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विकसित भारत 2047 और युवा नेतृत्व का निर्माण : एमपी लीड फेलोशिप की प्रासंगिकता

प्रकाशित: 22-06-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
डॉ. अजित माधवराव गोपछड़े
भारत आज एक ऐसे ऐतिहासिक दौर से गुजर रहा है, जहाँ उसकी सबसे बड़ी शक्ति उसकी युवा आबादी है। विश्व के अनेक विकसित देशों में जहां युवा जनसंख्या का अनुपात लगातार घट रहा है, वहीं भारत के पास विश्व की सबसे बड़ी युवा शक्ति उपलब्ध है। यह युवा शक्ति केवल जनसंख्या का आँकड़ा नहीं, बल्कि राष्ट्र के भविष्य की दिशा और दशा निर्धारित करने वाली ऊर्जा है। किसी भी राष्ट्र की उन्नति उसके युवाओं की सोच, नेतृत्व क्षमता, नवाचार, सामाजिक चेतना और राष्ट्र के प्रति समर्पण पर निर्भर करती है। यही कारण है कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने विकसित भारत 2047 की परिकल्पना प्रस्तुत करते हुए युवाओं को इस राष्ट्रीय अभियान का सबसे महत्वपूर्ण भागीदार बताया है।
प्रधानमंत्री ने अपने विभिन्न संबोधनों में बार-बार इस बात पर बल दिया है कि भारत जब स्वतंत्रता के सौ वर्ष पूर्ण करेगा, तब विकसित भारत का सपना साकार करने की जिम्मेदारी आज की युवा पीढ़ी के कंधों पर होगी। उन्होंने युवाओं को अमृत पीढ़ी की संज्ञा देते हुए कहा है कि यही पीढ़ी भारत को आत्मनिर्भर, समृद्ध, नवाचारयुक्त और विश्व नेतृत्व की भूमिका में स्थापित करेगी। प्रधानमंत्री का स्पष्ट मत है कि विकसित भारत का निर्माण केवल सरकारों के प्रयासों से नहीं होगा, बल्कि जागरूक नागरिकों, सशक्त लोकतांत्रिक संस्थाओं और राष्ट्रहित के प्रति समर्पित युवाओं की सक्रिय भागीदारी से ही संभव होगा।
इसी राष्ट्रीय दृष्टि और भावना को ध्यान में रखते हुए एमपी लीड फेलोशिप की परिकल्पना की गई है। यह पहल युवाओं को लोकतांत्रिक संस्थाओं, संसदीय परंपराओं, नीति-निर्माण की प्रक्रियाओं और जनसेवा के विविध आयामों से जोड़ने का एक अभिनव प्रयास है। आज आवश्यकता केवल शिक्षित युवाओं की नहीं है, बल्कि ऐसे युवाओं की है जो शासन व्यवस्था को समझते हों, लोकतंत्र के मूल्यों को आत्मसात करते हों और समाज तथा राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के लिए प्रतिबद्ध हों। एमपी लीड फेलोशिप इसी उद्देश्य को लेकर आगे बढ़ रही है।
लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति नागरिकों की जागरूकता और सहभागिता में निहित होती है। जब युवा लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को समझते हैं और नीति-निर्माण की प्रक्रिया में रुचि लेते हैं, तब लोकतंत्र अधिक मजबूत और प्रभावी बनता है। दुर्भाग्यवश अनेक प्रतिभाशाली युवाओं को संसद, प्रशासन और सार्वजनिक नीति की कार्यप्रणाली को निकट से समझने का अवसर नहीं मिल पाता। परिणामस्वरूप वे शासन व्यवस्था से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण पहलुओं से अनभिज्ञ रह जाते हैं। एमपी लीड फेलोशिप इस दूरी को समाप्त करने का एक सार्थक प्रयास है। इसके माध्यम से युवाओं को संसद, जनप्रतिनिधियों, नीति-निर्माताओं तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं के साथ प्रत्यक्ष संवाद और अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलता है।
यह फेलोशिप केवल प्रशिक्षण कार्पाम नहीं है, बल्कि नेतृत्व निर्माण की एक सशक्त प्रयोगशाला है। इसके माध्यम से प्रतिभागियों को जननीति अनुसंधान, विधायी प्रािढयाओं, सुशासन, जनसंपर्क, सामाजिक सरोकारों और सामुदायिक नेतृत्व के विभिन्न पक्षों का व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया जाता है। इससे उनमें समस्या-समाधान की क्षमता, विश्लेषणात्मक सोच, संवाद कौशल, निर्णय क्षमता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित होती है। यही वे गुण हैं जो किसी भी युवा को भविष्य का प्रभावी नेतृत्वकर्ता बनाते हैं।
