पीड़ित महिला की बात बिना पूर्वाग्रह के सुनें, निर्णय का सम्मान करें : अध्यक्ष महिला आयोग
प्रकाशित: 11-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
भोपाल (ब्यूरो प्रमुख)। राष्ट्रीय महिला आयोग के तत्वावधान में मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग द्वारा महिलाओं को हिंसा एवं अन्य संकट की परिस्थितियों में प्रभावी, संवेदनशील एवं समन्वित सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वन स्टॉप सेंटर के काउंसलर्स एवं केस वर्कर्स के लिए एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्पाम आयोजित किया गया।
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती रेखा यादव ने कहा कि जब कोई महिला अथवा बालिका अपनी समस्या लेकर वन स्टॉप सेंटर पहुंचती है, तो काउंसलर का पहला दायित्व उसकी बात को बिना किसी पूर्वाग्रह, निर्णय या निष्कर्ष के ध्यानपूर्वक सुनना है। महिला की परिस्थितियों को समझे बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उसके लिए और अधिक कठिनाई पैदा कर सकता है। प्रशिक्षण के दौरान भारतीय न्याय संहिता , दंड संबंधी कानूनों, पॉक्सो अधिनियम, दहेज प्रतिषेध अधिनियम, बाल विवाह निषेध अधिनियम, घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, नागरिक सुरक्षा से संबंधित प्रावधानों सहित अन्य कानूनों की बारीकियों एवं उनके व्यावहारिक ािढयान्वयन की जानकारी दी गई। साथ ही महिलाओं के विरुद्ध हिंसा की रोकथाम के लिए बालकों एवं युवाओं में भी लैंगिक समानता, सम्मान और संवेदनशीलता की समझ विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। आयोग के सदस्य श्री सुरेश तोमर ने सर्वाइवर केंद्रित रणनीति पर चर्चा करते हुए कहा कि प्रत्येक पीड़ित महिला की सुरक्षा, सम्मान, गोपनीयता, आवश्यकताओं और निर्णय लेने की क्षमता को केंद्र में रखकर सहायता एवं पुनर्वास की व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि महिला को केवल एक ‘प्रकरण' के रूप में नहीं, बल्कि अपने जीवन के संघर्ष से गुजर रही एक व्यक्ति के रूप में समझना आवश्यक है। प्रशिक्षण के दूसरे सत्र में सुश्री प्राची चंदेल ने केस डॉक्यूमेंटेशन, रिकॉर्ड संधारण एवं डेटा के व्यवस्थित प्रबंधन के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जब कोई महिला या बालिका वन स्टॉप सेंटर आती है, तो उसकी परिस्थिति, आवश्यक सेवाओं और प्रकरण से संबंधित जानकारी का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण किया जाना चाहिए।
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती रेखा यादव ने कहा कि जब कोई महिला अथवा बालिका अपनी समस्या लेकर वन स्टॉप सेंटर पहुंचती है, तो काउंसलर का पहला दायित्व उसकी बात को बिना किसी पूर्वाग्रह, निर्णय या निष्कर्ष के ध्यानपूर्वक सुनना है। महिला की परिस्थितियों को समझे बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उसके लिए और अधिक कठिनाई पैदा कर सकता है। प्रशिक्षण के दौरान भारतीय न्याय संहिता , दंड संबंधी कानूनों, पॉक्सो अधिनियम, दहेज प्रतिषेध अधिनियम, बाल विवाह निषेध अधिनियम, घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, नागरिक सुरक्षा से संबंधित प्रावधानों सहित अन्य कानूनों की बारीकियों एवं उनके व्यावहारिक ािढयान्वयन की जानकारी दी गई। साथ ही महिलाओं के विरुद्ध हिंसा की रोकथाम के लिए बालकों एवं युवाओं में भी लैंगिक समानता, सम्मान और संवेदनशीलता की समझ विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। आयोग के सदस्य श्री सुरेश तोमर ने सर्वाइवर केंद्रित रणनीति पर चर्चा करते हुए कहा कि प्रत्येक पीड़ित महिला की सुरक्षा, सम्मान, गोपनीयता, आवश्यकताओं और निर्णय लेने की क्षमता को केंद्र में रखकर सहायता एवं पुनर्वास की व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि महिला को केवल एक ‘प्रकरण' के रूप में नहीं, बल्कि अपने जीवन के संघर्ष से गुजर रही एक व्यक्ति के रूप में समझना आवश्यक है। प्रशिक्षण के दूसरे सत्र में सुश्री प्राची चंदेल ने केस डॉक्यूमेंटेशन, रिकॉर्ड संधारण एवं डेटा के व्यवस्थित प्रबंधन के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जब कोई महिला या बालिका वन स्टॉप सेंटर आती है, तो उसकी परिस्थिति, आवश्यक सेवाओं और प्रकरण से संबंधित जानकारी का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण किया जाना चाहिए।