अति संवेदनशील बूथों की सुरक्षा की जिम्मेदारी चुनाव आयोग के तहत', कलकत्ता हाई कोर्ट ने TMC की याचिका को किया खारिज
प्रकाशित: 25-04-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
कलकत्ता हाई कोर्ट ने राज्य की अति संवेदनशील बूथों पर केंद्रीय बल की तैनाती के मामले में अहम फैसला सुनाया है. अदालत ने कहा कि अति संवेदनशील बूथों की सुरक्षा की जिम्मेदारी चुनाव आयोग के तहत आती है. हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस की ओर से दायर इस याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. इसमें चुनाव आयोग की ओर से सीआरपीएफ की तैनाती के निर्देश को चुनौती दी गई.
आपको बता दें कि 18 अप्रैल को आयोग ने एक निर्देश को जारी करते हुए कई खुफिया रिपोर्ट और सूचनाओं के तहत अति संवेदनशील बूथों पर शांतिपूर्ण मतदान तय करने को लेकर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की तैनाती का निर्णय लिया था. इस फैसले के तहत तृणमूल कांग्रेस अदालत पहुंच गई.
TMC का क्या है तर्क?
अदालत में सुनवाई के दौरान तृणमूल के वकील अनिर्वाण राय ने यह तर्क दिया कि बल की तैनाती को लेकर मैनुअल आन फोर्स डिप्लायमेंट का सही से पालन नहीं हो रहा. उनका कहना था कि संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान वोट से कम से कम छह माह पहले से शुरू होना चाहिए. वहीं इस मामले में चुनाव प्रक्रिया आरंभ होने के बाद निर्देश दिए गए जो उद्देश्यपूर्ण है.
वहीं, चुनाव आयोग के वकील दामा शेषाद्रि नायडू ने कोर्ट को चेतावनी दी कि संविधान के अनुच्छेद 329(बी) के तहत चुनाव प्रक्रिया आरंभ होने के बाद न्यायालय हस्तक्षेप नहीं हो सकता. इसके साथ 2023 के मैनुअल की धारा 1.3 के अनुसार, कानून-व्यवस्था बनाए रखने को लेकर कदम उठाए गए हैं. अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आयोग का फैस्ला खुफिया रिपोर्ट और तथ्यों के तहत तय किया गया. इसमें किसी तरह की अवैधता नहीं है. न्यायाधीश ने इस बात को स्पष्ट किया कि संवेदनशील क्षेत्रों की मैपिंग पहले से हो गई थी. जिला प्रशासन व पुलिस अधिकारी हालात से पूरी तरह से वाकिफ थे.
आपको बता दें कि 18 अप्रैल को आयोग ने एक निर्देश को जारी करते हुए कई खुफिया रिपोर्ट और सूचनाओं के तहत अति संवेदनशील बूथों पर शांतिपूर्ण मतदान तय करने को लेकर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की तैनाती का निर्णय लिया था. इस फैसले के तहत तृणमूल कांग्रेस अदालत पहुंच गई.
TMC का क्या है तर्क?
अदालत में सुनवाई के दौरान तृणमूल के वकील अनिर्वाण राय ने यह तर्क दिया कि बल की तैनाती को लेकर मैनुअल आन फोर्स डिप्लायमेंट का सही से पालन नहीं हो रहा. उनका कहना था कि संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान वोट से कम से कम छह माह पहले से शुरू होना चाहिए. वहीं इस मामले में चुनाव प्रक्रिया आरंभ होने के बाद निर्देश दिए गए जो उद्देश्यपूर्ण है.
वहीं, चुनाव आयोग के वकील दामा शेषाद्रि नायडू ने कोर्ट को चेतावनी दी कि संविधान के अनुच्छेद 329(बी) के तहत चुनाव प्रक्रिया आरंभ होने के बाद न्यायालय हस्तक्षेप नहीं हो सकता. इसके साथ 2023 के मैनुअल की धारा 1.3 के अनुसार, कानून-व्यवस्था बनाए रखने को लेकर कदम उठाए गए हैं. अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आयोग का फैस्ला खुफिया रिपोर्ट और तथ्यों के तहत तय किया गया. इसमें किसी तरह की अवैधता नहीं है. न्यायाधीश ने इस बात को स्पष्ट किया कि संवेदनशील क्षेत्रों की मैपिंग पहले से हो गई थी. जिला प्रशासन व पुलिस अधिकारी हालात से पूरी तरह से वाकिफ थे.