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क्या मक्का समझौता लागू है?

प्रकाशित: 12-09-2026 | लेखक: अनिल नरेंद्र
क्या मक्का समझौता लागू है?
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि सऊदी अरब पर किसी भी हमले की स्थिति में मक्का अलायंस सक्रिय हो सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी एक सदस्य के खिलाफ आक्रामकता को मक्का समझौते में शामिल तीनों देशों पर हमले के रूप में लिया जाएगा। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब सऊदी अरब को अपने दक्षिण हिस्से में कई एनजी सेंटर को बंद करने पर मजबूर होना पड़ा है। यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर नए हमले करने का दावा किया है। हूती विद्रोहियों के ये हमले ऐसे समय में हुए हैं, जब ईरान ने अमेरिका के प्रति और आक्रामक रुख अपनाने की चेतावनी दी है। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने जियो न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में कहाः हम इस समझौते की शर्तें और नियमों से बंधे हैं और इंशाअल्लाह हूतियों को यह समझना चाहिए कि उनके कदम इस समझौते को सक्रिय कर सकते हैं। बता दें कि तुर्किये, सऊदी अरब और पाक के बीच त्रिपक्षीय रक्षा समझौते पर पिछले महीने मक्का में हस्ताक्षर हुए थे। आसिफ ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है कि सऊदी अरब ने पाकिस्तान से संपर्क किया है या नहीं, लेकिन उन्होंने दोहराया कि समझौते के मुताबिक मदद करना या प्रतिक्रिया देना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने हूती विद्रोहियों से सऊदी अरब को यमन के संघर्ष में और ज्यादा खींचने से बचने की अपील की। हम सऊदी अरब की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपना समर्थन दोहराते हैं। वहीं सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद ने कहा, हूती विद्रोहियों ने अपने लिए ऐसी स्थिति पैदा कर ली है, जिसे वे झेल नहीं पाएंगे। इसलिए मैं यही कहूंगा कि अब कूटनीति का दरवाजा बंद हो रहा है। अब लोग पूछ रहे हैं कि मक्का समझौता आखिर किन देशों के लिए है? पाकिस्तान की विदेश नीति पर गहरी नजर रखने वाले एक विशेषज्ञ मानते हैं कि किसी हमले को हमेश एक निर्धारित भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर देखा जाता है। मिसाल के तौर पर सीरिया में तुकी पर हुए हमले को मक्का समझौते के उल्लंघन के रूप में नहीं देखा जाएगा। हालांकि अभी हमला सऊदी अरब के भीतर हुआ है। इसलिए कम से कम इस शर्त को पूरा करता है। थिंक टैंक अरब सेंटर वाशिंगटन डीसी ने 19 अगस्त को प्रकाशित एक आर्टिकल में लिखा है कि मक्का समझौते से वास्तविक सैन्य प्रतिक्रिया होने की संभावना कम है। बेशक, मक्का समझौता सऊदी अरब के लिए अमेरिका की सुरक्षा गारंटी की जगह नहीं लौटा। सऊदी जिन देशों को अपने साथ लेकर आया है। वे पहले से ही अमेरिका के सहयोगी हैं। यही वजह है कि अमेरिका ने इस समझौते को लेकर कोई चिंता नहीं जताई है। तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने स्पष्ट रूप से कहा था कि इस समझौते में किसी साझा दुश्मन की पहचान नहीं की गई है और यह ईरान के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा था कि इसकी तैयारियां दो साल से भी ज्यादा से चल रही थी। इसका मकसद इस समझौते को मौजूदा युद्ध से अलग दिखाना था। विश्लेषकों का मानना है कि मक्का समझौते को चिंता के संकेत के तौर पर देखना सबसे उचित होगा। इसके पीछे यह सोच है कि किसी एक सुरक्षा गारंटर पर निर्भर रहना अब समझदारी नहीं है। खास करके सऊदी का अमेरिका पर भरोसा कम हुआ है। पाक दुनिया का एक मात्र मुस्लिम बहुल परमाणु संपन्न देश है। अभी स्पष्ट नहीं है कि नया गठबंधन किसी हमले के जवाब में किस तरह की कार्रवाई करेगा? हमने हाल में हूती हमले के खिलाफ पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब की कोई संयुक्त या अकेले जवाबी कार्रवाई नहीं देखी। हुसैन हक्कानी ने एक्स पर लिखा हैः ज्वाइंट डिफेंस आमतौर पर किसी साझा दुश्मन के खिलाफ होता है, अगर कोई साझा दुश्मन नहीं है तो डिफेंस का आपरेशन हो सकता है, लेकिन ज्वाइंट डिफेंस पैक्ट नहीं।
-अनिल नरेन्द्र