भारत की ऊर्जा मांग से नया आकार लेगा वैश्विक बाजार : रोसनेफ्ट प्रमुख
प्रकाशित: 08-06-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
सेंट पीटर्सबर्ग (रूस), (भाषा)। रूस की पेट्रोलियम कंपनी रोसनेफ्ट के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) इगोर सेचिन ने कहा है कि अगले एक दशक में वैश्विक तेल मांग में होने वाली वृद्धि का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा भारत से आएगा, जबकि वैश्विक बिजली खपत में वृद्धि का 15 प्रतिशत योगदान भी भारत का होगा। इससे भारत दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा बाजारों में से एक बन जाएगा।
सेंट पीटर्सबर्ग अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंच (एसपीआईईएफ) को संबोधित करते हुए सेचिन ने कहा कि वर्ष 2035 तक भारत की कच्चे तेल की खपत 44 प्रतिशत बढ़कर लगभग 80 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच सकती है। वहीं बिजली की मांग में करीब 80 प्रतिशत की वृद्धि होगी और इसके लगभग 3,000 टेरावाट-घंटे तक पहुंचने का अनुमान है, जो वर्तमान में यूरोपीय संघ की बिजली खपत के स्तर के करीब होगा।
उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था आज वैश्विक ऊर्जा खपत वृद्धि में प्रमुख भूमिका निभा रही है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के अनुमान के अनुसार, अगले दस साल में वैश्विक बिजली मांग में होने वाली वृद्धि का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा भारत से आएगा। इसी अवधि में वैश्विक तेल मांग वृद्धि का लगभग आधा योगदान भी भारत का होगा। हालांकि, सेचिन ने चेताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ा तनाव और व्यापक भू-राजनीतिक संघर्ष भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की आयातित ऊर्जा पर बढ़ती निर्भरता को देखते हुए इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का व्यवधान भारतीय अर्थव्यवस्था की आवश्यकताओं की पूर्ति को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने बताया कि होर्मुज क्षेत्र में तनाव का असर केवल तेल और गैस बाजारों तक सीमित नहीं है, बल्कि उर्वरक आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है, जिससे खाद्य कीमतों में वृद्धि का खतरा बढ़ेगा। भारत, अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया इसके प्रति सबसे अधिक संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल हैं। हालांकि, उन्होंने साथ ही कहा कि रूस को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से अलग नहीं किया जा सकता है। उनके अनुसार, इस वर्ष उर्वरकों की कीमतों में पहले ही उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। उन्होंने दावा किया कि रूस की चीन और भारत के साथ ऊर्जा साझेदारी दोनों देशों को स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करती है। अप्रैल, 2022 से अब तक रूसी तेल आपूर्ति से भारत और चीन को संयुक्त रूप से 40 अरब डॉलर से अधिक का आर्थिक लाभ हुआ है। उन्होंने बताया कि 2022 के बाद से रोसनेफ्ट ने भारत के साथ अपने संबंधों को और मजबूत किया है। कंपनी भारत को कच्चे तेल की प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हो गई है। रोसनेफ्ट की नायरा एनर्जी में 49.13 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो गुजरात में दो करोड़ टन सालाना क्षमता वाली रिफाइनरी और देशव्यापी ईंधन खुदरा नेटवर्क का संचालन करती है। भारतीय कंपनियां रूस के तेल और गैस क्षेत्रों में भी रोसनेफ्ट की
साझेदार हैं।
सेचिन ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था वर्तमान में प्रतिबंधों, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, बढ़ते ठ्ठण और पारंपरिक ऊर्जा क्षेत्र में कम निवेश जैसी चुनौतियों के कारण बढ़ते रणनीतिक जोखिमों के दौर में प्रवेश कर रही है। उनका मानना है कि तेल और गैस उत्पादन में अपर्याप्त निवेश तथा कृत्रिम मेधा (एआई) और डेटा सेंटर से बढ़ती बिजली मांग भविष्य में ऊर्जा और बिजली आपूर्ति की कमी पैदा कर सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि व्यापार पर बढ़ते प्रतिबंध और आर्थिक प्रतिबंधों का बढ़ता उपयोग वैश्विक अर्थव्यवस्था को खंडित कर रहा है। सेचिन के अनुसार, चीन वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के लिए सबसे बेहतर तैयार प्रमुख अर्थव्यवस्था है, क्योंकि उसने बिजली उत्पादन, ग्रिड, ऊर्जा भंडारण और परिवहन अवसंरचना में बड़े पैमाने पर निवेश किया है। उन्होंने कहा कि चीन ने ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने और बिजली की कीमतों को प्रतिस्पर्धी रखने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार के साथ-साथ कोयला और परमाणु ऊर्जा में भी निवेश जारी रखा है। उन्होंने कहा कि रूस वैश्विक ऊर्जा बाजार का एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता बना रहेगा और बढ़ती वैश्विक ऊर्जा मांग को पूरा करने के लिए भारत और चीन जैसे बड़े उपभोक्ता देशों को स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करना आवश्यक होगा।
