वर्षों से राष्ट्र की सेवा में समर्पित Virarjun अर्जुनस्य प्रतिज्ञे द्वे, न दैन्यं, न पलायनम् ।

दुर्लभ प्रतिभा के धनी मोहनलाल दादासाहेब्ेब फाल्के पुरुरस्कार से सम्मन्नित

प्रकाशित: 25-09-2025 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
दुर्लभ प्रतिभा के धनी मोहनलाल दादासाहेब्ेब फाल्के पुरुरस्कार से सम्मन्नित
तेवर/फिल्मी व एलान्थूर, ि़जला कोलम (अब ि़जला पतनमतिट्टा) में केरल सरकार में विधि सचिव रहे विश्वनाथन नायर और उनकी पत्नी शांता वुमारी के घर में जब 21 मईं 1960 को उनकी सबसे छोटी संतान ने जन्म लिया, तो बच्चे के मामा गोपीनाथन नायर ने उसका नाम रोशनलाल रखना चाहा, लेकिन बाद में पैसला यह किया गया कि नाम मोहनलाल विश्वनाथन नायर रखा जाये। बहरहाल, पिता की ि़जद थी कि वह अपने बेटे को जातिसूचक सरनेम (नायर) नहीं देंगे, इसलिए मोहनलाल विश्वनाथन नाम रखा गया।

वर्ष 1977 व 1978 में केरल राज्य के वुश्ती चैंपियन ने जब 18 साल की आयु में मलयालम फिल्मों में कदम रखा, तो उन्होंने अपने नाम को अतिरित्त संक्षिप्त किया और वह दुनियाभर में केवल मोहनलाल के नाम से विख्यात हुए।

निर्माता, निर्देशक व एक्टर मोहनलाल की निाितरूप से भारत के सबसे महान अभिनेताओं में गिनती की जाती है। उनकी स्वभाविक अभिनय शैली दुर्लभ है, इसलिए अधिकतर दिग्गज निर्देशकों की वह पहली पसंद रहते हैं। वह किरदार के अंदर की उत्तेजना को संतुलित वास्तविकता के साथ प्रस्तुत करने में माहिर हैं। चरित्र की गहराईं को समझने की उनमें ़ग़जब की काबलियत है। मसलन, ‘वानाप्रस्तम’

में वह एक कथकली कलाकार की भूमिका में थे। विशेषज्ञों का मत है कि कथकली का अध्ययन व अभिनय करने के लिए कम से कम आठ साल के अयास की आवश्यकता होती है, लेकिन मोहनलाल ने यह काम मात्र 6 माह के अयास में कर दिखाया और वह भी इस खूबी के साथ कि विख्यात कथकली कलाकार जैसे रमणवुट्टी नायर, कलामंडलम गोपी आदि भी उनकी प्रशंसा करने से खुद को रोक न सके। इसमें कोईं दो राय नहीं हैं कि मोहनलाल भारत के बेहतरीन नर्तकों में से एक हैं और फिल्मों में वह भरतनाटाम व कथक का प्रदर्शन बिना किसी खास प्रशिक्षण के करते हैं। इसलिए ‘वानाप्रस्तम’ के लिए मोहनलाल को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अतिरित्त भी उनके पास चार अन्य राष्ट्रीय पुरस्कार हैंसर्व श्रेष्ठ अभिनेता (दो), स्पेशल जूरी मेंशन, अभिनय के लिए स्पेशल जूरी अवार्ड और बतौर निर्माता सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म।

मलयालम, तमिल, तेलगु, कन्नड़ व हिदी में 400 से अधिक फिल्मों में काम कर चुके मोहनलाल को 9 केरल स्टेट फिल्म अवार्डस, व फिल्मपेयर अवार्डस साउथ से भी सम्मानित किया जा चुका है। भारत सरकार उन्हें अपने चौथे (पदम् श्री, 2001) व तीसरे (पदम् भूषण, 2019) सबसे बड़े नागरिक पुरस्कारों से भी सम्मानित कर चुकी है। साल 2008 में मोहनलाल फिल्म ‘वुरुक्षेत्र’

