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बेहतरी की उम्मीद

प्रकाशित: 09-09-2026 | लेखक: सदानंद पांडे
बेहतरी की उम्मीद
एक तरफ दुनिया टकराव और अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। अप्रैल से जून की तिमाही पूरी दुनिया के लिए चुनौतीपूर्ण रही क्योंकि ऊर्जा संकट और ट्रंप का टैरिफ टेरर अर्थव्यवस्था के लिए प्रतिकूल परिस्थिति होने के बावजूद भारत की वृद्धि दर जब 7.8 प्रतिशत तक पहुंच गई तो मैन पावर ग्रुप के नवीनतम रोजगार परिदृश्य सर्वेक्षण को किस आधार पर गलत माना जा सकता है कि इस साल की अंतिम तिमाही यानि अक्टूबर, नवम्बर, दिसम्बर में भारत में नियुक्तियों को लेकर धारणा दुनिया में सबसे मजबूत हो चुकी है। सर्वेक्षण में संकेत दिया गया है कि इसकी वजह कंपनियों का विस्तार है जबकि कर्मचारियों की संख्या घटाने की संभावित वजहों में स्वचालन, प्रौद्योगिकी और आर्थिक चुनौतियां प्रमुख हैं।
दरअसल भारत में 1 से 31 जुलाई के बीच 3055 इम्प्लायर के बीच किए गए सर्वेक्षण के मुताबिक कैलेण्डर वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के लिए भारत का शुद्ध रोजगार परिदृश्य यानि एनईओ 54 प्रतिशत रहा। भारत में 65 प्रतिशत इम्प्लायर अक्टूबर से दिसम्बर के बीच कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की योजना बना रहे हैं जबकि 11 प्रतिशत इनमें कमी की उम्मीद कर रहे हैं। लेकिन सर्वेक्षण में 25 प्रतिशत इम्प्लायर ऐसे भी हैं जिनका मानना है कि कर्मचारियों की संख्या में कोई बदलाव नहीं होगा।
सच तो यह है कि अक्टूबर से दिसम्बर के बीच नौकरियों के बढ़ने की धारणा ही है और इस धारणा के जो आधार हैं, उनमें बदलाव की पूरी संभावना भी बनी हुई है। भारत में नौकरियों में वृद्धि के लिए आवश्यक है कि वृद्धि दर कम से कम 10 प्रतिशत हो और निवेश देशी हो या विदेशी उसमें लगातार बढ़ोत्तरी होना अनिवार्य है। आर्थिक वृद्धि दर तो अभी 8 प्रतिशत भी नहीं पहुंच पाई है और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानि एफडीआई अप्रैल 2000 से मार्च 2026 के बीच बढ़कर 1.16 ट्रिलियन अमेरिकी डालर के ऐतिहासिक मील के पत्थर पर पहुंच गया है। एफडीआई में ताजा वृद्धि देखें तो वित्त वर्ष 2025-26 में कुल प्रवाह बढ़कर 94.53 डालर हो गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 17 प्रतिशत अधिक है। जहां तक बाजार में घरेलू दबदबे की हालत है, वह भी उत्साहवर्धक है। भारतीय शेयर बाजार में खुदरा निवेशकों और घरेलू म्यूचुअल फण्ड्स की हिस्सेदारी लगातार रिकार्ड स्तर छू रही है। अब म्यूचुअल फण्ड्स और डायरेक्ट इक्विटी के जरिए घरेलू निवेशकों की बाजार में हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 18.5 प्रतिशत से बढ़कर 19 प्रतिशत हो गई है। यही नहीं सिस्टेमैटिक इंवेस्टमेण्ट प्लान यानि एसआईपी की बात करें तो हर महीने घरेलू निवेशकों द्वारा अरबों रुपए म्यूचुअल फंड्स में निवेश किए जा रहे हैं। यही कारण है कि दुनिया भर में टैरिफ, तेल और असुरक्षा के माहौल में भी भारतीय बाजार में भारी तरलता और स्थिरता बनी हुई है। वहीं हम डिमैट खातों की बात करें तो इन खातों की संख्या 21 करोड़ पार कर चुकी है, जो इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि आम भारतीय परिवारों का झुकाव वित्तीय संपत्तियों की तरफ तेजी से बढ़ा है।
वास्तविकता तो यह है कि भारत में उद्योग एवं वाणिज्य मंत्रालय के अधीन ‘उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग यानि डीपीआईआईटी द्वारा मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की कुल संख्या 31 मार्च 2026 तक 2.23 लाख पार कर गई है। इसके साथ भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इको सिस्टम बन गया है। रोजगार सृजन में इन्हीं मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स द्वारा 23.36 लाख से अधिक रोजगार सृजित किए गए हैं।
बहरहाल भारत में जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है इसलिए वृद्धि दर में बढ़ोत्तरी, एफडीआई, देशी कंपनियों द्वारा निवेश और स्टार्टअप्स की संख्या में तेजी से वृद्धि के बावजूद नौकरियों में कमी का एहसास होना स्वाभाविक है किन्तु जिस तरह देशी कंपनियों ने विस्तार के प्रति रुचि दिखाई है उसे देखते हुए मैन पावर ग्रुप का आकलन बिल्कुल सही लगता है।