खांडू मामले को लेकर कांग्रेस का प्रधानमंत्री पर आरोप : खाया, खाने दिया और खिलवाया भी
प्रकाशित: 19-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
नई दिल्ली, (वीअ)। कांग्रेस ने अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार से कथित तौर पर जुड़ी कंपनियों को सरकारी ठेके दिए जाने के मामले को लेकर पावार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के खिलाफ गंभीर सवाल उठने के बावजूद उन्हें पद पर बनाए रखा गया है।
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कटाक्ष करते हुए कहा कि यह खाया है, खाने दिया है और खिलवाया भी है वाली राजनीति का एक और उदाहरण है। रमेश ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि उच्चतम न्यायालय ने छह अप्रैल, 2026 को अरुणाचल प्रदेश में 2015 से 2025 के बीच दिए गए करीब 1,270 करोड़ रुपये के सरकारी कार्यों के ठेकों को लेकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को प्रारंभिक जांच करने का निर्देश दिया था। कांग्रेस महासचिव ने आरोप लगाया कि खांडू को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए था या उनसे इस्तीफा लिया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि खांडू और प्रधानमंत्री ने इस मामले का सामना करने का फैसला किया। रमेश के मुताबिक, बीते तीन अगस्त को उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई की उस रिपोर्ट पर संज्ञान लिया जिसमें अरुणाचल प्रदेश सरकार पर जांच में सहयोग नहीं करने और जरूरी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराने का आरोप लगाया गया था। इसके बाद अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव (गृह) को 24 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया था। उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि 24 अगस्त को हुई सुनवाई में राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि उसने सीबीआई को मांगे गए रिकॉर्ड और दस्तावेज उपलब्ध कराए हैं।
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कटाक्ष करते हुए कहा कि यह खाया है, खाने दिया है और खिलवाया भी है वाली राजनीति का एक और उदाहरण है। रमेश ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि उच्चतम न्यायालय ने छह अप्रैल, 2026 को अरुणाचल प्रदेश में 2015 से 2025 के बीच दिए गए करीब 1,270 करोड़ रुपये के सरकारी कार्यों के ठेकों को लेकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को प्रारंभिक जांच करने का निर्देश दिया था। कांग्रेस महासचिव ने आरोप लगाया कि खांडू को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए था या उनसे इस्तीफा लिया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि खांडू और प्रधानमंत्री ने इस मामले का सामना करने का फैसला किया। रमेश के मुताबिक, बीते तीन अगस्त को उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई की उस रिपोर्ट पर संज्ञान लिया जिसमें अरुणाचल प्रदेश सरकार पर जांच में सहयोग नहीं करने और जरूरी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराने का आरोप लगाया गया था। इसके बाद अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव (गृह) को 24 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया था। उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि 24 अगस्त को हुई सुनवाई में राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि उसने सीबीआई को मांगे गए रिकॉर्ड और दस्तावेज उपलब्ध कराए हैं।