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दिल्ली में कारोबार को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए ऐतिहासिक कदम

प्रकाशित: 06-08-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
वीर अर्जुन संवाददाता
नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में ‘दिल्ली ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल, 2026' के मसौदे पर विचार किया गया। इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य दिल्ली को देश में उद्यम स्थापित करने और संचालित करने के लिए सबसे आसान स्थान बनाने की दिशा में व्यापक सुधार लागू करना है। इसके माध्यम से कारोबार शुरू करने और संचालित करने से जुड़ी मौजूदा जटिल प्रािढयाओं को सरल, पारदर्शी, समयबद्ध और तकनीक आधारित बनाया जाएगा।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार का लक्ष्य ऐसा प्रशासन स्थापित करना है, जहां उद्यमियों और निवेशकों का समय सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने में नहीं, बल्कि अपने कारोबार को आगे बढ़ाने में लगे। सरकार ऐसी व्यवस्था विकसित कर रही है, जिसमें मंजूरियां आसान हों, प्रािढयाएं स्पष्ट हों, निर्णय तय समय सीमा के भीतर लिए जाएं और अनावश्यक अनुपालन की बाधाएं समाप्त हों। इससे दिल्ली में नए निवेश को बढ़ावा मिलेगा, उद्योगों का विस्तार होगा और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि यह प्रस्तावित कानून भारत सरकार के अनुपालन में कमी और विनियमन-मुक्ति पहल के तहत तैयार किया गया है। यह जन विश्वास विधेयक, 2023 की भावना के अनुरूप है। दिल्ली सरकार भी अब उद्योगों और निवेशकों के लिए एक आधुनिक, पारदर्शी और निवेश-अनुकूल व्यवस्था विकसित करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम उठा रही है।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कानून के अंतर्गत कारोबार से जुड़ी विभिन्न मंजूरियां, पंजीकरण, लाइसेंस, एनओसी और अन्य अनुमतियों के लिए अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने की आवश्यकता समाप्त होगी। इसके लिए सिंगल विंडो सिस्टम स्थापित किया जाएगा, जिसके माध्यम से एक ही ऑनलाइन पोर्टल पर अधिकांश व्यावसायिक सेवाएं उपलब्ध होंगी। भवन निर्माण स्वीकृति, फैक्टरी लाइसेंस, फायर क्लीयरेंस, पानी, सीवर और बिजली कनेक्शन, रेरा पंजीकरण, सहकारी समितियों के पंजीकरण सहित अनेक सेवाएं इसी पोर्टल के माध्यम से तय समय सीमा के भीतर उपलब्ध कराई जाएंगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस पूरी व्यवस्था के संचालन की जिम्मेदारी दिल्ली स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (डीएसआईआईडीसी) को सौंपी जाएगी। यही संस्था आवेदन प्राप्त होने से लेकर अंतिम स्वीकृति मिलने तक पूरी प्रािढया के लिए एकमात्र जवाबदेह नोडल एजेंसी होगी तथा सभी संबंधित विभाग और नागरिक एजेंसियां इसके माध्यम से समन्वय स्थापित करेंगी। इस कानून की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक ‘डीम्ड अप्रूवल' की व्यवस्था होगी। यदि कोई सक्षम प्राधिकारी निर्धारित समय सीमा के भीतर किसी आवेदन पर निर्णय नहीं लेता है तो संबंधित स्वीकृति, पंजीकरण या एनओसी स्वत स्वीकृत मानी जाएगी और आवेदक उसे सीधे ऑनलाइन पोर्टल से डाउनलोड भी कर सकेगा। इससे फाइलों के अनावश्यक लंबित रहने और निर्णय में होने वाली देरी समाप्त होगी।
उन्होंने कहा कि कम जोखिम वाली गतिविधियों के लिए सेल्फ सर्टिफिकेशन की व्यवस्था लागू की जाएगी। निर्धारित श्रेणियों के अंतर्गत अग्नि सुरक्षा, भवन योजना स्वीकृति, प्रदूषण संबंधी अनुमति तथा लो-टेंशन बिजली कनेक्शन जैसी प्रािढयाएं स्वयं घोषणा के आधार पर पूरी की जा सकेंगी। इससे छोटे, कम जोखिम वाले और कम खतरे वाले उद्यम बिना अनावश्यक देरी के अपना कारोबार शुरू कर सकेंगे। जिन उद्यमों का पहले से जीएसटी, एफएसएसएआई, एमएसएमईडी अधिनियम अथवा लेबर कोड्स के तहत पंजीकरण है, उन्हें अलग से ट्रेड लाइसेंस, हेल्थ ट्रेड लाइसेंस, ईटिंग हाउस लाइसेंस या शॉप्स एंड एस्टैब्लिशमेंट पंजीकरण लेने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे एक ही उद्देश्य के लिए कई प्रकार के लाइसेंस लेने की बाध्यता समाप्त होगी और कारोबारियों पर अनुपालन का बोझ कम होगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता कहा कि नए पंजीकरण के बाद सामान्य परिस्थितियों में तीन वर्षों तक किसी प्रकार का नियमित निरीक्षण नहीं किया जाएगा। केवल गंभीर प्रकृति की शिकायत मिलने पर ही निरीक्षण किया जा सकेगा।