भूकंप एक और खतरे अनेक
प्रकाशित: 30-08-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
दुनियाभर में इन दिनों बाढ़ और भूकंप की चर्चा हो रही है। कई देशों से आए दिन भूकंप की खबरें आती रहती हैं। भूकंप भी ऐसा लगता है, अब हमारे जनजीवन का हिस्सा बन चुका है। भूकंप की वजह से हर साल हजारों लाखों जिंदगियां बर्बाद होती हैं और करोड़ों का नुकसान होता है। नेपाल के हालिया महा जल प्रलय के बाद भूकंप के खतरों की आहट भी सुनाई देने लगी है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है जो धरती की सतह को हिला देती है और कभी-कभी भारी तबाही मचा देती है। भूकंप तब आते हैं जब धरती की टेक्टोनिकप्लेट्स आपस में टकराती हैं या खिसकती हैं। यह घटना अचानक होती है और इसके परिणामस्वरूप धरती में दरारें, इमारतों का गिरना और जान-माल का नुकसान हो सकता है। भूकंप यानि पृथ्वी की सतह का हिलना है, जिसके परिणामस्वरूप पृथ्वी के स्थलमंडल में ऊर्जा की अचानक रिहाई होती है जो भूकंपीय तरंगें पैदा करती है।भूकंप पृथ्वी की सतह परत के माध्यम से प्रसारित तरंग गति की ऊर्जा का रूप है। यह फॉल्टिंग, वलन, प्लेट मूवमेंट, ज्वालामुखी विस्फोट और बांधों और जलाशयों जैसे मानवजनित कारकों के कारण हो सकता है। भूकंप अब तक की सभी प्राकृतिक आपदाओं में सबसे अप्रत्याशित और अत्यधिक विनाशकारी है।
दुनियाभर के अलग-अलग इलाकों में हर साल आने वाले भूकंप का कारण धरती के भीतर की उथल-पुथल बताई जाती है। एक जानकारी के अनुसार दुनिया में हर साल करीब 500,000 भूकंप आते हैं, जिनमें से लगभग 1 लाख भूकंपों को महसूस किया जा सकता है, और उनमें से लगभग 100 भूकंप ऐसे होते हैं, जो नुकसान पहुंचाते हैं। हालांकि, भूकंप की भविष्यवाणी करना फिलहाल संभव नहीं है। वैज्ञानिकों ने यह तो पता कर लिया है कि भूकंप क्यों आते हैं, लेकिन यह बताना मुमकिन नहीं कि कब पृथ्वी की चट्टानें टूटेंगी और कब भूकंप आएगा। रिपोर्ट के मुताबिक भूकंप पृथ्वी की भूपटल में अचानक होने वाला कंपन या लहर है। जो धरातल के नीचे चट्टानों के लचीलेपन या गुरुत्वाकर्षण की समस्थिति में क्षणिक अव्यवस्था के कारण उत्पन्न होता है। यह पृथ्वी के स्थलमंडल में ऊर्जा के अचानक मुक्त होने के कारण उत्पन्न होने वाली भूकंपीय तरंगों की वजह से होता है। भूकंप बहुत हिंसक हो सकते हैं और कुछ ही क्षणों में लोगों को गिराकर चोट पहुँचाने से लेकर पूरे शहर को ध्वस्त करने की क्षमता रखते हैं।
भूकंप का पहला ज्ञात साक्ष्य चीन के शांदोंग प्रांत से 1831 ईसा पूर्व प्राप्त हुआ था। यह भूकंप दुनिया का पहला रिकॉर्डेड भूकंप माना जाता है। इसके बाद भूकंपों के कई खतरनाक और विनाशकारी मामले सामने आए। दुनिया का सबसे शक्तिशाली भूकंप 22 मई 1960 को चिली में आया था, जिसकी तीव्रता 9.5 मेगावाट मापी गई थी। यह भूकंप इतना शक्तिशाली था कि पूरे क्षेत्र में भारी तबाही मच गई थी।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 26 दिसंबर 2004 का दिन दुनिया के इतिहास में सबसे भयावह प्राकृतिक आपदाओं में दर्ज है। इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप के पास समुद्र के भीतर 9.1 तीव्रता का भूकंप आया, जिसने कुछ ही मिनटों में सुनामी का रूप ले लिया। विशाल समुद्री लहरों ने भारत, श्रीलंका, इंडोनेशिया, थाईलैंड, मालदीव समेत 14 देशों में ऐसी तबाही मचाई कि लाखों लोगों की जिंदगी उजड़ गई। भारत के तमिलनाडु, अंडमान-निकोबार और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में तबाही का मंजर आज भी दिल दहलाने वाला है। कैरेबियाई देश हैती में 12 जनवरी 2010 को आया भूकंप आधुनिक इतिहास की सबसे दर्दनाक त्रासदियों में गिना जाता है। इसमें करीब 2 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई। तुर्की और सीरिया में फरवरी 2023 को तुर्की और सीरिया में आए 7.8 तीव्रता के भूकंप ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया। इस आपदा में करीब 34 हजार लोगों की मौत हुई। अरबों रुपये की संपत्ति नष्ट हो गई और लाखों लोगों को राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी। इसी भांति 23 जनवरी 1556 को चीन के शान्शी प्रांत में आया भूकंप आज भी मानव इतिहास का सबसे घातक भूकंप माना जाता