ओएनजीसी अब तेल और गैस नहीं गैस और तेल कंपनी : चेयरमैन
प्रकाशित: 22-06-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
नई दिल्ली, (भाषा)। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) अब केवल तेल और गैस नहीं बल्कि गैस और तेल कंपनी बन चुकी है। कंपनी के चेयरमैन अरुण कुमार सिंह ने यह बात कही है।
सिंह ने कहा कि अब कंपनी के पोर्टफोलियो में प्राकृतिक गैस का हिस्सा कच्चे तेल से अधिक हो गया है। सिंह ने विश्लेषकों से बातचीत में कहा कि ओएनजीसी के कुल उत्पादन में अब गैस का योगदान तेल से थोड़ा अधिक है और भविष्य में कंपनी की वृद्धि मुख्य रूप से गैस उत्पादन के दम पर होगी। उन्होंने कहा कि बड़े नए तेल भंडारों की खोज नहीं होने की स्थिति में कच्चे तेल का उत्पादन लगभग स्थिर रहने की संभावना है, जबकि गैस उत्पादन लगातार बढ़ेगा। उन्होंने कहा, गैस अब हमारे पोर्टफोलियो में तेल से थोड़ी अधिक है। इसलिए हमें तेल एवं गैस कंपनी नहीं, बल्कि गैस एवं तेल कंपनी कहा जाना चाहिए। सिंह के अनुसार, भारत में प्राकृतिक गैस की मांग लगातार बढ़ रही है। परिवहन क्षेत्र में गैस के उपयोग का विस्तार, सरकार की मूल्य निर्धारण सुधार नीतियां और नए गैस क्षेत्रों का विकास इसे अधिक आकर्षक बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि गैस को भारत के ऊर्जा परिदृश्य में अधिक मूल्यवान ईंधन माना जा रहा है। उन्होंने बताया कि ओएनजीसी के कुल गैस उत्पादन में नए गैस कुओं का हिस्सा तेजी से बढ़ रहा है और यह फिलहाल कुल गैस उत्पादन का लगभग 25 प्रतिशत है। निकट भविष्य में इसके 30-36 प्रतिशत तक पहुंचने और आगे चलकर कंपनी के गैस पोर्टफोलियो में प्रमुख हिस्सेदारी लेने की संभावना है, क्योंकि पुराने गैस क्षेत्रों का उत्पादन धीरे-धीरे घटेगा। सिंह ने कहा कि कंपनी अगले कुछ वर्षों में गैस उत्पादन में सालाना 7-8 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य लेकर चल रही है। यह वृद्धि डीयूडीपी, डीएसएफ क्षेत्रों तथा 98ा2 जैसी अपतटीय (ऑफशोर) परियोजनाओं से मिलेगी, जिनमें से कई अगले वित्त वर्ष में उत्पादन शुरू करेंगी। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा रॉयल्टी में कमी, बाजार आधारित मूल्य निर्धारण व्यवस्था को बढ़ावा और गहरे समुद्र में अन्वेषण के लिए समर्थन जैसी नीतियों से इस क्षेत्र की आर्थिक स्थिति बेहतर हुई है तथा अपस्ट्रीम कंपनियों के पास अधिक राजस्व बच रहा है।
ओएनजीसी समूह के कारोबार में अन्वेषण एवं उत्पादन (ईएंडपी) खंड की हिस्सेदारी लगभग दो-तिहाई है। कंपनी हर वर्ष करीब 500 कुओं की खुदाई करती है, जिनमें खोजी और उत्पादन दोनों प्रकार के कुएं शामिल हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का आरक्षित नियोजन अनुपात 1.1 से अधिक रहा, जो यह दर्शाता है कि उत्पादित भंडारों की भरपाई सफलतापूर्वक की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की स्वच्छ ऊर्जा रणनीति और बढ़ती गैस खपत को देखते हुए ओएनजीसी का यह गैस-केंद्रित बदलाव कंपनी के दीर्घकालिक विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। सिंह ने कहा कि कंपनी करीब 33,000 करोड़ रुपये की अपतटीय परियोजनाओं का कार्यान्वयन कर रही है। विदेशी परिचालन पर ओएनजीसी के चेयरमैन ने कहा कि रूस की सखालिन परियोजना से उत्पादन स्थिर बना हुआ है। वहीं, मोजाम्बिक की एलएनजी परियोजना में प्रगति हो रही है और इसके 2028 तक पूरा होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला में भी उत्पादन बढ़ने की संभावनाएं हैं, बशर्ते वहां नियामकीय और परिचालन संबंधी परिस्थितियां अधिक अनुकूल हों।
