पृथ्वी पर हरियाली तो जीवन में खुशहाली
प्रकाशित: 22-04-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
पृथ्वी दिवस हर साल 22 अप्रैल को मनाया जाता है। इसकी स्थापना अमेरिकी सीनेटर जेराल्ड नेल्सन द्वारा 1970 में एक पर्यावरण शिक्षा के रूप में की गयी और अब इसे 192 से अधिक देशों में प्रति वर्ष मनाया जाता है। पृथ्वी दिवस 2026 की थीम हमारी शक्ति, हमारा ग्रह है। पृथ्वी दिवस पर पृथ्वी से जुड़ी चुनौतियों जैसे, क्लाइमेट चेंज, ग्लोबल वार्मिंग, प्रदूषण पर चर्चाएं की जाती हैं। यह थीम जलवायु परिवर्तन और हमारे पर्यावरण के दुरुपयोग से निपटने के लिए और पर्यावरण के लिए जागरूकता फैलाने पर आधारित है। यह दिवस हम इसलिए मनाते है ताकि पृथ्वी साफ सुथरी हो और मानव सुखपूर्वक पृथ्वी पर अपना जीवन यापन कर सके। लगभग हर दिवस के पीछे मानव कल्याण की भावना रहती है। पृथ्वी दिवस भी इससे अछूता नहीं है। कहते है पृथ्वी संरक्षित होगी तो मानव जीवन भी सुरक्षित होगा। पर्यावरण विशेषज्ञों के मुताबिक लॉकडाउन पृथ्वी के लिए वरदान साबित हुआ। जिसका सकारात्मक परिणाम धरती पर साफ नजर आया । लॉकडाउन के चलते धरती का कंपन 30 से 50 प्रतिशत तक कम हुआ। यातायत, मशीन, ध्वनि, वायु और जल प्रदूषण सहित सड़क दुर्घटनाएं आदि कम हुई। इसके अलावा ओजोन परत में सुधार, प्रदूषण और नदियों के स्तर पर व्यापक सुधार होने से पृथ्वी को बहुत लाभ हुआ है। पेड़ पौधे खिलखिला उठे। प्रकृति ज्यादा साफ-सुथरी, खिली-खिली और अधिक महकी-महकी नजर आने लगी थी। मगर लोक डाउन के समाप्त होते ही हमने अपनी रोजमर्रा की गतिविधियां शुरू करदी और पृथ्वी पर एक बार फिर घाव नजर आने लगे। आबोहवा खराब होने लगी। जन्म से मरण तक हम पृथ्वी की गोद में रहते है। यह धरती हमें क्या नहीं देती। आज हमारी धरती अपना प्राकृतिक रूप खोती जा रही है। जहाँ देखों वहाँ कूड़े के ढेर व बेतरतीब फैले कचरे ने इसके सौंदर्य को नष्ट कर दिया है। विश्व में बढ़ती जनसंख्या, औद्योगीकरण एवं शहरीकरण में तेजी से वृध्दि के साथ-साथ ठोस अपशिष्ट पदार्थों द्वारा उत्पन्न पर्यावरण प्रदूषण की समस्या भी विकराल होती जा रही है। पृथ्वी अनमोल है। इसी पर आकाश है, जल, अग्नि, और हवा है। इन सबके मेल से सुंदर प्रकृति है।
-बाल मुकुंद ओझा,
जयपुर, राजस्थान।
-बाल मुकुंद ओझा,
जयपुर, राजस्थान।