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भय बेचने की राजनीति

प्रकाशित: 05-06-2026 | लेखक: सदानंद पांडे
भय बेचने की राजनीति
कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को दावा किया है कि मोदी सरकार मौजूदा आर्थिक स्थिति को लेकर घबराई हुई है और अपने तंत्र के भीतर से ही घिर चुकी है। पाटी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि असली समस्या यह है कि देश में निजी कम्पनियों का निवेश बेहद कम है जबकि कम्पनियों की कमाई रिकार्ड ऊंचाई पर है। उनका आकलन है कि जीडीपी के प्रतिशत के रूप में निजी कंपनियों के निवेश की दर में बहुत गिरावट आई है। मजे की बात तो यह है कि कांग्रेस के यह अर्थशास्त्री नेता इतना भयानक माहौल इस आधार पर बना रहे हैं कि एक मीडिया चैनल ने दावा किया है कि केन्द्र सरकार आयकर अधिनियम में संशोधन करने वाला अध्यादेश जारी करने की योजना बना रही है जिसके तहत विदेशी निवेशकों यानि एफडीआई द्वारा भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों में किए गए निवेश पर लगने वाले 17.5 प्रतिशत दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर को पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाएगा।
दरअसल कांग्रेसी अर्थशास्त्री जयराम रमेश ने अपनी डर बेचने की दुकान को चमकाने के लिए एक मीडिया टीवी चैनल की रिपोर्ट को आधार बना तो लिया किन्तु उन्होंने ऐसा कोई तार्किक आधार नहीं दिया जिससे कि उनकी बातों पर भरोसा किया जा सके। आयकर अधिनियम में बदलाव की बात कहां से आ गई? समझ से बाहर की बात तो यह है कि एक केन्द्राrय मंत्री रह चुके व्यक्ति को या तो सूचना का कोई ठोस आधार देना होता है या फिर विमर्श स्थापित करने के लिए कुछ ऐsसे तर्क देने पड़ते हैं जो भले ही गलत हों किन्तु वे लगें बिल्कुल सच।
वास्तविकता तो यह है कि जयराम की पाटी बिल्कुल वामपंथी अवतार में है। इसलिए वह ऐसा दावा करने से पहले कि सरकार पूंजीगत लाभ कर को समाप्त करने जा रही है, यह नहीं सोचा कि कोई भी सरकार इस वक्त ऐसा कुछ भी करने का खतरा नहीं ले सकती जिससे राजकोषीय घाटा बढ़े। जयराम को इस बात से बहुत एतराज है कि देश की कंपनियां लाभ तो खूब कमा रही हैं किन्तु देश में पूंजी निवेश नहीं कर रही हैं। सच तो यह है कि जयराम रमेश जैसे कुछ अर्थशास्त्रियों ने डर का जो अपना शोरूम सजा रखा है उस पर भरोसा करने वालों की लगातार संख्या कम हो रही है। सांख्यकीय और तार्किक आधार दिए बिना आंय-बांय-सांय बोलने से कोई भारतीय अर्थव्यवस्था के कमजोर होने का अनुमान नहीं लगा रहा है। जो बात जयराम रमेश जानते हुए भी छिपा रहे हैं वह यह है कि भारतीय कम्पनियां इस वक्त देश के रक्षा उत्पादन, ऊर्जा क्षेत्र, सड़क निर्माण, रेलवे लाइन, एयरपोर्ट और बंदरगाह निर्माण में पूंजी निवेश नहीं बल्कि पूंजी झोंक रहे हैं। उक्त क्षेत्रों में सरकार कम और निजी कंपनियां ज्यादा पूंजी लगा रही हैं। यही कारण है कि कुछ ही दिनों में भारतीय निजी कंपनियां निर्माण के क्षेत्र में चीन, साउथ कोरिया, जापान, ब्रिटेन और जर्मनी की कंपनियों से आगे निकल चुकी हैं। अब चूंकि पाटी की वामपंथी विचारधारा की एसओपी के तहत ही बोलना भी है और सरकार की आलोचना भी करनी है इसीलिए एक अर्थशास्त्री जयराम रमेश तथ्यों से खिलवाड़ कर रहे हैं जो मात्र राजनीतिक उद्देश्य के लिए अर्थशास्त्र के प्रति अनिभिज्ञता एवं अनिच्छा रखने वालों को बहकाया जा सके। सच यह है कि कुछ अंतर्राष्ट्रीय अस्थाई बाधाओं के कारण मुद्रास्फीति को बढ़ावा मिला किन्तु अर्थव्यवस्था कदापि कमजोर नहीं हुई है।