वर्षों से राष्ट्र की सेवा में समर्पित Virarjun अर्जुनस्य प्रतिज्ञे द्वे, न दैन्यं, न पलायनम् ।

सुखबीर बादल पर हमला

प्रकाशित: 14-08-2026 | लेखक: सदानंद पांडे
सुखबीर बादल पर हमला
शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख एवं पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल पर बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र के नांदेड़ में स्थित तख्त श्री हजूर साहिब गुरुद्वारे में एक निहंग ने कृपाण से हमला करके उन्हें घायल कर दिया। श्री बादल को चोट हाथ में ही लगी जबकि हमलावर कृपाण उनकी छाती में घुसाना चाहता था। पंजाब के शीर्ष राजनीतिक परिवारों में से एक सुखबीर बादल पर यह दूसरी बार हमला हुआ है। इसके पहले दिसम्बर 2024 में बब्बर खालसा इण्टरनेशनल के एक पूर्व आतंकी नारायण सिंह चौरा ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के प्रवेश द्वार पर ही श्री बादल पर गोली चलाकर हत्या का प्रयास किया था किन्तु मौके पर मौजूद लोगों ने हमलावर को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया था। मतलब यह कि पूर्व उपमुख्यमंत्री दोनों बार संयोग से ही बचे अन्यथा उनकी हत्या के पूरे इंतजाम विरोधियों ने तो कर ही दिए थे।
यह सच है कि बादल परिवार पंजाब की राजनीति में लम्बे समय तक सत्ता में रहा है। सुखबीर सिंह बादल के पिता प्रकाश सिंह बादल ने पंजाब के मुख्यमंत्री के रूप में 5 बार शपथ ली थी। उनके अंतिम दिनों में सुखबीर ही राज्य का शासन चला रहे थे। बादल परिवार के शुभ चिंतकों की संख्या स्वाभाविक रूप से बहुत ज्यादा है किन्तु साथ ही साथ विरोधियों की संख्या भी कम नहीं है। कोई भी व्यक्ति सत्ता में रहते सभी को संतुष्ट नहीं कर सकता। पंजाब तो एक दशक से ज्यादा अवधि तक उग्रवाद से पीड़ित राज्य रहा है। उग्रवादी संगठनों के निशाने पर यह बादल परिवार हमेशा ही रहा है किन्तु उग्रवादी उन्हें मारने में सफल नहीं हो पाए थे। बृहस्पतिवार को हुए हमले की वास्तविकता तो पुलिस जांच के बाद ही सामने आ पाएगी किन्तु एक बात तो निश्चित है कि कोई उग्रवादी संगठन सुखबीर बादल को खत्म करना चाहता है और वह अवसर की तलाश में रहता है।
मुश्किल यह है कि तमाम उग्रवादी संगठनों के आका विदेशों में बैठे हैं। वे वहीं से अपने गुर्गें को अपराध करने का निर्देश देते हैं। यही कारण है कि उन्हें आसानी से पकड़ पाना संभव नहीं है। पंजाब पुलिस और केन्द्राrय गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाली इंटेलीजेंस ब्यूरो के प्रयासों से उग्रवादियों को पकड़ा भी जाता है किन्तु उन्हें समूल नष्ट कर पाना आसान नहीं है। फिर भी पंजाब पुलिस और आईबी के कारण पंजाब में काफी शान्ति है। यही शान्ति तो सिख उग्रवाद के तमाम संगठनों को अच्छी नहीं लगती। इसीलिए वे येन केन प्रकारेण एक बार फिर पंजाब में बारूदी माहौल बनाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं। कल्पना कीजिए यदि नांदेड़ के इस हमले की घटना में सुखबीर बादल को ‘कुछ' हो जाता तो पहली बात यह होती कि पंजाब में अमन-चैन को आग लग जाती और इसी के साथ उग्रवादी इसे अपनी जीत मानकर तमाम उदारवादी सिख नेताआंs को शिकार बनाते।
बहरहाल पंजाब के बाद उग्रवादियों का ठिकाना महाराष्ट्र के गुरुद्वारे ही बने थे। 1980 के दशक में जब केपीएस गिल के दबाव में उग्रवादियों ने पंजाब छोड़ा तो उन्होंने महाराष्ट्र में जाकर पंजाब के सिखों से ही उगाही की और जो उनकी मांग पूरी नहीं करता था उन सिखों को वह मारते थे। इसलिए सुखबीर बादल को भी सतर्कता बरतने की जरूरत थी। एक वीआईपी होने के कारण अपनी सुरक्षा के प्रति संवेदनशील एवं सतर्क रहने की जरूरत थी। यदि उनकी यात्रा विशेष सुरक्षा का कवर जिसमें राज्य पुलिस एवं इंटेलीजेंस शामिल होते तो यह अप्रिय प्रयास न होता। फिर भी खैर मनाएं कि सुखबीर बादल खतरे से बाहर हैं।