सेंट पीटर्सबर्ग अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंच (एसपीआईईएफ) को संबोधित करते हुए सेचिन ने कहा कि वर्ष 2035 तक भारत की कच्चे तेल की खपत 44 प्रतिशत बढ़कर लगभग 80 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच सकती है। वहीं बिजली की मांग में करीब 80 प्रतिशत की वृद्धि होगी और इसके लगभग 3,000 टेरावाट-घंटे तक पहुंचने का अनुमान है, जो वर्तमान में यूरोपीय संघ की बिजली खपत के स्तर के करीब होगा।
उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था आज वैश्विक ऊर्जा खपत वृद्धि में प्रमुख भूमिका निभा रही है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के अनुमान के अनुसार, अगले दस साल में वैश्विक बिजली मांग में होने वाली वृद्धि का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा भारत से आएगा। इसी अवधि में वैश्विक तेल मांग वृद्धि का लगभग आधा योगदान भी भारत का होगा। हालांकि, सेचिन ने चेताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ा तनाव और व्यापक भू-राजनीतिक संघर्ष भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की आयातित ऊर्जा पर बढ़ती निर्भरता को देखते हुए इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का व्यवधान भारतीय अर्थव्यवस्था की आवश्यकताओं की पूर्ति को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने बताया कि होर्मुज क्षेत्र में तनाव का असर केवल तेल और गैस बाजारों तक सीमित नहीं है, बल्कि उर्वरक आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है, जिससे खाद्य कीमतों में वृद्धि का खतरा बढ़ेगा। भारत, अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया इसके प्रति सबसे अधिक संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल हैं। हालांकि, उन्होंने साथ ही कहा कि रूस को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से अलग नहीं किया जा सकता है। उनके अनुसार, इस वर्ष उर्वरकों की कीमतों में पहले ही उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। उन्होंने दावा किया कि रूस की चीन और भारत के साथ ऊर्जा साझेदारी दोनों देशों को स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करती है। अप्रैल, 2022 से अब तक रूसी तेल आपूर्ति से भारत और चीन को संयुक्त रूप से 40 अरब डॉलर से अधिक का आर्थिक लाभ हुआ है। उन्होंने बताया कि 2022 के बाद से रोसनेफ्ट ने भारत के साथ अपने संबंधों को और मजबूत किया है। कंपनी भारत को कच्चे तेल की प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हो गई है। रोसनेफ्ट की नायरा एनर्जी में 49.13 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो गुजरात में दो करोड़ टन सालाना क्षमता वाली रिफाइनरी और देशव्यापी ईंधन खुदरा नेटवर्क का संचालन करती है। भारतीय कंपनियां रूस के तेल और गैस क्षेत्रों में भी रोसनेफ्ट की
साझेदार हैं।
सेचिन ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था वर्तमान में प्रतिबंधों, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, बढ़ते ठ्ठण और पारंपरिक ऊर्जा क्षेत्र में कम निवेश जैसी चुनौतियों के कारण बढ़ते रणनीतिक जोखिमों के दौर में प्रवेश कर रही है। उनका मानना है कि तेल और गैस उत्पादन में अपर्याप्त निवेश तथा कृत्रिम मेधा (एआई) और डेटा सेंटर से बढ़ती बिजली मांग भविष्य में ऊर्जा और बिजली आपूर्ति की कमी पैदा कर सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि व्यापार पर बढ़ते प्रतिबंध और आर्थिक प्रतिबंधों का बढ़ता उपयोग वैश्विक अर्थव्यवस्था को खंडित कर रहा है। सेचिन के अनुसार, चीन वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के लिए सबसे बेहतर तैयार प्रमुख अर्थव्यवस्था है, क्योंकि उसने बिजली उत्पादन, ग्रिड, ऊर्जा भंडारण और परिवहन अवसंरचना में बड़े पैमाने पर निवेश किया है। उन्होंने कहा कि चीन ने ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने और बिजली की कीमतों को प्रतिस्पर्धी रखने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार के साथ-साथ कोयला और परमाणु ऊर्जा में भी निवेश जारी रखा है। उन्होंने कहा कि रूस वैश्विक ऊर्जा बाजार का एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता बना रहेगा और बढ़ती वैश्विक ऊर्जा मांग को पूरा करने के लिए भारत और चीन जैसे बड़े उपभोक्ता देशों को स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करना आवश्यक होगा।