सिंह ने कहा कि अब कंपनी के पोर्टफोलियो में प्राकृतिक गैस का हिस्सा कच्चे तेल से अधिक हो गया है। सिंह ने विश्लेषकों से बातचीत में कहा कि ओएनजीसी के कुल उत्पादन में अब गैस का योगदान तेल से थोड़ा अधिक है और भविष्य में कंपनी की वृद्धि मुख्य रूप से गैस उत्पादन के दम पर होगी। उन्होंने कहा कि बड़े नए तेल भंडारों की खोज नहीं होने की स्थिति में कच्चे तेल का उत्पादन लगभग स्थिर रहने की संभावना है, जबकि गैस उत्पादन लगातार बढ़ेगा। उन्होंने कहा, गैस अब हमारे पोर्टफोलियो में तेल से थोड़ी अधिक है। इसलिए हमें तेल एवं गैस कंपनी नहीं, बल्कि गैस एवं तेल कंपनी कहा जाना चाहिए। सिंह के अनुसार, भारत में प्राकृतिक गैस की मांग लगातार बढ़ रही है। परिवहन क्षेत्र में गैस के उपयोग का विस्तार, सरकार की मूल्य निर्धारण सुधार नीतियां और नए गैस क्षेत्रों का विकास इसे अधिक आकर्षक बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि गैस को भारत के ऊर्जा परिदृश्य में अधिक मूल्यवान ईंधन माना जा रहा है। उन्होंने बताया कि ओएनजीसी के कुल गैस उत्पादन में नए गैस कुओं का हिस्सा तेजी से बढ़ रहा है और यह फिलहाल कुल गैस उत्पादन का लगभग 25 प्रतिशत है। निकट भविष्य में इसके 30-36 प्रतिशत तक पहुंचने और आगे चलकर कंपनी के गैस पोर्टफोलियो में प्रमुख हिस्सेदारी लेने की संभावना है, क्योंकि पुराने गैस क्षेत्रों का उत्पादन धीरे-धीरे घटेगा। सिंह ने कहा कि कंपनी अगले कुछ वर्षों में गैस उत्पादन में सालाना 7-8 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य लेकर चल रही है। यह वृद्धि डीयूडीपी, डीएसएफ क्षेत्रों तथा 98ा2 जैसी अपतटीय (ऑफशोर) परियोजनाओं से मिलेगी, जिनमें से कई अगले वित्त वर्ष में उत्पादन शुरू करेंगी। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा रॉयल्टी में कमी, बाजार आधारित मूल्य निर्धारण व्यवस्था को बढ़ावा और गहरे समुद्र में अन्वेषण के लिए समर्थन जैसी नीतियों से इस क्षेत्र की आर्थिक स्थिति बेहतर हुई है तथा अपस्ट्रीम कंपनियों के पास अधिक राजस्व बच रहा है।
ओएनजीसी समूह के कारोबार में अन्वेषण एवं उत्पादन (ईएंडपी) खंड की हिस्सेदारी लगभग दो-तिहाई है। कंपनी हर वर्ष करीब 500 कुओं की खुदाई करती है, जिनमें खोजी और उत्पादन दोनों प्रकार के कुएं शामिल हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का आरक्षित नियोजन अनुपात 1.1 से अधिक रहा, जो यह दर्शाता है कि उत्पादित भंडारों की भरपाई सफलतापूर्वक की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की स्वच्छ ऊर्जा रणनीति और बढ़ती गैस खपत को देखते हुए ओएनजीसी का यह गैस-केंद्रित बदलाव कंपनी के दीर्घकालिक विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। सिंह ने कहा कि कंपनी करीब 33,000 करोड़ रुपये की अपतटीय परियोजनाओं का कार्यान्वयन कर रही है। विदेशी परिचालन पर ओएनजीसी के चेयरमैन ने कहा कि रूस की सखालिन परियोजना से उत्पादन स्थिर बना हुआ है। वहीं, मोजाम्बिक की एलएनजी परियोजना में प्रगति हो रही है और इसके 2028 तक पूरा होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला में भी उत्पादन बढ़ने की संभावनाएं हैं, बशर्ते वहां नियामकीय और परिचालन संबंधी परिस्थितियां अधिक अनुकूल हों।