दुनिया ने जाना मोटे अनाज का महत्व
प्रकाशित: 22-06-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
बाल मुकुंद ओझा
प्रगति और विकास के साथ न केवल हमारी जीवनशैली बदली अपितु हमारा खान-पान भी पूरी तरह से बदल गया। चार पांच दशक पहले मोटा अनाज हमारे आहार का मुख्य घटक था । जिन अनाज को हमारी कई पीढ़ियां खाती आ रही थीं, उनसे हमने मुंह मोड़ लिया। वह भी एक समय था जब लोग हाथ चक्की में पीसे मोटे अनाज का सेवन कर स्वस्थ रहते थे। मोटे अनाज के एक नहीं अनेक फायदे है। पौष्टिक तत्वों की भरमार होने से अनेक बीमारियां दूर भागती थी। अब एक बार फिर देश का ध्यान मोटे अनाज की ओर गया है। यह अनाज देश में बहुतायत से उत्पन्न होता है। देश और दुनिया में मोटे अनाज की मांग बढ़ रही है। अब यह केवल गरीब की थाली तक सीमित नहीं रहा है अपितु फाइव स्टार होटलों में भी पहुँच गया है। आज देश-दुनिया के लोग मोटे अनाज की खूबियों का बेबाकी से बखान कर रहे हैं। हमारी सेहत और खानपान को लेकर दुनियाभर में चिंता व्याप्त हो रही है। एक मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक हम सभी की आधी से ज्यादा बीमारियों की वजह हमारा गलत खानपान है। इसी के साथ बिगड़ी सेहत को सुधारने के लिए मोटा अनाज या श्री अन्न एक बार फिर चर्चा में आ गया है। वैज्ञानिकों का मानना है मोटे अनाज के सेवन से शरीर में अनेक बीमारियां दूर हो जाती है मोटा अनाज डायबिटीज को रोकता है कोलेस्ट्रॉल और कैंसर की रोकथाम करता है। हार्ट अटैक से रक्षा करता है। मोटा अनाज पाचन तंत्र को मजबूत करता है और मोटापे को घटाता है। अनेक औषधीय फायदों के कारण इसे सेहत का खजाना कहा गया है। हमारे देश में आज भी घर घर में लोग गेहूं के साथ मक्के, बाजरा और चंने की रोटी पसंद करते हैं। सर्दी हो या गर्मी लोग इसे बड़े ही चाव के साथ न केवल खाते है अपितु मेहमानों की परोसगारी भी करते है। इसे मोटा अनाज कहा जाता है, जिसमें ज्वार, बाजरा, रागी, सावां, कंगनी, चीना, कोदो, कुटकी और कुट्टू शामिल है। सर्दी के दिनों में ठंड से शरीर को बचाने के लिए ज्वार और बाजरा खाने की सलाह भी दी जाती है। गेहूं और चावल की तुलना में मोटे अनाज में मिनरल, विटामिन, एंजाइम और इन सॉल्युबल फाइबर भी ज्यादा मात्रा में पाया जाता है। मोटे अनाज को खाने से शरीर में कई पोषक तत्वों की पूर्ति होती है साथ ही यह कुपोषण से भी बचाव करेगा। मोटे अनाजों में बीटा-कैरोटीन, नाइयासिन, विटामिन-बी6, फोलिक एसिड, पोटेशियम, मैग्नीशियम, जस्ता आदि खनिज लवण भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में पैदा होने वाले मोटे अनाज में 41 प्रतिशत तक भारत में पैदा होता है। देश में सर्वाधिक बाजरा उत्पादन करने वाले राज्य राजस्थान सहित अनेक प्रदेशों में मोटे अनाज की महत्ता, उपयोगिता और पोषण गुणवत्ता को लेकर कार्यशालाएं आयोजित की जा रही है जिनके माध्यम से किसानों और आम नागरिकों में जागरूकता पैदा की जा रही है। राजस्थान का बाजरे के उत्पादन और क्षेत्रफल दोनों दृष्टि से देश में प्रथम स्थान है। देश में बाजरा क्षेत्रफल में राजस्थान का हिस्सा 57.10 प्रतिशत है वहीं उत्पादन में 41.71 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)
