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सफाई कर्मियों का नियमितीकरण का मुद्दा राष्ट्रव्यापी

प्रकाशित: 12-09-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
हरियाणा में सफाई कर्मचारियों का आंदोलन अब केवल कर्मचारियों की सेवा संबंधी मांगों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सरकार और सफाई व्यवस्था से जुड़े हजारों कर्मचारियों के बीच भरोसे और संवाद का गंभीर प्रश्न बनता जा रहा है। राज्य के विभिन्न शहरी निकायों में करीब 13000 सफाई कर्मचारी, सीवर कर्मचारी और फायर कर्मचारी पिछले एक महीने से अधिक समय से अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन और हड़ताल पर हैं। आंदोलन का सबसे प्रमुख मुद्दा वर्षों से संविदा, ठेका या अस्थायी व्यवस्था के तहत काम कर रहे कर्मचारियों को नियमित करना और पूर्व में सरकार तथा कर्मचारी संगठनों के बीच हुए समझौतों को लिखित आदेश के माध्यम से लागू करना है। यहां यह समझना आवश्यक है कि सफाई व्यवस्था किसी भी शहर की बुनियादी नागरिक सेवा है। यहां यह समझना आवश्यक है कि सफाई व्यवस्था किसी भी शहर की बुनियादी नागरिक सेवा है।
आंदोलनकारी कर्मचारियों का कहना है कि वे वर्षों से शहरों की सफाई, सीवर व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं का अत्यंत महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं, लेकिन उनकी सेवा स्थिति अभी भी अस्थायी बनी हुई है। नगर निकायों की स्वच्छता व्यवस्था में इन कर्मचारियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। इसके बावजूद उन्हें स्थायी कर्मचारियों के समान सेवा सुरक्षा, वेतनमान, पदोन्नति, पेंशन तथा अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ नहीं मिल पा रहे हैं। यही कारण है कि कर्मचारी संगठन लंबे समय से ठेका प्रथा समाप्त करने और कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने की मांग करते रहे हैं। कर्मचारी संगठनों के अनुसार राज्य में 13 हजार से अधिक संविदा अथवा कच्चे सफाई कर्मचारी इस मांग से सीधे प्रभावित हैं। इन कर्मचारियों के लिए नियमितीकरण केवल नौकरी का प्रश्न नहीं है, बल्कि उनके परिवारों की आर्थिक सुरक्षा, भविष्य, सम्मान और सामाजिक स्थिरता से जुड़ा विषय है। वर्षों तक अस्थायी कर्मचारी के रूप में काम करने के बाद भी यदि कर्मचारी को स्थायी कर्मचारी का दर्जा नहीं मिलता तो उसके सामने सेवानिवृत्ति और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा का प्रश्न खड़ा रहता है। सरकार की ओर से कर्मचारियों को हरियाणा संविदात्मक कर्मचारी (सेवा की सुरक्षा) अधिनियम, 2024 के दायरे में लाकर 60 वर्ष की आयु तक नौकरी की सुरक्षा देने का प्रस्ताव सामने आया है।
सरकार का तर्क है कि इससे संविदात्मक कर्मचारियों को सेवा में सुरक्षा मिलेगी और उन्हें अचानक नौकरी से हटाए जाने का खतरा कम होगा। लेकिन आंदोलनकारी कर्मचारी संगठनों का कहना है कि केवल नौकरी की सुरक्षा नियमित सेवा का विकल्प नहीं हो सकती।
-वीरेंद्र कुमार जाटव,
नई दिल्ली।