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कोयला आधारित बिजली उत्पादन को 2035 तक पीछे छोड़ सकती है नवीकरणीय ऊर्जा : सर्वेक्षण

प्रकाशित: 14-08-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
नई दिल्ली, (भाषा)। ऊर्जा क्षेत्र के कम से कम चार में से तीन पेशेवरों का मानना है कि वर्ष 2035 तक नवीकरणीय ऊर्जा कोयला आधारित बिजली से आगे निकल सकते हैं। हालांकि, यह बदलाव बिजली ग्रिड की तैयारी और उसकी विश्वसनीयता पर निर्भर करेगा। एनर्जी एंड क्लाइमेट इनीशिएटिव सोसायटी (ईएनसीआईएस) के एक सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है।
ईएनसीआईएस ने बयान में कहा कि भारत बिजली क्षेत्र में बदलाव की पहली महत्वपूर्ण सीमा पार कर चुका है। देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता में अब गैर-जीवाश्म (कोयला) ईंधन स्रोतों की हिस्सेदारी आधे से अधिक हो गई है। हालांकि, असली चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत हर घंटे भरोसेमंद तरीके से कोयले से अधिक बिजली का उत्पादन करें। यह लक्ष्य अभी हासिल किया जाना बाकी है। सर्वेक्षण के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, पुणे, बेंगलुरु और चेन्नई के 250 ऊर्जा पेशेवरों में से करीब 75 प्रतिशत का मानना है कि वर्ष 2035 तक नवीकरणीय ऊर्जा भारत में बिजली उत्पादन का प्रमुख स्रोत बन जाएगी और कोयला आधारित बिजली उत्पादन को पीछे छोड़ देगी। सर्वेक्षण में शामिल 28 प्रतिशत लोगों का अनुमान है कि यह बदलाव वर्ष 2030 तक ही हो सकता है। इससे संकेत मिलता है कि ऊर्जा बदलाव मौजूदा योजनाओं की तुलना में तेज गति से आगे बढ़ सकता है। ईएनसीआईएस ने बताया कि 31 जुलाई, 2026 तक भारत में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 291.7 गीगावाट और कुल गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता 300.5 गीगावाट थी। हालांकि, वित्त वर्ष 2025-26 में तापीय ऊर्जा स्रोतों से करीब 1,307 अरब यूनिट बिजली का उत्पादन हुआ, जबकि बड़े जल विद्युत और अन्य नवीकरणीय स्रोतों से संयुक्त रूप से लगभग 478 अरब यूनिट बिजली का उत्पादन हुआ। संस्थान ने कहा कि भारत ने अपनी बिजली क्षमता के ढांचे में बड़ा बदलाव किया है, लेकिन मौजूदा बिजली व्यवस्था अब भी काफी हद तक तापीय ऊर्जा पर निर्भर है। ईएनसीआईएस के मानद अध्यक्ष पी के पुजारी ने कहा कि इस बदलाव को कोयले और नवीकरणीय ऊर्जा के बीच केवल प्रतिस्पर्धा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कोयले की भूमिका कम होने से पहले बदलेगी। भविष्य में कोयला ऊर्जा के मुख्य स्रोत से हटकर बिजली व्यवस्था की जरूरतों को पूरा करने और रणनीतिक विश्वसनीयता बनाए रखने वाले लचीले स्रोत की भूमिका निभा सकता है।
सर्वेक्षण के अनुसार, उद्योग जगत ने सौर ऊर्जा को सबसे महत्वपूर्ण वृद्धि विकल्प माना है। 61 प्रतिशत प्रतिभागियों ने सौर ऊर्जा को भविष्य की निर्णायक ऊर्जा बताया। वहीं, 14 प्रतिशत ने पवन ऊर्जा, 11 प्रतिशत ने हरित हाइड्रोजन और करीब 12 प्रतिशत ने जल विद्युत तथा जैव ऊर्जा को प्रमुख विकल्प माना।
ऊर्जा बदलाव के प्रमुख कारणों में जलवायु और शुद्ध रूप से शून्य कार्बन उत्सर्जन संबंधी प्रतिबद्धताओं को 32 प्रतिशत प्रतिभागियों ने महत्वपूर्ण बताया, जबकि 27 प्रतिशत ने नवीकरणीय ऊर्जा की घटती लागत को इसका प्रमुख कारण माना।
हालांकि, इस बदलाव के सामने कई चुनौतियां भी हैं। 29 प्रतिशत प्रतिभागियों ने बिजली ग्रिड में नवीकरणीय ऊर्जा के समावेश और भरोसेमंद आपूर्ति को सबसे बड़ी चुनौती बताया। 24 प्रतिशत ने वित्तीय कमी और 18 प्रतिशत ने भूमि अधिग्रहण तथा मंजूरी संबंधी समस्याओं को प्रमुख बाधा माना।
सर्वेक्षण के निष्कर्ष एक से तीन सितंबर 2026 तक राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित होने वाले भारत इलेक्ट^िसिटी , पावरजेन इंडिया और इंडियन यूटिलिटी वीक 2026 कार्यक्रम में प्रस्तुत किए जाएंगे।
इस आयोजन में 15,000 से अधिक ऊर्जा पेशेवर, 250 से अधिक प्रदर्शक और 150 से अधिक उद्योग प्रमुख शामिल होंगे।