झीरम घाटी हमला: 13 साल बाद अंतिम बहस की तैयारी
प्रकाशित: 09-08-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
जगदलपुर, (छत्तीसगढ़ ब्यूरो)। 25 मई 2013 को हुए झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में करीब 13 साल बाद अब सुनवाई अंतिम दौर में पहुंच गई है। मामले में 10 अगस्त को अदालत में अंतिम बहस- होगी। अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत फैसला सुरक्षित रख सकती है या निर्णय सुनाने की तारीख तय कर सकती है।
झीरम घाटी हमले ने छत्तीसगढ़ की राजनीति और बस्तर को गहरे जख्म दिए थे। इस हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं समेत कई पुलिस जवान और आम लोग मारे गए थे। -महेंद्र कर्मा, नंदकुमार पटेल, विद्याचरण शुक्ल और उदय मुदलियार- सहित कई नेताओं की इस हमले में जान गई थी।मामले में कुल -11 आरोपियों के खिलाप अभियोजन- चलाया गया, जिनमें से एक आरोपी की मृत्यु हो चुकी है। अभियोजन पक्ष की ओर से अब तक -101 गवाहों के बयान- अदालत में दर्ज किए जा चुके हैं। गवाहों की गवाही, परीक्षण-प्रतिपरीक्षण और दस्तावेजी साक्ष्यों की प्रत्रिढया पूरी होने के बाद अब दोनों पक्ष अदालत के सामने अपने अंतिम तर्क प्रस्तुत करेंगे। झीरम हमले के बाद से ही पीड़ित परिवारों और राजनीतिक दलों की ओर से घटना के दोषियों को सजा दिलाने की मांग उठती रही है। करीब 13 साल के लंबे इंतजार के बाद अब मामला निर्णय के करीब पहुंचने से न्याय की उम्मीद एक बार पिर तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी विधि विभाग के प्रदेश महासचिव एवं अधिवक्पा -अवधेश कुमार झा- ने कहा कि कांग्रेस लगातार झीरम मामले में न्याय की मांग करती रही है। उनके मुताबिक, 100 से अधिक गवाहों की गवाही और परीक्षण-प्रतिपरीक्षण की प्रत्रिढया पूरी हो चुकी है और मामला अब फैसले के स्तर पर पहुंच गया है।
अब -10 अगस्त की अंतिम बहस- के बाद अदालत की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी। अंतिम दलीलों के बाद अदालत फैसला सुरक्षित रखती है या निर्णय के लिए तारीख निर्धारित करती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
झीरम घाटी हमले ने छत्तीसगढ़ की राजनीति और बस्तर को गहरे जख्म दिए थे। इस हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं समेत कई पुलिस जवान और आम लोग मारे गए थे। -महेंद्र कर्मा, नंदकुमार पटेल, विद्याचरण शुक्ल और उदय मुदलियार- सहित कई नेताओं की इस हमले में जान गई थी।मामले में कुल -11 आरोपियों के खिलाप अभियोजन- चलाया गया, जिनमें से एक आरोपी की मृत्यु हो चुकी है। अभियोजन पक्ष की ओर से अब तक -101 गवाहों के बयान- अदालत में दर्ज किए जा चुके हैं। गवाहों की गवाही, परीक्षण-प्रतिपरीक्षण और दस्तावेजी साक्ष्यों की प्रत्रिढया पूरी होने के बाद अब दोनों पक्ष अदालत के सामने अपने अंतिम तर्क प्रस्तुत करेंगे। झीरम हमले के बाद से ही पीड़ित परिवारों और राजनीतिक दलों की ओर से घटना के दोषियों को सजा दिलाने की मांग उठती रही है। करीब 13 साल के लंबे इंतजार के बाद अब मामला निर्णय के करीब पहुंचने से न्याय की उम्मीद एक बार पिर तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी विधि विभाग के प्रदेश महासचिव एवं अधिवक्पा -अवधेश कुमार झा- ने कहा कि कांग्रेस लगातार झीरम मामले में न्याय की मांग करती रही है। उनके मुताबिक, 100 से अधिक गवाहों की गवाही और परीक्षण-प्रतिपरीक्षण की प्रत्रिढया पूरी हो चुकी है और मामला अब फैसले के स्तर पर पहुंच गया है।
अब -10 अगस्त की अंतिम बहस- के बाद अदालत की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी। अंतिम दलीलों के बाद अदालत फैसला सुरक्षित रखती है या निर्णय के लिए तारीख निर्धारित करती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।