण देने, मतान्तरण कराने और उन्हें कट्टरपंथी बनाने का आरोप साबित हुए हैं। बेंगलुरु सेण्ट्रल क्राइम ब्रांच ने यह मामला जुलाई, 2023 ने उस समय दर्ज किया, जब आदतन अपराधियों से हथियार, गोला-बारूद और डिजिटल उपकरण बरामद किये थे। जाँच एजेन्सी ने कहा कि अपराधियों ने प्रतिबन्धित आतंकवादी संगठन ‘लश्कर-ए-तैयबा’ के हिंसक भारत विरोधी एजेण्डे को आगे बढ़ाने के लिए बेंगलुरु में आतंकवादी हमले की साजिश रची थी। अदालत ने नसीर के अलावा सैयद सुहैल खान, मोहम्मद उमर, जाहिद तबरेज, मोहम्मद मुदस्सिर पाशा, मोहम्मद फैसल रब्बानी और सलमान खान को दोषी ठहराते हुए सजा सुनायी है। इन 48 हजार रुपए का जुर्माना भी लगा गया है। अब प्रश्न यह है कि इतने कठोर कारावास के बाद अपने देश में फैले ऐसी ही मंशा पालने वाले कोई सबक लेंगे? वर्तमान में लगातार ऐसी घटनाओं को देखते हुए यह नहीं लगता।
हाल में 23 अप्रैल को‘आतंकवाद निरोधक दस्ता’ (एटीएस) ने पाकिस्तानी खुफिया एजेन्सी आई.एस.आई. के लिए काम करने वाले 20 वर्षीय तुषार चैहान उर्फ हिजबुल्ला अली खान तथा 20 वर्षीय समीर खान को नोएडा से गिरफ्तार किया, जो पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के लिए भी कार्य करते थे। उन्हें पाकिस्तानी यूट्बर ने दीवारों पर टी.टी.एच. (तहरीक-ए-तालिबान हिन्दुस्तान) लिखने और ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ने को कहा था। इसी 21 अप्रैल का गुजरात के अहमदाबाद में एटीएस ने दो कट्टरपंथी युवकों का गिरफ्तार किया है, इनमें एक को पाटण और दूसरे को मुम्बई से पकड़ा है, जो इण्टरनेट मीडिया पर देश विरोधी सामग्री प्रसारित कर सरकार के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह के लिए युवकों का उकसा रहे थे। ये हथियार जमा करने और विस्फोट तैयार कर मुस्लिमों युवकों को देश विरोधी गतिविधियों के लिए आगे लाने का प्रयास कर रहे थे। इनका इरादा भारत में ‘गजवा-ए-हिन्द’ कायम करना था इसके लिए ये गहरी साजिश रच रहे थे। लखनऊ के जार्ज किंग मेडिकल विश्वविद्यालय में 12वीं पास फर्जी डॉक्टर हस्साम हुसैन पकड़ा गया है, जो पिछले 5 साल से मेडिकल की पढ़ाई कर रही हिन्दू छात्राओं को प्रेम जाल में फँसा कर मतान्तरण करने के प्रयास में लगा था। विगत नूंह में अलफतह मेडिकल कॉलेज में ऐसे इस्लामिक कट्टरपंथी डॉक्टरों का गिरोह ही पकड़ा गया था। इससे पहले 18 अप्रैल का दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा ने ‘इस्लामिक स्टेट’ (आई.एस.) प्रभावित चार संदिग्ध आतंकवादियों का महाराष्ट्र, ओडिसा और बिहार से गिरफ्तार किया। इन आतंकवादियों का इरादा राम मन्दिर, संसद भवन और सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमलों का था। इनका मकसद भारत में ‘शरीयत हुकूमत’ यानी खिलाफत कायम करना था। कुछ समय से देश को ‘दारूल इस्लाम’, ‘इस्लामी मुल्क’ बनाने या फिर ‘गजवा-ए-हिन्द’ कायम करने का जुनून/फितूर बढ़ा है, उसकी वजह जगह-जगह से ऐसे जिहादी मानसिकता के युवक पकड़े जा रहे हैं। इनमें कुछ आइ.एस.तो कुछ ‘अलकायदा’,‘लश्कर-ए-तैयबा’, सिमी, ‘पीएफआई, जैसे कई खूंखार दहशतगर्द संगठनों से प्रभावित हैं। गत 4 मार्च को दिल्ली और उ.प्र. पुलिस को संयुक्त कार्रवाई में कुशीनगर से आइ.एस. से जुड़े रिजवान अहमद को गिरफ्तार किया।
यह आतंकवादियों की भर्ती कर रहा था। 30 मार्च को ‘लश्कर-ए-तैयबा’ के हैण्डलर शब्बीर अहमद लोन को पकड़ा गया। वह दिल्ली में आतंकवाद की हिमायत में पैम्फलैट चिपकाने वाले गुट का मुख्य आरोपी था।
