स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक
प्रकाशित: 06-08-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
झारखंड की राजधानी रांची एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, निष्पक्षता और युवाओं के भविष्य को लेकर उठे गंभीर सवालों के केंद्र में आ गई है। झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग से संबंधित परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, धांधली और अनियमितताओं के विरोध में बड़ी संख्या में छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आमरण अनशन और अनिश्चितकालीन धरना दे रहे हैं। इस संदर्भ में अब तक 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। उनका कहना है कि यदि भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता समाप्त हो जाएगी तो लाखों युवाओं का भविष्य भी अनिश्चित हो जाएगा।
छात्रों की प्रमुख मांग 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने तथा पूरे मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी, विशेष रूप से सीबीआई, से कराने की है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं, प्रश्नपत्र लीक हुए हैं, ओएमआर शीटों से छेड़छाड़ की गई है तथा परीक्षा संचालन में पारदर्शिता का अभाव रहा है। छात्रों का यह भी आरोप है कि जिन एजेंसियों पर पहले से सवाल उठ चुके हैं या जिन्हें लेकर विवाद रहे हैं, उन्हें परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी देकर व्यवस्था की विश्वसनीयता को कमजोर किया गया है। उनका कहना है कि केवल कुछ लोगों की गिरफ्तारी या अधिकारियों के इस्तीफे से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि पूरी प्रािढया की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
दूसरी ओर राज्य सरकार का कहना है कि वह मामले को अत्यंत गंभीरता से ले रही है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ने सीआईडी के अंतर्गत एसआईटी का गठन किया है, जिसने जांच शुरू कर दी है। कुछ संदिग्धों की गिरफ्तारी भी हुई है और घटपाम के बीच जेपीएससी अध्यक्ष का इस्तीफा भी सामने आया है। सरकार का तर्क है कि राज्य की अपनी जांच एजेंसियां सक्षम हैं और उनके रहते हर मामले में सीबीआई जांच की मांग करना राज्य की संस्थाओं पर अविश्वास व्यक्त करने जैसा है। सरकार का यह भी कहना है कि यदि प्रारंभिक जांच में व्यापक अनियमितताएं सिद्ध होती हैं तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़े कदम उठाए जाएंगे।
हालांकि छात्रों और विपक्षी दलों का एक बड़ा वर्ग इस तर्क से संतुष्ट दिखाई नहीं देता। उनका कहना है कि जब आरोप सीधे परीक्षा प्रणाली और उससे जुड़े प्रभावशाली नेटवर्क पर लग रहे हों, तब राज्य सरकार के अधीन काम करने वाली एजेंसियों की जांच पर पूरी तरह भरोसा करना कठिन हो जाता है। आंदोलनकारियों का मानना है कि सीबीआई जैसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी द्वारा जांच कराए जाने से न केवल सच्चाई सामने आएगी, बल्कि युवाओं के बीच विश्वास भी बहाल होगा। यही कारण है कि आंदोलन लगातार लंबा खिंचता जा रहा है और छात्र अपनी मांगों पर अडिग बने हुए हैं। यह विवाद केवल एक परीक्षा या एक राज्य तक सीमित नहीं है।
-वीरेंद्र कुमार जाटव,
नई दिल्ली।
छात्रों की प्रमुख मांग 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने तथा पूरे मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी, विशेष रूप से सीबीआई, से कराने की है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं, प्रश्नपत्र लीक हुए हैं, ओएमआर शीटों से छेड़छाड़ की गई है तथा परीक्षा संचालन में पारदर्शिता का अभाव रहा है। छात्रों का यह भी आरोप है कि जिन एजेंसियों पर पहले से सवाल उठ चुके हैं या जिन्हें लेकर विवाद रहे हैं, उन्हें परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी देकर व्यवस्था की विश्वसनीयता को कमजोर किया गया है। उनका कहना है कि केवल कुछ लोगों की गिरफ्तारी या अधिकारियों के इस्तीफे से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि पूरी प्रािढया की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
दूसरी ओर राज्य सरकार का कहना है कि वह मामले को अत्यंत गंभीरता से ले रही है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ने सीआईडी के अंतर्गत एसआईटी का गठन किया है, जिसने जांच शुरू कर दी है। कुछ संदिग्धों की गिरफ्तारी भी हुई है और घटपाम के बीच जेपीएससी अध्यक्ष का इस्तीफा भी सामने आया है। सरकार का तर्क है कि राज्य की अपनी जांच एजेंसियां सक्षम हैं और उनके रहते हर मामले में सीबीआई जांच की मांग करना राज्य की संस्थाओं पर अविश्वास व्यक्त करने जैसा है। सरकार का यह भी कहना है कि यदि प्रारंभिक जांच में व्यापक अनियमितताएं सिद्ध होती हैं तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़े कदम उठाए जाएंगे।
हालांकि छात्रों और विपक्षी दलों का एक बड़ा वर्ग इस तर्क से संतुष्ट दिखाई नहीं देता। उनका कहना है कि जब आरोप सीधे परीक्षा प्रणाली और उससे जुड़े प्रभावशाली नेटवर्क पर लग रहे हों, तब राज्य सरकार के अधीन काम करने वाली एजेंसियों की जांच पर पूरी तरह भरोसा करना कठिन हो जाता है। आंदोलनकारियों का मानना है कि सीबीआई जैसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी द्वारा जांच कराए जाने से न केवल सच्चाई सामने आएगी, बल्कि युवाओं के बीच विश्वास भी बहाल होगा। यही कारण है कि आंदोलन लगातार लंबा खिंचता जा रहा है और छात्र अपनी मांगों पर अडिग बने हुए हैं। यह विवाद केवल एक परीक्षा या एक राज्य तक सीमित नहीं है।
-वीरेंद्र कुमार जाटव,
नई दिल्ली।