आज की बेटियां समाज और परिवार की महत्वपूर्ण कड़ी
प्रकाशित: 21-07-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
समाज में लंबे समय तक यह धारणा बनी रही कि बेटियां केवल परिवार की जिम्मेदारियां निभाने तक सीमित हैं, लेकिन आज की बेटियां शिक्षा, विज्ञान, प्रशासन, सेना, न्यायपालिका, खेल, चिकित्सा, अंतरिक्ष और उद्योग जैसे हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। इतना ही नहीं, वे अपने माता-पिता के जीवन की सबसे बड़ी ताकत बनकर उनके कठिन समय में ऐसा उदाहरण प्रस्तुत कर रही हैं, जो समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। हाल ही में सामने आए एक उल्लेखनीय मामले में दो बेटियों ने अपने पिता की जान बचाने के लिए अपने-अपने लिवर का हिस्सा दान किया। चिकित्सकों के अनुसार, पिता का वजन अधिक होने के कारण एक डोनर का लिवर पर्याप्त नहीं था। ऐसे में दोनों बेटियों ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपने पिता को नया जीवन देने का निर्णय लिया।
चिकित्सकों ने एक साथ तीन ऑपरेशन थिएटरों में लगभग 18 घंटे तक चली जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया। यह घटना केवल चिकित्सा विज्ञान की उपलब्धि नहीं, बल्कि बेटियों के प्रेम, साहस, त्याग और जिम्मेदारी का जीवंत उदाहरण भी है। भारतीय समाज में ऐसी अनेक घटनाएं सामने आई हैं, जहां बेटियों ने अपने माता-पिता को किडनी, लिवर अथवा बोन मैरो दान कर उन्हें नया जीवन दिया है। देश के विभिन्न अस्पतालों में हर वर्ष ऐसे अनेक सफल प्रत्यारोपण किए जाते हैं, जिनमें बेटियां अपने माता-पिता के लिए सबसे पहले आगे आती हैं। कई बार देखा गया है कि जब परिवार के अन्य सदस्य किसी कारणवश अंगदान नहीं कर पाते, तब बेटियां बिना किसी स्वार्थ के अपने माता-पिता की जान बचाने का कठिन निर्णय लेती हैं। यह केवल रक्त संबंध का नहीं, बल्कि भावनात्मक समर्पण, नैतिक जिम्मेदारी और मानवीय संवेदना का सर्वोच्च उदाहरण है।
आज बेटियां भारतीय सेना में सीमा की रक्षा कर रही हैं, वायुसेना में लड़ाकू विमान उड़ा रही हैं, अंतरिक्ष में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं, न्यायपालिका में न्याय दे रही हैं, प्रशासनिक सेवाओं में देश का नेतृत्व कर रही हैं और विज्ञान, चिकित्सा, शिक्षा तथा उद्योग के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां हासिल कर रही हैं। पी. वी. सिंधु, मैरी कॉम, मिताली राज, अवनी चतुर्वेदी, टेसी थॉमस, सुनीता विलियम्स जैसी अनेक महिलाओं ने यह सिद्ध किया है कि अवसर मिलने पर बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं रहतीं। इसी प्रकार देशभर में हजारों डॉक्टर, वैज्ञानिक, आईएएस अधिकारी, न्यायाधीश, इंजीनियर और उद्यमी महिलाएं अपने कार्यों से समाज का नेतृत्व कर रही हैं।
बदलते समय में बेटियां केवल परिवार का गौरव नहीं बढ़ा रहीं, बल्कि बुजुर्ग माता-पिता की सबसे बड़ी सहारा भी बन रही हैं। वे आर्थिक रूप से सहयोग करने के साथ-साथ बीमारी, संकट और विपरीत परिस्थितियों में माता-पिता की सेवा और देखभाल की जिम्मेदारी भी पूरी निष्ठा से निभा रही हैं।
-वीरेंद्र कुमार जाटव,
नई दिल्ली।
चिकित्सकों ने एक साथ तीन ऑपरेशन थिएटरों में लगभग 18 घंटे तक चली जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया। यह घटना केवल चिकित्सा विज्ञान की उपलब्धि नहीं, बल्कि बेटियों के प्रेम, साहस, त्याग और जिम्मेदारी का जीवंत उदाहरण भी है। भारतीय समाज में ऐसी अनेक घटनाएं सामने आई हैं, जहां बेटियों ने अपने माता-पिता को किडनी, लिवर अथवा बोन मैरो दान कर उन्हें नया जीवन दिया है। देश के विभिन्न अस्पतालों में हर वर्ष ऐसे अनेक सफल प्रत्यारोपण किए जाते हैं, जिनमें बेटियां अपने माता-पिता के लिए सबसे पहले आगे आती हैं। कई बार देखा गया है कि जब परिवार के अन्य सदस्य किसी कारणवश अंगदान नहीं कर पाते, तब बेटियां बिना किसी स्वार्थ के अपने माता-पिता की जान बचाने का कठिन निर्णय लेती हैं। यह केवल रक्त संबंध का नहीं, बल्कि भावनात्मक समर्पण, नैतिक जिम्मेदारी और मानवीय संवेदना का सर्वोच्च उदाहरण है।
आज बेटियां भारतीय सेना में सीमा की रक्षा कर रही हैं, वायुसेना में लड़ाकू विमान उड़ा रही हैं, अंतरिक्ष में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं, न्यायपालिका में न्याय दे रही हैं, प्रशासनिक सेवाओं में देश का नेतृत्व कर रही हैं और विज्ञान, चिकित्सा, शिक्षा तथा उद्योग के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां हासिल कर रही हैं। पी. वी. सिंधु, मैरी कॉम, मिताली राज, अवनी चतुर्वेदी, टेसी थॉमस, सुनीता विलियम्स जैसी अनेक महिलाओं ने यह सिद्ध किया है कि अवसर मिलने पर बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं रहतीं। इसी प्रकार देशभर में हजारों डॉक्टर, वैज्ञानिक, आईएएस अधिकारी, न्यायाधीश, इंजीनियर और उद्यमी महिलाएं अपने कार्यों से समाज का नेतृत्व कर रही हैं।
बदलते समय में बेटियां केवल परिवार का गौरव नहीं बढ़ा रहीं, बल्कि बुजुर्ग माता-पिता की सबसे बड़ी सहारा भी बन रही हैं। वे आर्थिक रूप से सहयोग करने के साथ-साथ बीमारी, संकट और विपरीत परिस्थितियों में माता-पिता की सेवा और देखभाल की जिम्मेदारी भी पूरी निष्ठा से निभा रही हैं।
-वीरेंद्र कुमार जाटव,
नई दिल्ली।