इस फेलोशिप के प्रति देशभर के युवाओं का उत्साह इसकी सफलता और उपयोगिता का प्रमाण है। कार्यक्रम की घोषणा के कुछ ही दिनों के भीतर पाँच हजार से अधिक आवेदन प्राप्त होना इस बात का संकेत है कि भारत का युवा वर्ग राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में सािढय भूमिका निभाने के लिए तैयार है। युवाओं की यह सकारात्मक ऊर्जा विकसित भारत के संकल्प को नई शक्ति प्रदान करती है। चयन प्रक्रिया को पूर्णत पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाया गया, जिसमें वस्तुनिष्ठ परीक्षा, निबंध लेखन और विस्तृत आवेदन पत्र के माध्यम से प्रतिभागियों की योग्यता और दृष्टिकोण का मूल्यांकन किया गया। इसके पश्चात चयनित अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के माध्यम से परखा गया, जिससे वास्तव में योग्य और प्रतिबद्ध युवाओं का चयन सुनिश्चित हो सके।
एमपी लीड फेलोशिप की एक विशेष उपलब्धि इसका समावेशी स्वरूप है। यह कार्यक्रम भारत की विविधता और लोकतांत्रिक मूल्यों का वास्तविक प्रतिनिधित्व करता है। इसमें देश के विभिन्न राज्यों, भाषाई क्षेत्रों, सामाजिक समूहों और आर्थिक पृष्ठभूमियों से आने वाले युवाओं को अवसर प्रदान किया गया है। जनजातीय समुदायों, ग्रामीण क्षेत्रों, पिछड़े वर्गों और सामाजिक रूप से वंचित वर्गों के युवाओं की भागीदारी यह सुनिश्चित करती है कि नेतृत्व निर्माण का अवसर समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचे। साथ ही लगभग पचास प्रतिशत महिला प्रतिनिधित्व इस कार्यक्रम को और अधिक संतुलित तथा प्रेरणादायी बनाता है।
आज जब भारत वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान को नई ऊँचाइयों तक पहुँचा रहा है, तब ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता है जो राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हो। युवाओं में यह चेतना तभी विकसित होगी जब उन्हें लोकतंत्र, प्रशासन और जनसेवा की वास्तविक समझ प्राप्त होगी। एमपी लीड फेलोशिप इसी दिशा में एक दूरदर्शी कदम है, जो युवाओं को केवल करियर निर्माण तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उन्हें राष्ट्र निर्माण का सक्रिय सहभागी बनने के लिए प्रेरित करती है।
विकसित भारत 2047 का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास का लक्ष्य नहीं है। यह एक ऐसे भारत के निर्माण का संकल्प है जो आत्मनिर्भर, समावेशी, नवाचारी, सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और लोकतांत्रिक मूल्यों से परिपूर्ण हो। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए ऐसे युवाओं की आवश्यकता होगी जो ज्ञान, चरित्र, नेतृत्व और सेवा भाव से सम्पन्न हों। एमपी लीड फेलोशिप ऐसे ही युवा नेतृत्व के निर्माण का एक प्रभावी माध्यम बनकर उभर रही है।
मेरा दृढ़ विश्वास है कि यदि देशभर में युवाओं को इस प्रकार के अवसर उपलब्ध कराए जाएँ, तो भारत की युवा शक्ति केवल देश के विकास की भागीदार ही नहीं बनेगी, बल्कि विश्व के सामने लोकतांत्रिक नेतृत्व और जनभागीदारी का एक नया आदर्श भी प्रस्तुत करेगी। विकसित भारत 2047 का सपना तभी साकार होगा जब हमारे युवा लोकतंत्र को समझेंगे, समाज से जुड़ेंगे और राष्ट्रहित को अपने जीवन का उद्देश्य बनाएँगे। एमपी लीड फेलोशिप इसी दिशा में एक सशक्त, सार्थक और दूरगामी पहल है।
(लेखक राज्यसभा सांसद हैं।)