वंदे मातरम मां भारती के प्रति अटूट प्रेम,त्याग और राष्ट्रभक्ति का अमर मंत्र है: केशव प्रसाद मौर्य
प्रकाशित: 27-06-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
लखनऊ,(वीअ)। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य ने पावार को लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास, सात कालिदास मार्ग पर राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम' के अमर रचयिता, युग मनीषी श्रद्धेय बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय जी तथा सामाजिक न्याय एवं समानता के अग्रदूत राजर्षि छत्रपति शाहू जी महाराज की जयंती के अवसर पर उनके स्मृति-चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धासुमन नमन किया।
उप मुख्यमंत्री श्री मौर्य ने कहा कि राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम' माँ भारती के प्रति अटूट प्रेम, बलिदान, आत्मसम्मान और राष्ट्रभक्ति का ऐसा अमर मंत्र है, जिसने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान असंख्य ाढांतिकारियों और देशवासियों में नई ऊर्जा का संचार किया। श्रद्धेय बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय जी ने अपने साहित्य और कालजयी कृति ‘आनंदमठ' के माध्यम से जन-जन में राष्ट्रप्रेम की भावना जागृत करने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय जी का राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम' आज भी प्रत्येक भारतीय के हृदय में देशभक्ति और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना को और अधिक प्रबल करता है। उनका साहित्य एवं राष्ट्र के प्रति समर्पण सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा।
श्री मौर्य ने सामाजिक न्याय के पुरोधा राजर्षि छत्रपति शाहू जी महाराज को नमन करते हुए कहा कि उन्होंने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को सम्मान, शिक्षा और समान अवसर दिलाने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। शिक्षा, सामाजिक सुधार और वंचित वर्गों के उत्थान के क्षेत्र में उनका योगदान अतुलनीय है।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि राजर्षि छत्रपति शाहू जी महाराज ने सामाजिक समानता और न्याय के विचारों को केवल व्यक्त ही नहीं किया, बल्कि उन्हें व्यवहार में लागू कर समाज में परिवर्तन की मजबूत नींव रखी। उनके विचार आज भी समतामूलक समाज के निर्माण के लिए प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय जी और राजर्षि छत्रपति शाहू जी महाराज जैसे महान विभूतियों का जीवन राष्ट्रसेवा, सामाजिक समरसता, शिक्षा और जनकल्याण के लिए सदैव मार्गदर्शन करता रहेगा।
उप मुख्यमंत्री श्री मौर्य ने कहा कि राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम' माँ भारती के प्रति अटूट प्रेम, बलिदान, आत्मसम्मान और राष्ट्रभक्ति का ऐसा अमर मंत्र है, जिसने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान असंख्य ाढांतिकारियों और देशवासियों में नई ऊर्जा का संचार किया। श्रद्धेय बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय जी ने अपने साहित्य और कालजयी कृति ‘आनंदमठ' के माध्यम से जन-जन में राष्ट्रप्रेम की भावना जागृत करने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय जी का राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम' आज भी प्रत्येक भारतीय के हृदय में देशभक्ति और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना को और अधिक प्रबल करता है। उनका साहित्य एवं राष्ट्र के प्रति समर्पण सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा।
श्री मौर्य ने सामाजिक न्याय के पुरोधा राजर्षि छत्रपति शाहू जी महाराज को नमन करते हुए कहा कि उन्होंने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को सम्मान, शिक्षा और समान अवसर दिलाने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। शिक्षा, सामाजिक सुधार और वंचित वर्गों के उत्थान के क्षेत्र में उनका योगदान अतुलनीय है।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि राजर्षि छत्रपति शाहू जी महाराज ने सामाजिक समानता और न्याय के विचारों को केवल व्यक्त ही नहीं किया, बल्कि उन्हें व्यवहार में लागू कर समाज में परिवर्तन की मजबूत नींव रखी। उनके विचार आज भी समतामूलक समाज के निर्माण के लिए प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय जी और राजर्षि छत्रपति शाहू जी महाराज जैसे महान विभूतियों का जीवन राष्ट्रसेवा, सामाजिक समरसता, शिक्षा और जनकल्याण के लिए सदैव मार्गदर्शन करता रहेगा।