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प्रतिबंध जहरीले मांझे से पतंगबाजी जानलेवा

प्रकाशित: 14-08-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
भारत के स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त पर देशभर में पतंगबाजी का उत्साह चरम पर पहुंच जाता है। विशेष रूप से दिल्ली, जयपुर, अहमदाबाद, लखनऊ, भोपाल, हैदराबाद और अन्य बड़े शहरों में लाखों युवा पतंगबाजी का आनंद लेते हुए अपनी खुशियों का इजहार करते हैं। लेकिन देश की युवा पतंगबाजी को और रोमांस कार्य बनाने के लिए चाइनीज मांझा का इस्तेमाल करते हैं, जो ना केवल जानलेवा है बल्कि प्रतिबंध भी है। इसे नायलॉन, प्लास्टिक, धातु के महीन कणों और रासायनिक पदार्थों से तैयार किया जाता है और इसकी धार इतनी तेज होती है कि यह गर्दन, हाथ, चेहरे और शरीर के अन्य हिस्सों को गंभीर रूप से काट सकती है। हर वर्ष देश के विभिन्न हिस्सों से ऐसी घटनाएं सामने आती हैं जिनमें दोपहिया वाहन चालक चलते समय मांझे की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। कई मामलों में गर्दन कटने से लोगों की मृत्यु तक हो चुकी है। क्षेत्रीय शासन प्रशासन इसकी पी पर निगरानी रखी जाए ताकि इसकी पी को रोका जा सके ताकि इंसान और पक्षियों को कम से कम नुकसान हो।सड़क पर चल रहे बाइक सवार, स्कूटी चालक और साइकिल सवार सबसे अधिक प्रभावित होते हैं क्योंकि तेज गति में दिखाई न देने वाला मांझा अचानक उनके संपर्क में आ जाता है। कई बार बिजली के तारों में मांझा उलझने से शॉर्ट सर्किट, बिजली आपूर्ति बाधित होने और आग लगने की घटनाएं भी होती हैं। इस समस्या का सबसे दर्दनाक पहलू पक्षियों और जानवरों पर पड़ने वाला प्रभाव है। पतंगों के कटे हुए मांझे पेड़ों, बिजली के तारों और इमारतों पर फंस जाते हैं। कबूतर, चील, तोता, कौआ और अन्य पक्षी उड़ते समय इन धागों में उलझ जाते हैं, जिससे उनके पंख कट जाते हैं या वे गंभीर रूप से घायल होकर मर जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट और अन्य न्यायिक संस्थाओं के निर्देशों की भावना यह रही है कि नागरिकों के जीवन और पर्यावरण की सुरक्षा सर्वोपरि है। अदालतों ने सरकारों को जन जागरूकता अभियान चलाने, बाजारों में नियमित छापेमारी करने, ऑनलाइन पी पर निगरानी रखने और दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने की सलाह दी है।
कई राज्यों में चाइनीज मांझा बेचने वालों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जाते हैं और पर्यावरण कानूनों के तहत कार्रवाई की जाती है। इस समस्या का समाधान केवल प्रतिबंध लगाने से नहीं होगा, बल्कि व्यापक सामाजिक जागरूकता की भी आवश्यकता है। स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संगठनों को बच्चों और युवाओं को यह समझाना होगा कि सस्ता और चमकदार दिखने वाला चाइनीज मांझा किसी की जान ले सकता है। अभिभावकों को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके बच्चे केवल सूती और पर्यावरण अनुकूल धागे का ही उपयोग करें। मीडिया, सोशल मीडिया और स्थानीय प्रशासन को मिलकर जागरूकता अभियान चलाने चाहिए ताकि लोगों को इसके खतरों की जानकारी मिल सके।
स्वतंत्रता दिवस का पर्व देशभक्ति, उत्साह और आनंद का प्रतीक है। यह उत्सव किसी व्यक्ति, बच्चे, पक्षी या पशु के लिए मौत और पीड़ा का कारण नहीं बनना चाहिए।
-वीरेंद्र कुमार जाटव,
नई दिल्ली।