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संस्कृत के बिना आयुर्वेद का मूल स्वरूप अधूरा : प्रो. सतीश गंधर्व

प्रकाशित: 30-08-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
चंडीगढ़, (पवन आश्री)। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए), पंचकूला में 11वें आयुर्वेद दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्पामों की श्रृंखला में संस्कृत दिवस-2026 का भव्य आयोजन किया गया। कार्पाम का शुभारंभ डीन इंचार्ज प्रोफेसर सतीश गंधर्व ने दीप प्रज्वलन एवं मां सरस्वती का पूजन कर किया।आयुष मंत्रालय भारत सरकार के तत्वावधान में संस्थान के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) संजीव शर्मा और डीन प्रोफेसर गुलाब चंद पमनानी के मार्गदर्शन में चिकित्सकों एवं विद्यार्थियों ने आयुर्वेद के मूल ग्रंथों की भाषा संस्कृत को सहेजने का संकल्प लिया। डीन इंचार्ज प्रोफेसर सतीश गंधर्व ने कहा कि संस्कृत केवल एक प्राचीन भाषा नहीं है, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा की आधारशिला है। संस्कृत के बिना आयुर्वेद का मूल स्वरूप अधूरा है। इसलिए संस्कृत में समाहित आयुर्वेद का ज्ञान-विज्ञान, संरक्षण और संवर्धन जरूरी है।
उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के अनेक मूल एवं प्रामाणिक ग्रंथ संस्कृत भाषा में रचित हैं। ऐसे में आयुर्वेद के सिद्धांतों, चिकित्सा पद्धतियों और भारतीय ज्ञान परंपरा की गहराई को समझने के लिए संस्कृत का अध्ययन महत्वपूर्ण है। प्रोफेसर गंधर्व ने कहा कि संस्कृत में केवल साहित्य, धर्म और अध्यात्म ही नहीं, बल्कि मानव कल्याण, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समरसता का संदेश भी है।
सर्वे भवन्तु सुखिन: के माध्यम से सभी के सुख और कल्याण की कामना की गई है। इसके साथ ही, वसुधैव कुटुम्बकम पूरी दुनिया को एक परिवार मानने की भावना को मजबूत करता है।
उन्होंने संस्कृत दिवस के माध्यम से विद्यार्थियों और युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, साहित्य, दर्शन और प्राचीन ज्ञान-विज्ञान से जोड़ने के प्रयास का आह्वान किया।
असिस्टेंट प्रोफेसर चंद्रमोहन द्वारा कार्पाम के सफल आयोजन पर आभार व्यक्त करते हुए बताया कि कार्पाम के माध्यम से आयुर्वेद के मूल ग्रन्थों एवं भारतीय ज्ञान परम्परा के आधारभूत माध्यम के रूप में संस्कृत भाषा के महत्व को रेखांकित किया गया तथा इसके अध्ययन, संरक्षण एवं संवर्धन का संदेश दिया गया।
इस अवसर पर असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मनीष पमनानी, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आकांक्षा राणा, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अनुराग कुशल, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. धवल जी मकवाना, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अंकिता नेगी, असिस्टेंट प्रोफेसर महेश एम, चिकित्सा अधिकारी शीन्षा पी तथा बीएएमएस के विद्यार्थी मौजूद रहे।



अम्बाला रिंग रोड जनता के लिए “ट्रैफिक-फ्री'' वरदान, प्रोजेक्ट मील का पत्थर साबित होगा : परिवहन मंत्री अनिल विज
अम्बाला (पवन आश्री)। हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री श्री अनिल विज ने कहा कि अम्बाला में निर्माणाधीन रिंग रोड न केवल अम्बाला को ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाएगा, बल्कि प्रतिदिन यहां से गुजरने वाले लाखों वाहन चालकों के लिए वरदान साबित होगा। रिंग रोड प्रोजेक्ट रिंग रोड अम्बाला के इंफ्रास्ट्रक्चर इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा जिससे अम्बाला महानगर बनने की ओर अग्रसर होगा। श्री विज ने आज दोपहर अपनी गाड़ी में रिंग रोड प्रोजेक्ट का स्थल मुआयना किया और निर्माण कार्य की प्रगति को जाना। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य रिंग रोड निर्माण कार्य जल्द से जल्द पूरा करके इसे जनता को समर्पित करना है। गौरतलब है कि परिवहन मंत्री अनिल विज के अथह प्रयासों से अम्बाला में रिंग रोड परियोजना की शुरूआत की गई थी।
अम्बाला जिले के चारों ओर एक माला की तरह रिंग रोड का निर्माण कार्य निर्माण के अंतिम चरणों में है जिसे बहुत जल्द पूरा कर जनता को समर्पित करने की योजना है। इस अवसर पर भाजपा नेता संजीव सोनी बब्बू, अजय बवेजा, शैलेंद्र खन्ना एवं अन्य मौजूद रहे।
40 किलोमीटर लंबे सिक्स लेन रिंग रोड का लगभग 691 करोड़ रुपए की लागत से निर्माण हो रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए कुल 30 गांवों की 657 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई है, जिसमें हरियाणा के 27 व पंजाब के तीन गांव भी शामिल हैं।
इसके साथ ही रिंग रोड के साथ-साथ कुछ सेक्टर भी हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण काट रहा है जिससे भविष्य में शहरी क्षेत्र की हद रिंग रोड तक होने की प्रबल संभावना है।
रिंग रोड का 90 प्रतिशत कार्य पूरा
पंजाब, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और उत्तर प्रदेश से वाया अम्बाला आने-जाने वाले वाहन चालकों के लिए रिंग रोड प्रोजेक्ट वरदान साबित होगा। वाहन चालकों अम्बाला के अंदरूनी भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में दाखिल हुए बिना आगे आने की सुविधा मिलेगी। इस परियोजना का कार्य नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा लगभग 90 प्रतिशत पूरा कर लिया है। रिंग रोड के जरिए वाहन चालक किसी भी राज्य से आएं उन्हें शहर के यातायात में होकर नहीं गुजरना पड़ेगा। परियोजना का अम्बाला निवासियों को भरपूर लाभ मिलेगा।
रिंग रोड से 5 नेशनल हाईवे जुड़ेंगे
यह रिंग रोड क्षेत्र के पांच बड़े नेशनल हाईवे को आपस में जोड़ेगा। यमुनानगर-जगाधरी, सहारनपुर, पांवटा साहिब की ओर से आने वाले वाहन अब शहर के व्यस्त इलाकों में आए बिना सीधे पंजाब, चंडीगढ़ व कैथल-हिसार की ओर निकल सकेंगे। इसी तरह, अगर किसी पंजाब, चंडीगढ़, हिमाचल आदि क्षेत्रों से दिल्ली, यमुनानगर, सहारनपुर, पांवटा साहिब व अन्य क्षेत्रों में जाना है तो उन्हें भी रिंग रोड के जरिए बाहर से होते हुए सीधा गंतव्य तक जाने की सुविधा होगी।