वर्षों से राष्ट्र की सेवा में समर्पित Virarjun अर्जुनस्य प्रतिज्ञे द्वे, न दैन्यं, न पलायनम् ।

तपते शहर, बदलती दिनचर्या और राहत की तलाश में आमजन

प्रकाशित: 22-04-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
उत्तर भारत से लेकर पश्चिम और मध्य भारत तक इन दिनों गर्मी ने अपना विकराल रूप दिखाना शुरू कर दिया है। तापमान लगातार नए रिकॉर्ड की ओर बढ़ रहा है और आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। सड़कों पर निकलना मुश्किल हो गया है, हवा में तपिश घुली हुई है और दोपहर का समय तो जैसे आग उगलता प्रतीत होता है। हालात ऐसे हैं कि लोग जरूरी कामों के अलावा घर से बाहर निकलने से बच रहे हैं। जो निकल भी रहे हैं, वे छाता, गमछा या कपड़े से खुद को ढककर ही बाहर कदम रख रहे हैं। बच्चे, बुजुर्ग और मजदूर वर्ग इस भीषण गर्मी की सबसे ज्यादा मार झेल रहे हैं। लखनऊ में तापमान 41 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। मौसम विभाग के अनुसार यह सामान्य से कई डिग्री अधिक है, जिससे गर्मी की तीव्रता और भी अधिक महसूस हो रही है। स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है ताकि बच्चों को दोपहर की तेज धूप से बचाया जा सके। अब स्कूल सुबह जल्दी शुरू होकर दोपहर 12ः30 बजे तक बंद हो जा रहे हैं। इसके बावजूद जब बच्चे स्कूल से घर लौटते हैं, तब तक सूरज अपनी पूरी तपिश के साथ मौजूद रहता है और उन्हें परेशानी झेलनी पड़ती है। कई बच्चे थकान, पसीना और चक्कर जैसी समस्याओं से जूझते दिखाई दे रहे हैं। सिर्फ लखनऊ ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी हालात कुछ ऐसे ही बने हुए हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक तापमान में कोई खास गिरावट की संभावना नहीं है। प्रदेश के कई इलाकों में लू चलने के आसार हैं, जो लोगों के लिए और भी खतरनाक साबित हो सकती है। गर्म हवाओं के थपेड़े दिन के साथ-साथ रात में भी राहत नहीं दे रहे हैं, जिससे लोगों की नींद और स्वास्थ्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं। देश के अन्य हिस्सों में भी गर्मी का यही हाल है। राजस्थान के कई शहरों में तापमान 40 डिग्री से ऊपर पहुंच चुका है और कुछ जगहों पर यह 45 डिग्री तक जाने की आशंका जताई जा रही है। कोटा जैसे शहरों में पारा 42 डिग्री तक पहुंच चुका है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। दिन और रात के तापमान में भारी अंतर भी देखा जा रहा है, जो स्वास्थ्य के लिए अनुकूल नहीं है। वहीं, गुजरात में भी गर्मी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में हैं। अस्पतालों में ’हीटवार्ड’ बनाए गए हैं ताकि लू के मरीजों का तुरंत इलाज किया जा सके। डिहाइड्रेशन के मामलों को देखते हुए ओआरएस कॉर्नर भी स्थापित किए गए हैं, जहां लोगों को मुफ्त में ओआरएस उपलब्ध कराया जा रहा है। यह कदम इस बात का संकेत है कि प्रशासन गर्मी की गंभीरता को समझते हुए पहले से तैयारी कर रहा है। हालांकि देश के कुछ हिस्सों में स्थिति अलग भी है। पूर्वोत्तर भारत में प्री-मानसून गतिविधियां तेज हो गई हैं और गुवाहाटी में भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। यह स्थिति बताती है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का मिजाज कितना भिन्न हो सकता है-कहीं लोग तपती गर्मी से जूझ रहे हैं तो कहीं बारिश और बाढ़ से। इस भीषण गर्मी का असर सिर्फ दैनिक जीवन पर ही नहीं, बल्कि धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों पर भी पड़ रहा है।
-कांतिलाल मांडोत,
सूरत, गुजरात।