है। रिकॉर्ड के अनुसार इस त्रासदी में लगभग 8 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई थी। आज तक किसी भी भूकंप में इतनी बड़ी संख्या में लोगों की जान नहीं गई। चिली के वाल्दीविया क्षेत्र में 22 मई 1960 को आया भूकंप रिक्टर स्केल पर अब तक का सबसे शक्तिशाली भूकंप माना जाता है। इसकी तीव्रता 9.5 दर्ज की गई थी. भूकंप इतना शक्तिशाली था कि इसके झटके हजारों किलोमीटर दूर तक महसूस किए गए। इसके बाद आई सुनामी ने चिली के अलावा जापान, फिलीपींस और प्रशांत महासागर के कई देशों में भारी नुकसान पहुंचाया। इस आपदा में लगभग 1,600 लोगों की मौत हुई।
-बाल मुकुन्द ओझा,
जयपुर, राजस्थान।
दुनियाभर के अलग-अलग इलाकों में हर साल आने वाले भूकंप का कारण धरती के भीतर की उथल-पुथल बताई जाती है। एक जानकारी के अनुसार दुनिया में हर साल करीब 500,000 भूकंप आते हैं, जिनमें से लगभग 1 लाख भूकंपों को महसूस किया जा सकता है, और उनमें से लगभग 100 भूकंप ऐसे होते हैं, जो नुकसान पहुंचाते हैं। हालांकि, भूकंप की भविष्यवाणी करना फिलहाल संभव नहीं है। वैज्ञानिकों ने यह तो पता कर लिया है कि भूकंप क्यों आते हैं, लेकिन यह बताना मुमकिन नहीं कि कब पृथ्वी की चट्टानें टूटेंगी और कब भूकंप आएगा। रिपोर्ट के मुताबिक भूकंप पृथ्वी की भूपटल में अचानक होने वाला कंपन या लहर है। जो धरातल के नीचे चट्टानों के लचीलेपन या गुरुत्वाकर्षण की समस्थिति में क्षणिक अव्यवस्था के कारण उत्पन्न होता है। यह पृथ्वी के स्थलमंडल में ऊर्जा के अचानक मुक्त होने के कारण उत्पन्न होने वाली भूकंपीय तरंगों की वजह से होता है। भूकंप बहुत हिंसक हो सकते हैं और कुछ ही क्षणों में लोगों को गिराकर चोट पहुँचाने से लेकर पूरे शहर को ध्वस्त करने की क्षमता रखते हैं।
भूकंप का पहला ज्ञात साक्ष्य चीन के शांदोंग प्रांत से 1831 ईसा पूर्व प्राप्त हुआ था। यह भूकंप दुनिया का पहला रिकॉर्डेड भूकंप माना जाता है। इसके बाद भूकंपों के कई खतरनाक और विनाशकारी मामले सामने आए। दुनिया का सबसे शक्तिशाली भूकंप 22 मई 1960 को चिली में आया था, जिसकी तीव्रता 9.5 मेगावाट मापी गई थी। यह भूकंप इतना शक्तिशाली था कि पूरे क्षेत्र में भारी तबाही मच गई थी।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 26 दिसंबर 2004 का दिन दुनिया के इतिहास में सबसे भयावह प्राकृतिक आपदाओं में दर्ज है। इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप के पास समुद्र के भीतर 9.1 तीव्रता का भूकंप आया, जिसने कुछ ही मिनटों में सुनामी का रूप ले लिया। विशाल समुद्री लहरों ने भारत, श्रीलंका, इंडोनेशिया, थाईलैंड, मालदीव समेत 14 देशों में ऐसी तबाही मचाई कि लाखों लोगों की जिंदगी उजड़ गई। भारत के तमिलनाडु, अंडमान-निकोबार और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में तबाही का मंजर आज भी दिल दहलाने वाला है। कैरेबियाई देश हैती में 12 जनवरी 2010 को आया भूकंप आधुनिक इतिहास की सबसे दर्दनाक त्रासदियों में गिना जाता है। इसमें करीब 2 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई। तुर्की और सीरिया में फरवरी 2023 को तुर्की और सीरिया में आए 7.8 तीव्रता के भूकंप ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया। इस आपदा में करीब 34 हजार लोगों की मौत हुई। अरबों रुपये की संपत्ति नष्ट हो गई और लाखों लोगों को राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी। इसी भांति 23 जनवरी 1556 को चीन के शान्शी प्रांत में आया भूकंप आज भी मानव इतिहास का सबसे घातक भूकंप माना जाता है। रिकॉर्ड के अनुसार इस त्रासदी में लगभग 8 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई थी। आज तक किसी भी भूकंप में इतनी बड़ी संख्या में लोगों की जान नहीं गई। चिली के वाल्दीविया क्षेत्र में 22 मई 1960 को आया भूकंप रिक्टर स्केल पर अब तक का सबसे शक्तिशाली भूकंप माना जाता है। इसकी तीव्रता 9.5 दर्ज की गई थी. भूकंप इतना शक्तिशाली था कि इसके झटके हजारों किलोमीटर दूर तक महसूस किए गए। इसके बाद आई सुनामी ने चिली के अलावा जापान, फिलीपींस और प्रशांत महासागर के कई देशों में भारी नुकसान पहुंचाया। इस आपदा में लगभग 1,600 लोगों की मौत हुई।
-बाल मुकुन्द ओझा,
जयपुर, राजस्थान।