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80955KM/h की रफ्तार से आ रहा एस्टेरॉयड, वैज्ञानिकों ने क्यों छुपाया? NASA ने बताया सब

प्रकाशित: 06-12-2025 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
80955KM/h की रफ्तार से आ रहा एस्टेरॉयड, वैज्ञानिकों ने क्यों छुपाया? NASA ने बताया सब
आसमान की तरफ से इस हफ्ते एक नहीं, दो एस्टेरॉयड पृथ्वी के बेहद करीब से गुजरने वाले हैं. हैरान करने वाली बात यह है कि इसमें से एक 80,955 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आते हुए चर्चा का विषय बन गया है. इसी एस्टेरॉयड 2025 WD5 को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठा कि NASA ने इसे देर से क्यों बताया और क्या वैज्ञानिकों ने कुछ छुपाया था. जैसे ही NASA ने बैक-टू-बैक दो एस्टेरॉयड अप्रोच की पुष्टि की लोगों में उत्सुकता और चिंता दोनों बढ़ गईं.
NASA ने अब इन तमाम सवालों पर स्पष्ट जवाब दिया है. अंतरिक्ष एजेंसी के मुताबिक न तो 2025 WD5 और न ही दूसरा एस्टेरॉयड पृथ्वी के लिए किसी खतरे की कैटेगरी में आते हैं. दोनों तय समय पर पृथ्वी की कक्षा के पास से गुजरेंगे. दूरी कई लाख किलोमीटर होगी, और यह एक पूरी तरह सामान्य खगोलीय घटना है. लेकिन उनकी रफ्तार और लगातार बदलती कक्षा के कारण वैज्ञानिक इन्हें लगातार मॉनिटर कर रहे हैं.
NASA ने पुष्टि की है कि 6 दिसंबर को दो अलग-अलग एस्टेरॉयड पृथ्वी के पास से गुजरेंगे. इनमें पहला है 2025 WD5, जिसका आकार 150 फीट के आसपास है और जो 80,955 किमी/घंटा की रफ्तार से पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है. दूसरा एक छोटा Near-Earth Object है, जो WD5 की तुलना में आकार में कम है. लेकिन उसका अप्रोच भी इसी तारीख के आसपास होने वाला है. दोनों की पृथ्वी से दूरी सुरक्षित है, लेकिन बैक-टू-बैक गुजरने के कारण यह घटना खगोलविदों के लिए महत्वपूर्ण बन गई है.
NASA ने क्यों नहीं पहले बताया? सोशल मीडिया पर उठे सवाल
जैसे ही NASA ने अपडेट जारी किया, कुछ प्लेटफॉर्म्स पर दावा हुआ कि एजेंसी ने चेतावनी देर से दी. NASA ने कहा कि ऐसा बिल्कुल नहीं है. दोनों एस्टेरॉयड कई महीनों पहले से ट्रैक किए जा रहे थे. NASA केवल उन्हीं ऑब्जेक्ट्स पर रेड अलर्ट जारी करता है जो दिशा बदलने, पृथ्वी की कक्षा काटने, या टकराव की संभावना दिखाते हैं. WD5 और दूसरा एस्टेरॉयड इन तीनों में से किसी भी जोखिम कैटेगरी में नहीं आते.
दोनों एस्टेरॉयड क्यों चर्चा में हैं?
यह पहली बार है जब दिसंबर की शुरुआत में दो एस्टेरॉयड लगभग एक ही दिन में पृथ्वी के पास से गुजरने वाले हैं. WD5 की हाई-स्पीड और उसका 30 लाख किलोमीटर का न्यूनतम अंतर इसे दिलचस्प बनाता है, जबकि दूसरे एस्टेरॉयड का पास होना वैज्ञानिकों को दोनों की तुलना करने में मदद देगा.
NASA के मुताबिक दोनों एस्टेरॉयड से खतरा नहीं है क्योंकि-
• दोनों की कक्षा पहले से स्थिर और दर्ज.
• पृथ्वी से दूरी कई लाख किलोमीटर.
• दिशा में बदलाव का कोई संकेत नहीं.
• आकार खतरनाक श्रेणी में नहीं.
• NASA और JPL की 24×7 मॉनिटरिंग जारी.
वैज्ञानिक इतने सतर्क क्यों हैं?
वैज्ञानिक बताते हैं कि हर नजदीकी गुजरने वाला एस्टेरॉयड भविष्य की सुरक्षा रणनीति को मजबूत करता है. इससे पता चलता है कि उसकी सतह कैसी है, उसकी धुरी कैसे बदलती है, वह सूर्य के गुरुत्वाकर्षण को कैसे प्रभावित करता है और भविष्य में उसकी कक्षा कैसी हो सकती है. हर फ्लाइबाय अगली संभावित चेतावनी को और सटीक बनाता है.
पृथ्वी के पास एस्टेरॉयड कितनी बार आते हैं?
दिलचस्प बात यह है कि हर साल करीब 1000 से ज़्यादा एस्टेरॉयड पृथ्वी के पास से गुजरते हैं. NASA की Asteroid Watch लिस्ट में लगभग हर हफ्ते 10–15 ऑब्जेक्ट क्लोज अप्रोच में दर्ज होते हैं. ज्यादातर छोटे होते हैं और अगर टकराएं भी तो वायुमंडल में जलकर खत्म हो जाते हैं. इसलिए दो एस्टेरॉयड का बैक-टू-बैक गुजरना अनोखा तो है, लेकिन खतरनाक बिल्कुल नहीं.
क्या इस बार चिंता की जरूरत है? NASA का जवाब
NASA कहता है- कोई खतरा नहीं. दोनों एस्टेरॉयड की कक्षा, दिशा और गति स्थिर हैं. अगर 0.1% भी जोखिम होता तो NASA और कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां वैश्विक चेतावनी जारी कर देतीं. फिलहाल यह घटना सिर्फ इसलिए खास है क्योंकि यह हमें याद दिलाती है कि ब्रह्मांड लगातार बदल रहा है और वैज्ञानिकों की निगरानी क्षमता कितनी एडवांस हो चुकी है.