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जेन जी आंदोलन : युवा विद्रोह और भाषा की चुनौतियां

प्रकाशित: 12-08-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
अन्तर्राष्ट्रीय युवा दिवस हर साल 12 अगस्त को मनाया जाता है। आज का युवा जेन जी के नाम से मशहूर हो रहा है। नेपाल में आंदोलन और सत्ता में बदलाव के बाद ‘जेन जी' और ‘नेपो किड्स' जैसे शब्द घर-घर में सुनाई देने लगे हैं। जिन लोगों ने 1997-2012 के बीच जन्म लिया है, साधारणतया उन्हें जेन जी के नाम से सम्बोधित किया जा रहा है। यह पीढ़ी सोशल मीडिया के दौर में बड़ी हुई है। इंटरनेट और स्मार्ट फोन जैसी तकनीक में दक्ष, सामाजिक मुद्दों पर आवाज़ बुलंद कर संगठित होने की क्षमता के कारण जेन जी ने जल्द ही समाज में अपना वर्चस्व स्थापित कर लिया। जेन जी युवा जोश और आाढाsश का दूसरा नाम है। यह वर्ग हमारे देश में भी अंगड़ाई ले रहा है। बेरोजगारी और पेपर लीक जैसे मुद्दों को उठाया जा रहा है। सही मुद्दों पर आंदोलन लोकतंत्र के लिए हितकारी है मगर सियासी ताकतों के बहकावे में आकर लड़ना लोकतंत्र के लिए हितकारी नहीं कहा जा सकता। जंतर मंतर पर हुए आंदोलन में जेन जी की अश्लील भाषा के प्रयोग पर लोगों ने चिंता जाहिर की है। आंदोलन के दौरान कई लड़कियों के हाथों में ऐसी तख्तियां थी, जिसकी शब्दावली अत्यंत अश्लील और अभद्र थी। इनमें नाबालिग लड़किया भी शामिल थी जो मोज़ मस्ती के लिए प्रदर्शन में आई बताई। कई राजनैतिक पार्टियों की छात्र शाखा की लड़किया भी मोदी विरोध में नारे लगा रही थी। इसीलिए कहा जा रहा है, जेन जी को जोश के साथ होश की भी जरुरत है। अन्तर्राष्ट्रीय युवा दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य देश और दुनिया के युवाओं की आवाज, कार्यों और उनके द्वारा किए गये आविष्कार को ाञ्च-ाुट्टह्रश्ह्न तक पहुंचाना है। विश्व में युवाओं की जनसंख्या को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र ने 17 दिसम्बर 1999 को यह फैसला लिया कि प्रत्येक वर्ष 12 अगस्त को विश्व युवा दिवस मनाया जायेगा। अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस 2026 का विषय 'विभिन्न संदर्भ, समान आकांक्षाएं' है। यह विषय इस बात को स्वीकार करता है कि युवा लोगों का जीवन विभिन्न राष्ट्रीय और स्थानीय वास्तविकताओं से प्रभावित होता है, फिर भी उनकी आकांक्षाएं उल्लेखनीय रूप से समान होती हैं। इसके साथ ही, इसका नारा ‘युवाओं का सशक्तिकरण, कल का निर्माण' है, जो यह दर्शाता है कि युवा न केवल भविष्य के नेता हैं, बल्कि आज के परिवर्तनकारी भी हैं। युवा नेतृत्व को लेकर आज व्यापक बहस छिड़ी है। युवा किसी भी देश और समाज में बदलाव के मुख्य वाहक होते हैं।
-बाल मुकुन्द ओझा,
जयपुर, राजस्थान।