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राजधानी को ‘ट्रांजिट सिटी' से ‘डेस्टिनेशन सिटी' बनाने की दिशा में दिल्ली सरकार का बड़ा कदम

प्रकाशित: 12-08-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
वीर अर्जुन संवाददाता
नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने मंगलवार को अक्षरधाम मंदिर में आयोजित ‘स्पिरिचुअल एंड हेरिटेज टूरिज्म कॉन्क्लेव-2026' में भागीदारी की। ‘दिल्ली: द कैपिटल ऑफ स्पिरिचुअलिटी, हेरिटेज एंड एक्सपीरियंसेज' थीम पर आयोजित सम्मेलन का उद्देश्य दिल्ली की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को एकीकृत टूरिज्म एक्सपीरियंस के रूप में देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करना और राजधानी को ‘ट्रांजिट सिटी' से ‘डेस्टिनेशन सिटी' के रूप में विकसित करना है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने दिल्ली के चार स्पिरिचुअल और हेरिटेज टूरिज्म सर्किट्स का शुभारंभ किया। आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव जी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
इन चार सर्किट्स के जरिए दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में स्थित धार्मिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों को एक यात्रा अनुभव के रूप में जोड़ा गया है। सरकार का लक्ष्य है कि दिल्ली आने वाले पर्यटक केवल कुछ प्रमुख स्मारकों को देखकर वापस न लौटें, बल्कि राजधानी की विविध आस्था, इतिहास, वास्तुकला, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं को करीब से अनुभव करें और यहां अधिक समय बिताएं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली को केवल कुछ प्रसिद्ध स्मारकों तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। यह भारत की विविध संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत प्रतिबिंब है। इंद्रप्रस्थ से लेकर विभिन्न ऐतिहासिक कालखंडों तक दिल्ली ने भारत के इतिहास को अपने भीतर संजोया है और राजधानी का प्रत्येक क्षेत्र अपने भीतर कोई न कोई कहानी, परंपरा और विरासत समेटे हुए है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की पहचान केवल लाल किला, पुराना किला और हुमायूं के मकबरे जैसे ऐतिहासिक स्मारकों तक सीमित नहीं है। यहां अक्षरधाम जैसे विश्वस्तरीय आध्यात्मिक एवं वास्तुशिल्प स्थल हैं, वहीं मंदिरों, गुरुद्वारों, चर्चों, मस्जिदों, बौद्ध और जैन धार्मिक स्थलों की समृद्ध परंपरा भी मौजूद है। दिल्ली की सबसे बड़ी खूबसूरती इसकी विविधता में एकता है।
देश के लगभग हर राज्य के लोग दिल्ली में रहते हैं और अपनी संस्कृति, परंपराओं एवं त्योहारों को यहां जीवंत रखते हैं। गुजरात का गरबा, महाराष्ट्र की गणेश चतुर्थी, असम का बिहू, दक्षिण भारत की सांस्कृतिक परंपराएं और उत्तर भारत के त्योहार दिल्ली में पूरे देश की संस्कृति को एक साथ सामने लाते हैं। यही कारण है कि दिल्ली भारत के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक प्रतिबिंब का जीवंत स्वरूप है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इन सर्किट्स का उद्देश्य केवल अलग-अलग टूरिस्ट स्पॉट्स को जोड़ना नहीं, बल्कि दिल्ली को एक कम्प्लीट टूरिज्म एक्सपीरियंस के रूप में विकसित करना है। पर्यटक यहां दिल्ली की आध्यात्मिकता, इतिहास, वास्तुकला, संस्कृति, खान-पान, लोक परंपराओं और विविध आस्थाओं को महसूस कर सकें। सरकार का प्रयास है कि दिल्ली आने वाला पर्यटक केवल कुछ घंटों या एक दिन के लिए यहां न रुके, बल्कि अधिक समय तक ठहरे और राजधानी के अलग-अलग हिस्सों को एक्सप्लोर करे। इससे होटल, रेस्टोरेंट, टूर ऑपरेटर्स, स्थानीय गाइड, कलाकार, कारीगर और छोटे उद्यमियों के लिए रोजगार तथा आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर भी पैदा होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया भारतीय अध्यात्म, योग, शांति और आंतरिक संतुलन की ओर आकर्षित हो रही है। भारत की आध्यात्मिक परंपरा की ग्लोबल स्वीकार्यता दिल्ली के लिए भी एक बड़ा अवसर है। जिस प्रकार लोग काशी विश्वनाथ, महाकाल और देश के अन्य प्रमुख आध्यात्मिक स्थलों के दर्शन के लिए यात्रा करते हैं, उसी प्रकार दिल्ली के आध्यात्मिक और धार्मिक स्थलों को भी देश-दुनिया के पर्यटकों के प्रमुख आकर्षण के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के टूरिज्म डेवलपमेंट में सरकार के साथ-साथ आध्यात्मिक संस्थाओं, होटल एवं हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री, टूर ऑपरेटर्स, स्थानीय व्यवसायों, हेरिटेज ऑर्गनाइजेशंस, एक्सपर्ट्स, कंटेंट ािढएटर्स, ट्रैवल इन्फ्लुएंसर्स और मीडिया की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने सभी से दिल्ली की सकारात्मक कहानियों, संस्कृति, आध्यात्मिकता और विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाने में योगदान देने की अपील की।