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संबंधों को और मजबूत करेंगे भारत-रूस

प्रकाशित: 12-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
संबंधों को और मजबूत करेंगे भारत-रूस
विशेष प्रतिनिधि
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पावार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ वार्ता के दौरान काला सागर में भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने पोन युद्ध को समाप्त करने के लिए किसी भी शांति पहल का समर्थन करने की भारत की तत्परता दोहराई। दोनों नेताओं ने बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को और मजबूत करने पर भी सहमति जताई।
दोनों नेताओं ने वर्ष 2030 तक वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने तथा रक्षा, ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया। पुतिन के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए तीन दिवसीय यात्रा पर पावार सुबह नयी दिल्ली पहुंचने के कुछ घंटे बाद दोनों नेताओं के बीच वार्ता हुई। वार्ता के बाद दोनों नेता भारत मंडपम परिसर के भीतर एक ही कार में सवार होकर कारोबारी मंच के आयोजन स्थल पर पहुंचे। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, विभिन्न क्षेत्रों में गहरे सहयोग को बनाए रखने के अपने दृढ़ संकल्प का संकेत देते हुए दोनों नेताओं ने भारत-रूस विशेष रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के प्रयास जारी रखने पर सहमति जताई। बयान में कहा गया कि यह साझेदारी महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज कर रही है और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच भी मजबूत बनी हुई है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि मोदी ने पुतिन के उस निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है, जिसमें उन्होंने दोनों देशों के बीच वार्षिक शिखर वार्ता के लिए रूस आने का आग्रह किया था। बयान के मुताबिक, 45 मिनट से अधिक समय तक चली वार्ता में मोदी और पुतिन ने रक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों, असैन्य परमाणु ऊर्जा, उर्वरक आपूर्ति और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई। मंत्रालय ने कहा कि दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र के संघर्षों समेत आपसी हित से जुड़े प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र के संघर्षों का समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर असर पड़ा है। उसने कहा, प्रधानमंत्री ने एक बार फिर दोहराया कि संघर्षों के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति ही आगे बढ़ने का रास्ता है और भारत शांति प्रयासों में सहायता के लिए तैयार है। मोदी और पुतिन इससे पहले बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के दौरान मिले थे। उस समय प्रधानमंत्री ने संघर्ष को तत्काल समाप्त करने का आह्वान किया था और रूसी नेता से अंतहीन युद्ध से युद्ध की समाप्ति की ओर बढ़ने का आग्रह किया था। विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों नेताओं ने पहली बार भारत में नौ सितंबर से रूस की अंतरराष्ट्रीय औद्योगिक प्रदर्शनी इनोप्रोम इंडिया के आयोजन के कदम का स्वागत किया और व्यापार तथा औद्योगिक संबंधों को और विस्तार देने में इसके महत्व को रेखांकित किया। मोदी और पुतिन ने भारत मंडपम में आयोजित इनोप्रोम इंडिया प्रदर्शनी का दौरा किया और प्रतिभागियों से बातचीत भी की। विदेश मंत्रालय ने कहा कि मोदी और पुतिन ने बहुपक्षीय मंचों पर भारत-रूस सहयोग, विशेष रूप से वर्ष 2026 में भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स बैठकों में सहयोग को लेकर विचारों का आदान-प्रदान किया। उसने कहा, राष्ट्रपति पुतिन ने प्रधानमंत्री को 24वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए रूस आने का निमंत्रण दिया। प्रधानमंत्री ने निमंत्रण स्वीकार कर लिया है। शिखर सम्मेलन की तारीखें राजनयिक माध्यमों से दोनों पक्षों की सुविधा के अनुसार तय की जाएंगी। दोनों नेताओं ने व्यापार और निवेश, ऊर्जा तथा उर्वरक सुरक्षा समेत कई क्षेत्रों में जारी सहयोग पर भी चर्चा की। वार्ता में व्यापार और निवेश संबंधों को बढ़ावा देने के उपायों पर प्रमुखता से चर्चा हुई। भारत ने रूस में भारतीय निर्यातकों के लिए अधिक बाजार पहुंच की मांग रखी, ताकि बढ़ते व्यापार घाटे को कम किया जा सके। दोनों पक्षों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने की रणनीतियों पर भी विचार-विमर्श किया। वर्तमान में दोनों देशों के बीच सालाना व्यापार करीब 65 अरब अमेरिकी डॉलर है। इसके अलावा, दोनों पक्षों ने अपने पहले से मजबूत रक्षा सहयोग को और विस्तार देने के तौर-तरीकों पर भी चर्चा की।