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बदजुबानी का परिणाम

प्रकाशित: 05-08-2026 | लेखक: सदानंद पांडे
बदजुबानी का परिणाम
तमिलनाडु की राजनीति के सबसे प्रभावशाली परिवार एवं डीएमके प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री के सुपुत्र पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन को अभिनेत्री तृषा कृष्णन को लेकर द्विअथी टिप्पणी करने और उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाने के आरोप में मंगलवार को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। असल में 3 अगस्त यानि सोमवार को कावेरी मुद्दे पर विपक्ष के नेता के भाषण के दौरान जब भीड़ तृषा, तृषा के नारे लगा रही थी तो डीएमके इस शीर्ष नेता ने अभिनेत्री तृषा कृष्णन के खिलाफ अशोभनीय और दोहरे अर्थ वाली टिप्पणी की। मजे की बात तो यह है कि उदयनिधि के बदजुबानी के बाद सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम यानि टीवीके पाटी के नेता सक्रिय हो गए और उन्होंने पुलिस से लेकर राष्ट्रीय महिला आयोग तक में पूर्व मुख्यमंत्री की शिकायत दर्ज करा दी। डीएमके को स्वाभाविक रूप से बचाव में कहना पड़ा रहा है कि उनके नेता की टिप्पणी को तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया।
सच तो यह है कि उदयनिधि बेहद असभ्य एवं अमर्यादित टिप्पणी के लिए कुख्यात हैं। इसके पहले उन्होंने एक बार नहीं कई बार सनातन धर्म की मलेरिया एवं अन्य बीमारियों से तुलना कर डाली है। उनके इस दुराचरण के खिलाफ सनातन धर्म के समर्थक ने कानूनी कार्रवाई के लिए अदालत भी गए किन्तु चूंकि वह सत्ता से बाहर रहने के बावजूद प्रभावशाली परिवार के हैं, इसलिए उदयनिधि बचते रहे लेकिन इस बार उन्होंने सत्तारूढ़ दल के प्रमुख एवं मुख्यमंत्री विजय से पंगा लिया है क्योंकि तृषा कृष्णन से उनके नजदीकी संबंध हैं, इसीलिए टीवीके के नेता डीएमके नेता को इस बात का एहसास कराना चाहते हैं कि राज्य में स्टेट अथारिटी नाम की भी कोई चीज है और राजनेताओं को इतनी छूट नहीं मिलनी चाहिए कि वह महिलाओं की मर्यादाओं की गरिमा का ध्यान रखना आवश्यक समझे।
बहरहाल उदयनिधि अपनी जहरीली जुबान के लिए जितने कुख्यात हैं, उससे अधिक जनभावनाओं के प्रति निष्ठुरता के लिए भी जाने जाते हैं। जब उदयनिधि राज्य की सत्ता के शिखर पर थे, उस वक्त उनके कई फैसले जनभावनाओं के विरुद्ध थे। राजनीतिक परिवार से संबंध रखने वाले व्यक्ति में इतना अहंकार एवं नकारात्मकता को तमिलनाडु में डीएमके के साथ-साथ कुछ संस्थाएं भी उदयनिधि की बौद्धिकी मानते हैं। यही वजह है कि उन्होंने कभी अपने व्यवहारों का मूल्यांकन करने की जरूरत ही नहीं समझी।
लब्बोलुआब यह है कि लोकतंत्र में विपक्ष का नेता होने का यह कदापि अर्थ नहीं है कि उसको आलोचना के साथ साथ बदजुबानी अथवा अपने प्रतिद्वंदी के अपमान का लाइसेंस मिल गया है। उसे भी जिम्मेदारी की भावना के साथ अपने विचार व्यक्त करने के कर्तव्य का अनुपालन करना चाहिए। उदयनिधि के खिलाफ कार्रवाई बिल्कुल सही है क्योंकि जनतंत्र में जिसके पास जितनी ताकत होती है, उससे उतने ही विनम्रता की उम्मीद की जाती है। उदयनिधि को संवैधानिक पद की गरिमा के अनुकूल अपनी अमर्यादित टिप्पणी के लिए क्षमा मांग लेना चाहिए और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री तथा अभिनेत्री को भी दुर्भावना त्याग कर उदयनिधि की नासमझी वश किए गए उनके अक्षम्य अपराध के लिए क्षमा का देना चाहिए अन्यथा डीएमके राज्य की सत्तारूढ़ पाटी और सरकार के कामों में हमेशा अडंगा डालेगी और इसका परिणाम भुगतेगी राज्य की निर्देष जनता।