की शूटिग कर रहे थे, जिसमें वह भारतीय सेना के अधिकारी की भूमिका में थे। तब उन्होंने भारत की टेरीटोरियल आमब में शामिल होने की इच्छा व्यत्त की। लेकिन वह वालंटियर ़फोर्स में शामिल नहीं हो सकते थे क्योंकि वह 42 वर्ष से अधिक के हो गये थे। इसके बावजूद उनकी इच्छा का सम्मान किया गया और 9 जुलाईं 2008 को तत्कालीन सेना प्रमुख दीपक कपूर ने उन्हें औपचारिक तौरपर लेटिनेंट कर्नल (आनरेरी) के रूप में टेरीटोरियल आमब में शामिल किया। यह सम्मान पाने वाले वह पहले एक्टर हैं।

दरअसल, मोहनलाल को मिले सम्मानों की सूची बहुत लम्बी है, जिसका छोटे से लेख में समाना संभव नहीं है, इसलिए वुछ एक का ही ि़जव््रा किया जा रहा है। दक्षिण कोरिया ने 2012 में उन्हें ताइक्वन्डो में ब्लैक बेल्ट (आनरेरी) से सम्मानित किया। यह सम्मान पाने वाले वह दक्षिण भारत के पहले एक्टर हैं। श्री शंकराचार्यं संस्.त विश्वविदृालय ने 2010 में और कालिकट विश्वविदृालय ने 2018 में मोहनलाल को डाक्टरेट की मानद उपाधियों से सम्मानित किया।

मोहनलाल को सिनेमा उदृाोग में चार दशक से भी अधिक हो गये हैं।

अपने इस लम्बे सिनेमाईं सफर के दौरान उन्होंने उल्लेखनीय व प्रशंसनीय कार्यं किया है, जिसकी गूंज भारत में ही नहीं बल्कि दुनियाभर में सुनी व महसूस की गईं है। उनके इस योगदान की स्वी.ति में उन्हें 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान 23 सितम्बर 2025 को वर्ष 2023 के 55वें दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। साल 1969 में स्थापित दादासाहेब फाल्के पुरस्कार भारतीय सिनेमा में उल्लेखनीय योगदान के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट के तौरपर दिया जाता है और यह इस संदर्भ में सबसे बड़ा व सम्मानित पुरस्कार है। 65-वषबय मोहनलाल ने 28 अप्रैल 1988 को तमिल फिल्म निर्माता के बालाजी की बेटी सुचित्रा से शादी की थी। दोनों के दो बच्चे हैं- प्रणव मोहनलाल और विस्मय मोहनलाल। विवाद और मोहनलाल का साथ चोली दामन जैसा है। साल 2011 में उनके घर पर आयकर विभाग का छापा पड़ा था, जिसमें वन विभाग के अधिकारियों ने चार हाथी दांत व आइवरी कला.तियां बरामद की थीं।

मोहनलाल के खिलाफ यह केस अभी तक केरल हाईंकोर्ट में चल रहा है। जब वह एएमएमए के अध्यक्ष थे तो उन्होंने एक्टर दिलीप को बहाल कर दिया था, जो 2018 के अभिनेत्री हमला केस में आरोपी थे। मोहनलाल के इस पैसले के विरोध में अनेक अभिनेत्रियों ने इस संगठन से इस्ती़फा दे दिया था और उनके निर्णय की ़जबरदस्त आलोचना हुईं थी।

बहरहाल, मलयालम सिनेमा में जो ख्याति मोहनलाल व ममूटी को मिली है, वह कभी प्रेम ऩजीर को भी नहीं मिली क्योंकि इन दोनों के पास करिश्मा व प्रतिभा का दुर्लभ मिश्रण है और मलयालम सिनेमा का 85 प्रतिशत बॉक्स ऑफिस ग्रॉस इन दोनों पर ही निर्भर है, इसलिए फिल्मों की पटकथा इनकी आयु व छवि को ध्यान में रखकर ही लिखी जाती है, जिससे इनका प्रभाव निरंतर बढ़ता रहता है।

-इमेज रिलेक्शन सेंटर दुर्लभ प्रतिभा के धनी मोहनलाल दादासाहेब्ेब फाल्के पुरुरस्कार से सम्मन्नित गां वैलाश सिह