प्रगति और विकास के साथ न केवल हमारी जीवनशैली बदली अपितु हमारा खान-पान भी पूरी तरह से बदल गया। चार पांच दशक पहले मोटा अनाज हमारे आहार का मुख्य घटक था । जिन अनाज को हमारी कई पीढ़ियां खाती आ रही थीं, उनसे हमने मुंह मोड़ लिया। वह भी एक समय था जब लोग हाथ चक्की में पीसे मोटे अनाज का सेवन कर स्वस्थ रहते थे। मोटे अनाज के एक नहीं अनेक फायदे है। पौष्टिक तत्वों की भरमार होने से अनेक बीमारियां दूर भागती थी। अब एक बार फिर देश का ध्यान मोटे अनाज की ओर गया है। यह अनाज देश में बहुतायत से उत्पन्न होता है। देश और दुनिया में मोटे अनाज की मांग बढ़ रही है। अब यह केवल गरीब की थाली तक सीमित नहीं रहा है अपितु फाइव स्टार होटलों में भी पहुँच गया है। आज देश-दुनिया के लोग मोटे अनाज की खूबियों का बेबाकी से बखान कर रहे हैं। हमारी सेहत और खानपान को लेकर दुनियाभर में चिंता व्याप्त हो रही है। एक मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक हम सभी की आधी से ज्यादा बीमारियों की वजह हमारा गलत खानपान है। इसी के साथ बिगड़ी सेहत को सुधारने के लिए मोटा अनाज या श्री अन्न एक बार फिर चर्चा में आ गया है। वैज्ञानिकों का मानना है मोटे अनाज के सेवन से शरीर में अनेक बीमारियां दूर हो जाती है मोटा अनाज डायबिटीज को रोकता है कोलेस्ट्रॉल और कैंसर की रोकथाम करता है। हार्ट अटैक से रक्षा करता है। मोटा अनाज पाचन तंत्र को मजबूत करता है और मोटापे को घटाता है। अनेक औषधीय फायदों के कारण इसे सेहत का खजाना कहा गया है। हमारे देश में आज भी घर घर में लोग गेहूं के साथ मक्के, बाजरा और चंने की रोटी पसंद करते हैं। सर्दी हो या गर्मी लोग इसे बड़े ही चाव के साथ न केवल खाते है अपितु मेहमानों की परोसगारी भी करते है। इसे मोटा अनाज कहा जाता है, जिसमें ज्वार, बाजरा, रागी, सावां, कंगनी, चीना, कोदो, कुटकी और कुट्टू शामिल है। सर्दी के दिनों में ठंड से शरीर को बचाने के लिए ज्वार और बाजरा खाने की सलाह भी दी जाती है। गेहूं और चावल की तुलना में मोटे अनाज में मिनरल, विटामिन, एंजाइम और इन सॉल्युबल फाइबर भी ज्यादा मात्रा में पाया जाता है। मोटे अनाज को खाने से शरीर में कई पोषक तत्वों की पूर्ति होती है साथ ही यह कुपोषण से भी बचाव करेगा। मोटे अनाजों में बीटा-कैरोटीन, नाइयासिन, विटामिन-बी6, फोलिक एसिड, पोटेशियम, मैग्नीशियम, जस्ता आदि खनिज लवण भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में पैदा होने वाले मोटे अनाज में 41 प्रतिशत तक भारत में पैदा होता है। देश में सर्वाधिक बाजरा उत्पादन करने वाले राज्य राजस्थान सहित अनेक प्रदेशों में मोटे अनाज की महत्ता, उपयोगिता और पोषण गुणवत्ता को लेकर कार्यशालाएं आयोजित की जा रही है जिनके माध्यम से किसानों और आम नागरिकों में जागरूकता पैदा की जा रही है। राजस्थान का बाजरे के उत्पादन और क्षेत्रफल दोनों दृष्टि से देश में प्रथम स्थान है। देश में बाजरा क्षेत्रफल में राजस्थान का हिस्सा 57.10 प्रतिशत है वहीं उत्पादन में 41.71 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)