मार्च से पहले फरवरी और जनवरी में भी देश के भागों में संदिग्ध आतंकवादी पुलिस ने गिरफ्तार किये। समस्या भारत में जिहाद करके उसे इस्लाम हुकूमत बनाने का मुगालता पालने तत्त्व ही नहीं है। समस्या ये भी है, जो छल-बल, लोभ-लालच, प्रेम-प्रसंग के जरिये मतान्तरण कराकर भारत को इस्लामी देश बनाने के इरादे से लैस है, जैसे टी.सी.एस. (टाटा कन्सल्टेंसी सर्विस) नासिक ये के कर्मचारी, जो यह अपनी तरह का जिहाद ही रहे थे। टी.सी.एस. नासिक में मानसिक प्रताड़ना और प्रेमजाल के सहारे हिन्दू युवतियों को इस्लाम में मतान्तरित करने की कोशिश के मामले में की पूरी परतें अभी खुली भी नहीं थीं, कि इसी बीच नागपुर में एक गैर-सरकारी संगठन (एन.जी.ओ.) का संचालक रियाज कादरी पकड़ा गया, जिस पर वहाँ काम करने वाली हिन्दू युवतियों ने आरोप लगाया है कि वह उन्हें रोजा रखने, नमाज पढ़ने और खुदा हाफिज बोलने को कहता था। इन युवतियों के यौन शोषण करने और इस्लाम में मतान्तरित करने के लिए दबाव बनाने के आरोप भी लगाए। इससे संगीन और सनसनीखेज मामला भोपाल का है। यहाँ स्पा और ब्यूटी पार्लर चलाने वाली मुस्लिम युवतियाँ गरीब हिन्दू युवतियों को नौकरी पर रखती। फिर अपने साथियों से उनका यौन शोषण करातीं और उनके वीडियों बनाकर उन्हें मुस्लिम बनने को कहतीं। इन्होंने डरा-धमका कर/ ब्लैकमेलिंग तीन नाबालिग/ अवयस्क हिन्दू युवतियों को मतान्तरित कर भी लिया। इस पर हैरान न हों कि अब मुस्लिम युवतियों भी जिहाद में हाथ बँटाने को तैयार है।
5 जुलाई, 2025 को उ.प्र. के बलरामपुर जिले में मतान्तरण गिरोह के सरगना जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा और उसके कई सदस्यों को पकड़ा, जो वर्तमान जेल में है, जिसे सबसे ज्यादा फाण्डिग सीरिया के शिपिंग कम्पनी से हो रही थी। इस धनराशि को विभिन्न खातों में स्थानान्तरित कर स्विस बैंक खाते में जमा किया जाता था। ‘गजवा-ए-हिन्द’ के लिए ये कई तरह के तरीके अपना रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि छांगुर बाबा गिरोह कमें मतान्तरण वाले खुद भी मतान्तरित मुसलमान थे, जो कभी हिन्दू थे। 23 अप्रैल को टी.वी.चैनल पर प्रसारित समाचार के मुताबिक बिहार के एक स्कूल में दोपहर के भोजन में गाय का मांस खिलाने की साजिश का खुलासा हुआ है। इससे पहले झारखण्ड और बिहार के स्कूल में रविवार के स्थान पर शुक्रवार की छुट्टी की जाने का पता चला। पश्चिमी उ.प्र.के मुस्लिम बहुल गाँवों में हिन्दू छात्रों को नमाज पढ़ाने की खबरें भी मिलीं थीं।
वैसे अपने देश के लिए ‘गजवा-ए-हिन्द’ भारतीयों के लिए कोई नया शब्द नहीं हैं, बल्कि इस अरबी शब्द/अल्फाज का इस्तेमाल मुसलमान आाढान्ता/हमलावरों द्वारा सदियों (सन् 712 मोहम्मद बिन कासिम के सिन्ध पर हमले) से होता आया है। ‘गजवा’ के माने -इस्लाम के प्रसार की जंग/लड़ाई और ‘हिन्द’का मतलब- भारतीय उपमहाद्वीप है। ऐसे में ‘गजवा-ए-हिन्द’से तात्पर्य भारत में काफिरों/गैर मुस्लिमों को हरा कर इसे ‘इस्लामिक मुल्क’/ दारूल इस्लाम में तब्दील करना है।
अपने देश में कुछ दहशतगर्द संगठनों खासतौर से‘पीपुल्स फ्रण्ट ऑफ इण्डिया (पी.एफ.आई.) के दफ्तर से कुछ कागजात मिले हैं, जिनमें 2047 तक भारत को इस्लामिक मुल्क मे बदलने की बात कही गई है। वैसे हकीकत यह है कि इनके लिए भारत को इस्लामिक मुल्क में तब्दील करना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है। एक करोड़ से कुछ अधिक जनसंख्या/उसमें से भी सिर्फ 77 फीसदी यहूदी, बाकी अरबी मुसलमान आबादी वाले इजरायल का जब दुनिया के 57 इस्लामिक मुल्क कुछ नहीं बिगाड़ पाए, फिर हिन्दू तो 80 करोड़ से अधिक हैं। ऐसे में भारतीय मुसलमानों के लिए बेहतर होगा कि भारत को पाकिस्तान में मिलाने या इसे ‘दारूल इस्लाम’/ ‘गजवा-ए-हिन्द’ बनाने की बेकार की कोशिशों के बजाय इसे ही अपना वतन मानते हुए अमन-चैन से रहें और दूसरों को भी रहने दें।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)